शादी के तुरंत बाद वैवाहिक जोड़ों पर बच्चे के लिए दबाव बनाया जाने लगता है. हालांकि, विवाह के तुरंत बाद बच्चे की योजना बनाना या कुछ समय इंतजार करना, यह निर्णय दंपति की शारीरिक, भावनात्मक और आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है.
सामान्यतः स्वस्थ दंपतियों के लिए विवाह के 1 वर्ष बाद प्रयास शुरू करना उचित माना जाता है, लेकिन उम्र के अनुसार यह बदल सकता है. सामाजिक दबाव और मिथक इस निर्णय को प्रभावित करते हैं, इसलिए जरूरी है कि कपल उचित सलाह के लिए डॉक्टर से परामर्श करें और एक-दूसरे के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए निर्णय लें.
गर्भधारण करने की आदर्श समयावधि
आमतौर पर 20 से 35 वर्ष की आयु की महिलाओं के अंडे की गुणवत्ता उच्च होती है. विवाह अगर 20 से 30 साल की आयु में हुआ है तो विवाह के बाद तुरंत गर्भधारण संभव है. इसलिए 6-12 माह इंतजार के बाद कपल बच्चे के लिए प्रयास शुरू कर सकते हैं. 35 वर्ष से अधिक उम्र के बाद सामान्यतः महिलाओं की प्रजनन क्षमता घटने लगती है. अध्ययनों से पता चलता है कि विवाह से पहली गर्भावस्था का अंतराल 12-24 माह आदर्श है, जो मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी सिद्ध होता है.
बांझपन के लक्षण कब प्रकट होते हैं
बांझपन (इनफर्टिलिटी) के संकेत नियमित असुरक्षित संभोग के 12 माह बाद दिखते हैं, जब गर्भधारण नहीं होता. यदि महिलाओं में गर्भधारण को लेकर समस्या है तो उनमें अनियमित मासिक धर्म, हार्मोनल असंतुलन या PCOD जैसे लक्षण पहले ही महसूस हो सकते हैं. वहीं पुरुषों में यदि कोई समस्या है तो यह कम शुक्राणु संख्या या इरेक्टाइल डिसफंक्शन के चिह्न हो सकते हैं. 35 वर्ष से अधिक महिलाओं में यदि 6 महीने तक प्रयास के बाद भी गर्भधारण नहीं हुआ है तो डॉक्टर से संपर्क करें. प्रजनन विशेषज्ञों के अनुसार, 85% दंपति 1 वर्ष में गर्भधारण में सफल हो जाते हैं, यदि नहीं हुए तो चिकत्सकीय जांच जरूरी है.
सामान्य सामाजिक दबाव
भारतीय समाज में “विवाह के 1 वर्ष में बच्चा होना चाहिए” का दबाव आम है, जो परिवार के सम्मान से जुड़ा माना जाता है. शादी के बाद रिश्तेदार अक्सर बच्चे के बारे में पूछने लगते हैं, जिससे कपल पर प्रेशर बढ़ता है. यह दबाव विशेष रूप से महिलाओं पर अधिक होता है. वास्तव में, गर्भधारण में जल्दबाजी से भावनात्मक तैयारियां प्रभावित होती हैं.
गर्भधारण के बारे में प्रचलित मिथक
- मिथक 1: विवाह के पहले वर्ष में बच्चा न हुआ तो बांझपन है. वास्तविकता: 15-20% स्वस्थ दंपति को गर्भधारण में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है.
- मिथक 2: पुरुषों को बांझपन नहीं होता. वास्तविकता: 40% मामलों में पुरुष भी बांझपन के लिए जिम्मेदार होते हैं.
- मिथक 3: आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां चमत्कार करती हैं. वास्तविकता: चिकित्सकीय जांच प्राथमिक है; चिकित्सा में देरी जोखिम बढ़ाती है.
- मिथक 4: तनाव से गर्भधारण असंभव. वास्तविकता: तनाव प्रभावित करता है लेकिन प्रबंध्य है.
गर्भधारण का निर्णय लेने से पूर्व कपल्स को क्या तैयारियां करनी चाहिए:
- स्वास्थ्य जांच: विवाह से पहले थायरॉइड, डायबिटीज, विटामिन डी की जांच कराएं और फोलिक एसिड सप्लीमेंट लेना शुरू करें.
- जीवनशैली: गर्भधारण से पहले धूम्रपान, शराब का त्याग कर देना चाहिए. संतुलित आहार और व्यायाम अपनाएं. BMI (Body Mass Index) 18.5-24.9 रखें.
- चरणबद्ध प्रयास: ओवुलेशन किट्स का उपयोग करें. गर्भधारण के लिए 3 माह नियमित संभोग (मासिक चक्र के 10-18वें दिन) को प्रयास के लिए उचित माना जाता है.
- विशेषज्ञ सलाह: असफलता पर फर्टिलिटी क्लिनिक जाएं. वर्तमान में IVF जैसे विकल्प उपलब्ध हैं, जिससे बच्चे को जन्म दिया जा सकता है.
बच्चे करने का निर्णय कपल का व्यक्तिगत होता है. बच्चे के लिए तभी प्रयास करें जब आप उसके लिए मानसिक और आर्थिक रूप से तैयार हों. किसी सामाजिक दबाव में आकर कोई निर्णय न लें. गर्भधारण में यदि कोई समस्या आ रही है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें. समय पर जांच से 90% सफलता मिलती है. अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें क्योंकि स्वस्थ माता-पिता ही स्वस्थ संतान को जन्म देते हैं.