Live
Search
Home > हेल्थ > छोटे बच्चे तो शराब पीते नहीं… फिर उनको क्यों शिकार बना रही यह बीमारी, एक्सपर्ट ने बताए मुख्य कारण और बचाव

छोटे बच्चे तो शराब पीते नहीं… फिर उनको क्यों शिकार बना रही यह बीमारी, एक्सपर्ट ने बताए मुख्य कारण और बचाव

Fatty Liver Problems In Children: सामान्यतौर पर फैटी लिवर को शराबियों से जोड़कर देखा जाता है. जो लोग नहीं पीते हैं, इनमें यह समस्या ‘नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज’ (NAFLD) के नाम से जानी जाती है. हैरानी की बात यह है कि आजकल इसके निशाने पर बच्चे भी हैं. बता दें कि, बच्चों में बढ़ रही इस बीमारी के पीछे कहीं न कहीं पैरेंट्स भी जिम्मेदार हैं. तो आइए जानते हैं कि आखिर बच्चों में यह बीमारी क्यों?

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: January 18, 2026 16:20:22 IST

Mobile Ads 1x1

Fatty Liver Problems In Children: आजकल की अनहेल्दी जीवनशैली तमाम तमाम गंभीर बीमारियों को जन्म दे रही है. फैटी लिवर ऐसी ही बीमारियों में से एक है. सामान्यतौर पर फैटी लिवर को शराबियों से जोड़कर देखा जाता है. जो लोग नहीं पीते हैं, इनमें यह समस्या ‘नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज’ (NAFLD) के नाम से जानी जाती है. हैरानी की बात यह है कि आजकल इसके निशाने पर बच्चे भी हैं. बता दें कि, बच्चों में बढ़ रही इस बीमारी के पीछे कहीं न कहीं पैरेंट्स भी जिम्मेदार हैं. क्योंकि, बच्चे बिना किसी रोक-टोक के जंक फूड धडल्ले से खा रहे हैं. एक्सपर्ट तो यहां तक कहते हैं कि, असल में इस बीमारी की शुरुआत मां के प्रेग्नेंसी पीरियड से ही हो जाती है. इस दौरान मां का खानपान शिशु की सेहत पर असर डालता है. अब सवाल है कि आखिर बच्चों में क्यों बढ़ रही फैटी लिवर की समस्या? बच्चों की कैसी रखें डाइट? इस बारे में India News को बता रही हैं अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल लखनऊ की डाइटिशिन प्रीती पांडे-

नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज

एक्सपर्ट के मुताबिक, वैसे देखा जाए तो फैटी लिवर को शराबियों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन जो लोग नहीं भी पीते हैं, इनमें यह समस्या ‘नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज’ (NAFLD) के नाम से जानी जाती है. बच्चों में जंक फूड, अधिक मीठे के सेवन के साथ-साथ पैक्ड फूड वाले प्रोडक्ट्स अधिक खाने से भी लिवर में फैट बढ़ सकता है, क्योंकि इसमें एडेड शुगर होता है. दरअसल, चीनी एक ऐसा कारण है, जो लिवर के अंदर फैट में चेंज हो जाता है. ओवरवेट बच्चे या बड़ों में ये फैट इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसे प्री एग्जिस्टिंग कंडीशन की वजह से मेटाबोलाइज्ड नहीं हो पाता है.

बच्चों में क्यों बढ़ी फैटी लिवर की बीमारी?

वर्तमान में देश अंदर 40 प्रतिशत बच्चे फैटी लिवर के शिकार हैं. इसका सबसे बड़ा कारण उनका गलत खानपान, एक्सरसाइज में कमी, जंक फूड का सेवन, कोल्ड ड्रिंक्स और नमक का अधिक सेवन है. इसके अलावा 1 साल तक के बच्चों को नमक और दो साल तक के बच्चों को चीनी न के बराबर खिलाएं. किसी भी पैरेंट्स को फैटी लिवर का तब तक पता नहीं चलता है, जब तक बच्चा कोई शिकायत लेकर नहीं आता है. क्योंकि फैटी लिवर की शुरुआत में इसके लक्षण दिखते नहीं हैं.

बीमारी से बचाने के लिए बच्चों की डाइट कैसी रखें?

बच्चों के खानपान में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, प्रोटीन रिच डाइट और उचित मात्रा में पानी पिलाएं. तली-भुनी चीजों, फास्ट फूड, चीनी वाले ड्रिंक्स और जंक फूड से बचें. बच्चों को रोजाना कम से कम 1 घंटे की फिजिकल एक्टिविटी करने को कहें. इसलिए वे खेलना, दौड़ना, साइकिल चलाना आदि कर सकते हैं. ज्यादा समय तक स्क्रीन के सामने बैठने से बचाएं. एक और जरूरी बात कि, बच्चों की रेगुलर मेडिकल जांच कराएं, जिसमें लिवर की जांच भी शामिल होनी चाहिए. अगर कोई समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें.

