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Explainer: थायरॉइड होने से पहले और बाद में शरीर में क्या होता है? यह हार्मोन कैसे करता काम, पढ़िए इससे जुड़ी जानकारियां

Thyroid Explainer: देश की एक बड़ी संख्या थाइराइड की समस्या से जूझ रही है. बता दें कि, थायराइड हमारे गर्दन के सामने एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि है, जो शरीर में हार्मोन बनाने का कार्य करता है. यह गले के सामने वाले हिस्से, स्वरयंत्र (vocal cord) के नीचे की ओर पाई जाती है. यह हार्मोन असंतुलित होने पर थायराइड की समस्या होती है. जानिए इससे जुड़ी कई और रोचक जानकारियां-

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: February 22, 2026 13:16:18 IST

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Thyroid Explainer: देश की एक बड़ी संख्या थाइराइड की समस्या से जूझ रही है. बता दें कि, थायराइड हमारे गर्दन के सामने एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि है, जो शरीर में हार्मोन बनाने का कार्य करता है. यह गले के सामने वाले हिस्से, स्वरयंत्र (vocal cord) के नीचे की ओर पाई जाती है. यह शरीर में तब तक सही है जब तक कंट्रोल में रहे. यह हार्मोन असंतुलित होने पर थायराइड की समस्या होती है. इसका समय रहते इलाज न हुआ तो यह भयावह भी हो सकता है. थायराइड मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं, जिसमें हाइपो थायराइड और हाइपर थायराइड शामिल है. थायराइड हार्मोन असंतुलित होने पर शरीर के कई हिस्सों में दर्द होने लगता है. 

बता दें कि, थायरॉइड ग्रंथि में छोटी-छोटी थैली जैसे टुकड़े होते हैं. जिनमें गाढ़ा द्रव होता है. इस द्रव में थायरॉइड के हार्मोन पाए जाते हैं. इन हार्मोन में आयोडीन की मात्रा अधिक होती है. थायरॉइड ग्रंथि एंडोक्राइन प्रणाली का हिस्सा है. जो कई अंगों और ऊतकों से मिलकर बनी  है. ये ऊतक हार्मोन यानी रासायनिक पदार्थों को पैदा करते हैं, जमा करते हैं और खून में भेजते हैं. ऐसे में लोगों का सवाल होता है कि, आखिर कैसे जानें कि शरीर में थायराइड बढ़ गया है? थायरॉइड होने से पहले और बाद में शरीर में क्या होता है? थायराइड बढ़ने पर शरीर के किन अंगों में दर्द होता है? आइए जानते हैं इससे जुड़ी कुछ जानकारियों के बारे में-

थायरॉइड किन वजहों से होता है?

अगर वजह की बात करें तो, आयोडीन शरीर के लिए बहुत जरूरी है. शरीर में 80 प्रतिशत आयोडीन, थायरॉइड में पाया जाता है. खाने में आयोडीन की कमी होने से थायरॉइड ग्रंथि सूज जाती है जिसे घेंघा (गॉयटर) कहते हैं. आयोडीन सभी के लिए  बेहद ज़रूरी है. चाहे वो बड़ा हो या बच्चा. जानें, छोटे बच्चों में क्या करता है आयोडीन. छोटे बच्चों में आयोडीन की कमी से हार्मोन का निर्माण धीमा पड़ जाता है. इससे उनके शारीरिक, मानसिक और जननांगों का ठीक से विकास नहीं हो पाता. इस बीमारी को क्रीटीनिज़्म कहते हैं.

दवाइयों के साइड इफेक्ट से भी थायरॉइड हो जाता है. सोया प्रोटीन, कैप्सूल और पाउडर के रूप में सोया उत्पादों को जरूरत से ज्यादा लेने से भी थायरॉइड हो जाता है. त्वचा की समस्या से छुटकारा पाने के लिए रेडिएशन थेरेपी भी इसके होने की वजहों में से एक है. रेडिएशन थेरेपी की वजह से टॉन्सिल्स या फिर थाइमस ग्रंथि में परेशानी हो सकती है, जिस वजह से थायरॉइड हो सकता है. मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में हॉर्मोनल परिवर्तन से भी थायरॉइड होता है. तनाव का असर दिमाग के साथ-साथ थायरॉइड ग्रंथि पर भी पड़ता है, जिस वजह से हॉर्मोन स्राव बढ़ने से थायरॉइड होता है. इसके अलावा, यह बीमारी जेनेटिक भी हो सकती है, यानी माता-पिता को थायरॉइड हो तो बच्चों को होने की संभावना भी रहती है.

