Live TV
Search
Home > लाइफस्टाइल > Food Adulteration: मार्केट में मिलने वाले फल-सब्जी में केमिकल तो नहीं? ऐसे पहचानें असली और मिलावटी का फर्क!

Food Adulteration: मार्केट में मिलने वाले फल-सब्जी में केमिकल तो नहीं? ऐसे पहचानें असली और मिलावटी का फर्क!

Food Adulteration: बाजार में मिलने वाले चमकदार और परफेक्ट शेप के फल और सब्जियां भी आपके सेहत बिगाड़ सकते हैं. जी हां, मुनाफाखोरी के चक्कर में कुछ विक्रेता फल और सब्जियों को जल्दी पकाने और उनके रंग-रूप को निखारने के लिए केमिकल इंजेक्शन का धडल्ले से इस्तेमाल करते हैं, लेकिन सोचने वाली बात ये है कि असली-नकली का फर्क कैसे करें?

Written By: Kajal Jain
Last Updated: 2026-04-11 13:56:40

Mobile Ads 1x1

Food Adulteration: गर्मी के सीजन में हाइड्रेटिड रहने के लिए लोग फल और सब्जियों का ज्यादा सेवन करते हैं. डॉक्टर भी डी-हाइड्रेशन, लू और धूप के साइड इफेक्ट से बचने के लिए फल और सलाद खाने की सलाह देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि विटामिन और मिनरल से भरपूर से फल और सब्जियां चुपके से आपकी सेहत पर हमला रह रहे हैं.

जी हां, गर्मी के सीजन में फल और सब्जियों की डिमांड बढ़ जाती है, जिसे पूरा करने के लिए उनको गैस और केमिकल्स के जरिए जल्दी पकाया जाता है. कई जगह फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाईड का इस्तेमाल किया जाता है. अब यदि बिना जाने-समझे ऐसे फलों और सब्जियों को खाएंगे तो शरीर में खतरनाक बीमारियां पनप सकती हैं.

अब सोचने की बात ये है कि असली और मिलावटी फलों की पहचान कैसे होगी? हम बताएंगे-

फलों की रंगत देखें

जब भी आप फल खरीदने जाएं तो फलों के रंग और चमक पर ध्यान दें. प्राकृतिक रूप से पके फल कहीं से गहरे तो कहीं हल्के रंग के होते हैं. फलों पर छोटे-मोटे दाग-धब्बे होना भी नॉर्मल बात है. 

  • अब यदि केला, पपीता, सेब जैसे फल ज्यादा चमकदार और बेदाग दिख रहे हैं तो उसे समझ जाए उसे कैल्शियम कार्बाइड से पकाकर वैक्स कोट किया गया है.
  • फलों की डंठल यानी स्टेम को भी चेक करें कि क्या उसका रंग ज्यादा डार्क है? बता दें कि जब फलों केमिकल से बकाया जाता है तो ये भई कुछ पीले-हरे रंग की नजर आते हैं.

फलों का स्वाद चेक करें

प्राकृतिक तौर पर पके फल खाने के लिए पूरी तरह सुरक्षित होते हैं. इनका स्वाद, खुशबू और पानी की मात्रा भी अच्छी होती है, जबकि गैस और इंजेक्शन से पके फलों में केमिकल का एसेंस रह जाता है. ये खाने में कच्चे, ज्यादा मीठे या बेस्वाद भी हो सकते हैं. कई बार फल बाहर से ठीक लगता है, लेकिन अंदर से खराब निकल आता है.

फल-सब्जियों को पानी में डुबोकर देखें

फलों और सब्जियों को केमिकल इंजेक्शन और कार्बाइड से पकाया गया है या नहीं, इसकी पहचान के लिए फलों को पानी में डुबोकर जरूर रखना चाहिए. यदि फल पानी के ऊपर तैरने लगे तो समझ जाएं. उसे पकाने में गैस और केमिकल्स का इस्तेमाल हुआ है. ऐसी स्थिति में फल के अंदर का पोषण कम रह जाता है और वे खोखले रह जाते हैं. 

इन बातों का रखें ध्यान

बाजार में मिलने वाली लौकी, तरबूज और कद्दू भी काफी बार इंजेक्शन लगाकर आकार में बढाए जाते हैं. ये फल-सब्जियां वजन में भारी दिखते हैं, लेकिन अंदर से बेरंग और स्वाद में एकदम फीके लगते हैं. दरअसल इनमें ऑक्सीटोसिन जैसे ग्रोथ हार्मोन के इंजेक्शन लगाए जाने की संभावना होती है.

