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आप भी खा रहे हैं गुलाबी नमक? जानिए हैरान करने वाला सच, डॉक्टर ने खोली पोल

Himalayan Rock Salt vs Iodized Salt: नमक को लेकर फैली सबसे बड़ी गलतफहमी क्या है? लोगों का कहना है हिमालयी नमक ज्यादा हेल्दी होता है, लेकिन प्राकृतिक होने का मतलब भरपूर पोषण युक्त तो नहीं हुआ.

Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: 2026-02-13 08:55:24

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Iodized Salt vs Himalayan Rock Salt: आजकल बाजार में कई तरह के दावों के साथ हिमालयी गुलाबी नमक को ज्यादा प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक बताकर प्रचारित किया जा रहा है. दावा किया जाता है कि इसमें मौजूद सूक्ष्म खनिज शरीर को ज्यादा फायदा पहुंचाते हैं और यह सामान्य आयोडीन युक्त सफेद नमक से अच्छा होता है. लेकिन क्या ये दावे वैज्ञानिक रूप से सही हैं? न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार ने इस नमक से जुड़े फैले भ्रम के बारे में विस्तार से जानकारी दी है. आप भी देखें और अपनी गलतफहमी को दूर करें.

गुलाबी या सफेद नमक? जानिए क्या है सच्चाई

आजकल रसोई में इस्तेमाल होने वाले नमक को लेकर नए तरह के भ्रम फैले हुए हैं. एक तरफ है हिमालयी गुलाबी नमक, को प्राकृतिक और मिनरल से भरपूर बताकर सुपरफूड की तरह मार्केट में लाया जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ आयोडीन युक्त सफेद नमक, जिसे कई सालों से थायरॉइड और मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता रहा है. अब सवाल यह है कि आखिर सच्चाई क्या है, कौन सा नमक बेहतर है. कौन सा भ्रम लोगों में फैला हुआ है.

हिमालयी नमक ज्यादा हेल्दी है क्योंकि इसमें खनिज होते हैं.

हाँ, इसमें खनिज जरूर होता है, जो कि सूक्ष्म मात्रा में पाया जाता है. लेकिन इतनी कम मात्रा में कि इनसे कोई वास्तविक पोषण लाभ नहीं मिलता है. इससे पर्याप्त कैल्शियम या मैग्नीशियम प्राप्त करने के लिए आपको ज्यादा मात्रा में नमक खाना पड़ेगा.

हिमालयी नमक ज्यादा प्राकृतिक है

प्राकृतिक होने का मतलब यह नहीं है कि वह पोषण के लिहाज़ से श्रेष्ठ या बहुत बढ़िया है. आपका शरीर सोडियम को एक ही तरह से पचाता है, चाहे वह गुलाबी हो, सफेद हो या महंगा वाला नमक हो.

सेंधा नमक ब्लड प्रेशर और हार्ट हेल्थ के लिए अच्छा होता है.

इस बात का कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं है कि हिमालयी नमक ब्लड प्रेशर को कम करता है या हृदय की रक्षा करता है. सोडियम तो सोडियम ही है.

आयोडीन युक्त नमक खराब या रासायनिक होता है

आयोडीन युक्त नमक सार्वजनिक स्वास्थ्य की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है. आयोडीन घेंघा रोग, हाइपोथायरायडिज्म और सबसे महत्वपूर्ण रूप से बच्चों में मस्तिष्क क्षति और कम बुद्धि-अक्षमता को रोकता है.

आयोडीन जरूरी है.

ज्यादातर हिमालयी नमक में आयोडीन नहीं मिलाया जाता है. भारत जैसे देश में यह बात मायने रखती है.

ऐसे नमक के लिए ज्यादा पैसे क्यों लगते हैं?

ऐसे नमक के लिए ज्यादा पैसे नमक के रंग, बनावट, ब्रांडिंग और सेहत से जुड़ी बातों के लिए पैसे लगते हैं. न कि साबित स्वास्थ्य फायदों के लिए.

आयोडीन के बारे में विज्ञान क्या कहता है?

विज्ञान कहता है कि, घर पर आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करें. कम मात्रा में नमक का सेवन करें यानी एक दिन में ज्यादा से ज्यादा 5 ग्राम नमक खाएं. ज्यादा कीमत को अच्छा पोषण युक्त नमक न समझें.
 
पींक सॉल्ट देखने में प्रीमियम जरूर लग सकता है. लेकिन हमें आयोडीन की जरूरत है. आयोडीन युक्त नमक दिमाग की रक्षा करता है. मार्केटिंग की बजाय विज्ञान का चुनाव करें और अपने स्वास्थ्य की रक्षा करें.
 
डॉ. सुधीर कुमार का कहना है कि यदि किसी को स्वाद या बनावट के लिए हिमालयी नमक पसंद है, तो ठीक है, लेकिन यदि खान-पान और स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है तो नमक का सही चुनाव होना चाहिए.



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