शरीर में थायराइड बढ़ने के संकेत

हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, अंडरएक्टिव थायराइड यानी हाइपोथायराइडिज्म होने पर अत्यधिक थकान, वजन बढ़ना, ठंड लगने की समस्या, जॉइंट और मसल्स पेन, स्किन ड्राई होना, बाल झड़ना, इरेगुलर पीरियड्स, स्लो हार्ट रेट और डिप्रेशन जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. दूसरी तरह हाइपरएक्टिव थायराइड यानी हाइपरथायराइडिज्म होने पर चिड़चिड़ापन, ज्यादा पसीना आना, हार्टबीट बढ़ना, मसल्स में दर्द होना और सोने में परेशानी होने जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं.

थायरॉइड हार्मोन कैसे काम करते हैं?

थायरॉइड हार्मोन पेट में पाचक रस के बनने की गति को बढ़ाते हैं. थायरॉइड हार्मोन, ऊतकों के बढ़ने में मदद करते हैं. शरीर के तापमान को बनाए रखने के लिए ऊर्जा पैदा करते हैं. वे खून से खराब कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा को निकालने में लीवर की मदद करते हैं. खराब कोलेस्ट्रॉल पित्त से मिलकर मल-मूत्र के रूप में बाहर निकलता है.

थायरॉइड हार्मोन कम-ज्यादा होने से क्या होता है?

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो, थायरॉइड हार्मोन की कमी से शरीर में खराब कोलेस्टराल बढ़ता है. जिससे अच्छा कोलेस्टराल घटने लगता है. वहीं, थायरॉइड हार्मोन अधिक होने से दस्त और कम होने से कब्ज़ हो सकता है. क्योंकि ये हार्मोन मेटाबोलिज़म को नियंत्रण में रखता है. थायरॉइड दो तरह का होता है. पहला हाइपर थायरॉइड- जिसका वजन कम होता है. दूसरा हाइपो थायरॉइड- जिसमें वजन बढ़ता है.

हाइपर थायरॉइड मरीज क्या खाएं?

  • ब्रोकली खाएं. इसमें गॉइट्रोजेन्स और आइसोथायोसाइनेट्स तत्व होते हैं, जो थायरॉइड के निर्माण पर अंकुश लगाते हैं.
  • सोया प्रोडक्ट्स लें. ये प्रोटीन से भरपूर होते हैं. प्रोटीन थायरॉइड हार्मोंस को दूसरे बॉडी टिश्यूज़ में ट्रांसपोर्ट कर देते हैं.
  • नट्स, अंडे और फलियों को भी डायट में शामिल कर सकते हैं.
  • ओमेगा 3 फैटी एसिड्स लें. इससे हार्मोंस में संतुलन रहेगा. इसके लिए फ्लैक्स सीड्स, अखरोट और मछली ले सकते हैं.
  • बेरीज़ लें. ये थायरॉइड ग्लांड्स को हेल्दी रखती हैं. बेरीज़ में ब्लू बेरीज़, स्ट्रॉबेरीज़, ब्लैक बेरीज़ और चेरी भी शामिल है. .
  • आंवला ले. ये थायरॉइड को कंट्रोल करता है.

हाइपो थायरॉइड मरीज क्या खाएं?

  • हाइपो थायराइ मरीज में कैल्शियम और विटामिन-b की कमी हो जाती है. जिससे थकान रहती है. इसके लिए वे अदरक खाने में ज़रूर शामिल करें.
  • साबुत अनाज, जैसे-ज्वार, बाजरा लें. साबुत अनाज में फाइबर, प्रोटीन और विटामिन्स भरपूर मात्रा में होता है.
  • फल, सब्ज़ियां लें. इनमें एंटीआक्सीडेंट होते हैं. जो थायरॉइड को बढ़ने नहीं देता.
  • अदरक में कैल्शियम और विटामिन-b कॉम्प्लेक्स होता है.
  • इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बायोटिन थायराइड ग्रंथि को ठीक से काम करने में मददगार है.
  • इसमें मैग्नशियम, जिंक, आयरन और पोटेशियम होता है, जो थायराइड ग्रंथि में हार्मोंस की मात्रा को कम होने से रोकता है.