MORE NEWS

Home > हेल्थ > छोटे बच्चे तो शराब पीते नहीं… फिर उनको क्यों शिकार बना रही यह बीमारी, एक्सपर्ट ने बताए मुख्य कारण और बचाव

छोटे बच्चे तो शराब पीते नहीं… फिर उनको क्यों शिकार बना रही यह बीमारी, एक्सपर्ट ने बताए मुख्य कारण और बचाव

Fatty Liver Problems In Children: सामान्यतौर पर फैटी लिवर को शराबियों से जोड़कर देखा जाता है. जो लोग नहीं पीते हैं, इनमें यह समस्या ‘नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज’ (NAFLD) के नाम से जानी जाती है. हैरानी की बात यह है कि आजकल इसके निशाने पर बच्चे भी हैं. बता दें कि, बच्चों में बढ़ रही इस बीमारी के पीछे कहीं न कहीं पैरेंट्स भी जिम्मेदार हैं. तो आइए जानते हैं कि आखिर बच्चों में यह बीमारी क्यों?

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: January 18, 2026 16:20:22 IST

Mobile Ads 1x1

Fatty Liver Problems In Children: आजकल की अनहेल्दी जीवनशैली तमाम तमाम गंभीर बीमारियों को जन्म दे रही है. फैटी लिवर ऐसी ही बीमारियों में से एक है. सामान्यतौर पर फैटी लिवर को शराबियों से जोड़कर देखा जाता है. जो लोग नहीं पीते हैं, इनमें यह समस्या ‘नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज’ (NAFLD) के नाम से जानी जाती है. हैरानी की बात यह है कि आजकल इसके निशाने पर बच्चे भी हैं. बता दें कि, बच्चों में बढ़ रही इस बीमारी के पीछे कहीं न कहीं पैरेंट्स भी जिम्मेदार हैं. क्योंकि, बच्चे बिना किसी रोक-टोक के जंक फूड धडल्ले से खा रहे हैं. एक्सपर्ट तो यहां तक कहते हैं कि, असल में इस बीमारी की शुरुआत मां के प्रेग्नेंसी पीरियड से ही हो जाती है. इस दौरान मां का खानपान शिशु की सेहत पर असर डालता है. अब सवाल है कि आखिर बच्चों में क्यों बढ़ रही फैटी लिवर की समस्या? बच्चों की कैसी रखें डाइट? इस बारे में India News को बता रही हैं अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल लखनऊ की डाइटिशिन प्रीती पांडे-

नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज

एक्सपर्ट के मुताबिक, वैसे देखा जाए तो फैटी लिवर को शराबियों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन जो लोग नहीं भी पीते हैं, इनमें यह समस्या ‘नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज’ (NAFLD) के नाम से जानी जाती है. बच्चों में जंक फूड, अधिक मीठे के सेवन के साथ-साथ पैक्ड फूड वाले प्रोडक्ट्स अधिक खाने से भी लिवर में फैट बढ़ सकता है, क्योंकि इसमें एडेड शुगर होता है. दरअसल, चीनी एक ऐसा कारण है, जो लिवर के अंदर फैट में चेंज हो जाता है. ओवरवेट बच्चे या बड़ों में ये फैट इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसे प्री एग्जिस्टिंग कंडीशन की वजह से मेटाबोलाइज्ड नहीं हो पाता है.

बच्चों में क्यों बढ़ी फैटी लिवर की बीमारी?

वर्तमान में देश अंदर 40 प्रतिशत बच्चे फैटी लिवर के शिकार हैं. इसका सबसे बड़ा कारण उनका गलत खानपान, एक्सरसाइज में कमी, जंक फूड का सेवन, कोल्ड ड्रिंक्स और नमक का अधिक सेवन है. इसके अलावा 1 साल तक के बच्चों को नमक और दो साल तक के बच्चों को चीनी न के बराबर खिलाएं. किसी भी पैरेंट्स को फैटी लिवर का तब तक पता नहीं चलता है, जब तक बच्चा कोई शिकायत लेकर नहीं आता है. क्योंकि फैटी लिवर की शुरुआत में इसके लक्षण दिखते नहीं हैं.

बीमारी से बचाने के लिए बच्चों की डाइट कैसी रखें?

बच्चों के खानपान में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, प्रोटीन रिच डाइट और उचित मात्रा में पानी पिलाएं. तली-भुनी चीजों, फास्ट फूड, चीनी वाले ड्रिंक्स और जंक फूड से बचें. बच्चों को रोजाना कम से कम 1 घंटे की फिजिकल एक्टिविटी करने को कहें. इसलिए वे खेलना, दौड़ना, साइकिल चलाना आदि कर सकते हैं. ज्यादा समय तक स्क्रीन के सामने बैठने से बचाएं. एक और जरूरी बात कि, बच्चों की रेगुलर मेडिकल जांच कराएं, जिसमें लिवर की जांच भी शामिल होनी चाहिए. अगर कोई समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें.

MORE NEWS