खाने से पहले बरतें ये सावधानी

यदि आप फल और सब्जियों को जांचे बिना घर ले आए हैं तो इन्हें खाने या पकाने से पहले सावधानी अवश्य बरतें-

  • फल खाने से पहले 15-20 मिनट के लिए पानी में भिगोकर रख दें.
  • पानी में थोड़ा सिरका या बेकिंग सोडा मिलाएं. ये केमिकल कोटिंग या कीटनाशक के असर को कम कर देता है.
  • हमेशा सीजनल फल और सब्जियों को डाइट में शामिल करें, क्योंकि बेमौसमी सब्जियों में मिलावट की संभावना अधिक रहती है.

MORE NEWS

Home > लाइफस्टाइल > Food Adulteration: मार्केट में मिलने वाले फल-सब्जी में केमिकल तो नहीं? ऐसे पहचानें असली और मिलावटी का फर्क!

Written By: Kajal Jain
Last Updated: 2026-04-11 13:56:40

Mobile Ads 1x1

Food Adulteration: गर्मी के सीजन में हाइड्रेटिड रहने के लिए लोग फल और सब्जियों का ज्यादा सेवन करते हैं. डॉक्टर भी डी-हाइड्रेशन, लू और धूप के साइड इफेक्ट से बचने के लिए फल और सलाद खाने की सलाह देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि विटामिन और मिनरल से भरपूर से फल और सब्जियां चुपके से आपकी सेहत पर हमला रह रहे हैं.

जी हां, गर्मी के सीजन में फल और सब्जियों की डिमांड बढ़ जाती है, जिसे पूरा करने के लिए उनको गैस और केमिकल्स के जरिए जल्दी पकाया जाता है. कई जगह फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाईड का इस्तेमाल किया जाता है. अब यदि बिना जाने-समझे ऐसे फलों और सब्जियों को खाएंगे तो शरीर में खतरनाक बीमारियां पनप सकती हैं.

अब सोचने की बात ये है कि असली और मिलावटी फलों की पहचान कैसे होगी? हम बताएंगे-

फलों की रंगत देखें

जब भी आप फल खरीदने जाएं तो फलों के रंग और चमक पर ध्यान दें. प्राकृतिक रूप से पके फल कहीं से गहरे तो कहीं हल्के रंग के होते हैं. फलों पर छोटे-मोटे दाग-धब्बे होना भी नॉर्मल बात है. 

  • अब यदि केला, पपीता, सेब जैसे फल ज्यादा चमकदार और बेदाग दिख रहे हैं तो उसे समझ जाए उसे कैल्शियम कार्बाइड से पकाकर वैक्स कोट किया गया है.
  • फलों की डंठल यानी स्टेम को भी चेक करें कि क्या उसका रंग ज्यादा डार्क है? बता दें कि जब फलों केमिकल से बकाया जाता है तो ये भई कुछ पीले-हरे रंग की नजर आते हैं.

फलों का स्वाद चेक करें

प्राकृतिक तौर पर पके फल खाने के लिए पूरी तरह सुरक्षित होते हैं. इनका स्वाद, खुशबू और पानी की मात्रा भी अच्छी होती है, जबकि गैस और इंजेक्शन से पके फलों में केमिकल का एसेंस रह जाता है. ये खाने में कच्चे, ज्यादा मीठे या बेस्वाद भी हो सकते हैं. कई बार फल बाहर से ठीक लगता है, लेकिन अंदर से खराब निकल आता है.

फल-सब्जियों को पानी में डुबोकर देखें

फलों और सब्जियों को केमिकल इंजेक्शन और कार्बाइड से पकाया गया है या नहीं, इसकी पहचान के लिए फलों को पानी में डुबोकर जरूर रखना चाहिए. यदि फल पानी के ऊपर तैरने लगे तो समझ जाएं. उसे पकाने में गैस और केमिकल्स का इस्तेमाल हुआ है. ऐसी स्थिति में फल के अंदर का पोषण कम रह जाता है और वे खोखले रह जाते हैं. 

इन बातों का रखें ध्यान

बाजार में मिलने वाली लौकी, तरबूज और कद्दू भी काफी बार इंजेक्शन लगाकर आकार में बढाए जाते हैं. ये फल-सब्जियां वजन में भारी दिखते हैं, लेकिन अंदर से बेरंग और स्वाद में एकदम फीके लगते हैं. दरअसल इनमें ऑक्सीटोसिन जैसे ग्रोथ हार्मोन के इंजेक्शन लगाए जाने की संभावना होती है.

खाने से पहले बरतें ये सावधानी

यदि आप फल और सब्जियों को जांचे बिना घर ले आए हैं तो इन्हें खाने या पकाने से पहले सावधानी अवश्य बरतें-

  • फल खाने से पहले 15-20 मिनट के लिए पानी में भिगोकर रख दें.
  • पानी में थोड़ा सिरका या बेकिंग सोडा मिलाएं. ये केमिकल कोटिंग या कीटनाशक के असर को कम कर देता है.
  • हमेशा सीजनल फल और सब्जियों को डाइट में शामिल करें, क्योंकि बेमौसमी सब्जियों में मिलावट की संभावना अधिक रहती है.

MORE NEWS