थायरॉइड का इलाज

थायरॉइड ठीक से काम कर रहा है या नहीं, ये पता लगाने के लिए खून में TSH और थायरॉइड हार्मोन की जांच की जाती है. थायरॉइड को एक्युप्रेशर के ज़रिए भी ठीक किया जा सकता है. एक्युप्रेशर में पैराथायरॉइड और थायरॉइड के जो बिंदू होते हैं वे पैरों और हाथों के अंगूठे के नीचे और थोड़े उठे हुए भाग में मौजूद रहते हैं. इन बिंदुओं (प्वॉइंट्स) को बांई से दांई ओर प्रेशर देना यानी दबाना चाहिए. साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं.

हाइपो थायरॉइड का पता टी3, टी4 और टीएसएच हॉर्मोन की जांच से चलता है. ऐसे मरीज कुछ दिनों तक दवा लेने के बाद पूरी तरह ठीक हो जाते हैं. कई बार लंबे वक्त तक भी दवा लेनी पड़ती है और जीवनभर भी.

थायरॉइड दूर करने में योग भी है  मददगार

थायरॉइड में जितना आराम दवा से मिलता है, उतना ही आराम प्राणायम से भी होता है. इसलिए कोशिश करें कि रोज आधे घंटे योग करें. इसके लिए कुछ योगासन बताए गए हैं. जिसमें धनुरासन, मत्‍स्‍यासन और हलासन और प्राणायाम शामिल हैं.

थायरॉइड मरीजों का डेली रुटीन

  • सुबह जल्‍दी उठें और सुबह की दवा खाने के दस मिनट बाद 2 गिलास गुनगुना पानी पिएं.
  • थायरॉइड के रोगी को अपनी दिनचर्या में योग या किसी भी प्रकार के व्‍यायाम को जरूर शामिल करना चाहिए. आप सुबह-सुबह दौड़ लगाने से लेकर योग करने और
  • जिम जाने तक कोई भी व्‍यायाम कर सकते हैं.
  • दवा खाने के बाद एक घंटे तक चाय-कॉफी, नाश्‍ता कुछ भी नहीं खाएं.
  • सुबह नाश्‍ते के साथ लौकी का जूस पिएं. या फिर घर में ही थोड़े से गेहूं उगाएं. रोज सुबह उठकर गेहूं के ज्वारों का जूस भी लाभदायक रहता है. इसके अलावा बाज़ार से अच्छे किस्म का एलोवेरा जूस लाकर पी सकते हैं, जिसमें फाइबर ज्यादा हो.
  • अखरोट और बादाम में सेलेनियम नाम का एक तत्‍व मिलता है, जो थॉयराइड के इलाज में फायदेमंद है. अखरोट और बादाम खाने से थायरॉइड के कारण गले में होने वाली सूजन कम हो जाती है. यह हाइपोथाइराइड में ज्यादा फायदेमंद होता है. इसलिए रात में अखरोट और बादाम को भिगो लें और सुबह नाश्‍ते में खूब चबा-चबाकर इसे खाएं.
  • रोज दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर गर्म करें. इससे थायरॉइड को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी. अगर दूध में हल्दी मिलाकर पीना पसंद नहीं है तो आप हल्दी को भूनकर, पानी में गर्म करके या किसी और तरीके से उसका सेवन कर सकते हैं.
  • भोजन समय पर करें. बिलकुल भूखे न रहें. थायरॉइड के रोगी को यह सलाह दी जाती है कि वह समय पर भोजन कर ले. भूखे पेट रहने पर थायरॉइड ग्रंथि पर नकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है.
  • थायरॉइड हॉर्मोन को नियंत्रित करने में काली मिर्च मददगार है.
  • अपने भोजन में वसा और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बिलकुल कम कर दें और विटामिन ए की मात्रा बढ़ा दें. खाने-पीने में हरी सब्जियां और मिनरल्स वाली चीज़ें ज्यादा लें. गाजर, अंडे और पीले रंग की सब्जियां खाएं, जिनमें विटामिन ए ज्यादा होता है.
  • प्रोबायोटिक पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करें. दही और सेब का सिरका जैसी चीज़ें खाएं, जो शरीर में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में करते हैं.
  • अपने शरीर में आयोडीन का लेवल चेक करते रहें क्‍योंकि मेटाबॉलिज्म के सही तरीके से काम करने के लिए आयोडीन बहुत जरूरी होता है. शरीर में आयोडीन की कमी न होने दें. समय-समय पर डॉक्टर से भी चेकअप करवाएं.

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