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PCOS में पीरियड्स कितने दिन तक चलते हैं? मासिक धर्म क्यों और कैसे होते प्रभावित, डॉक्टर को कब दिखाएं

Period Problem In PCOS: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं में होने वाला एक हार्मोनल डिसऑर्डर है, जो उनके प्रजनन स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करता है. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, PCOS में होने वाले हार्मोनल बदलावों का सबसे ज्यादा असर महिलाओं के पीरियड्स पर पड़ता है. कई बार परेशानी इतनी बढ़ जाती है कि, लेने के देने पड़ सकते हैं. अब सवाल है कि आखिर, PCOS में पीरियड्स कितने दिनों तक होते हैं?

Period Problem In PCOS: आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल कई गंभीर बीमारियों की वजह बन रही है. इसमें महिलाओं से जुड़ी परेशानियां सबसे ज्यादा देखने में आती हैं. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) इन परेशानियों में से एक है. बता दें कि, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं में होने वाला एक हार्मोनल डिसऑर्डर है, जो उनके प्रजनन स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करता है. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, PCOS में होने वाले हार्मोनल बदलावों का सबसे ज्यादा असर महिलाओं के पीरियड्स पर पड़ता है. कई बार परेशानी इतनी बढ़ जाती है कि, लेने के देने पड़ सकते हैं. अब सवाल है कि आखिर, PCOS में पीरियड्स कितने दिनों तक होते हैं? क्या PCOS में भी पीरियड्स साइकिल नॉर्मल रहती है? इस बारे में India News को बता रही हैं राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. अमृता साहा-

PCOS में पीरियड्स कैसे प्रभावित होते हैं?

PCOS में पीरियड्स अनियमित होना आम बात है. इसका मुख्य कारण हार्मोनल असंतुलन होना है. डॉ. अमृता साहा कहती हैं कि, आमतौर पर हर महीने अंडाशय से एक अंडा निकलता है, जिससे पीरियड्स साइकिल रेगुलर रहती है, लेकिन PCOS में यह प्रक्रिया ठीक से नहीं होती है. NHS के अनुसार, PCOS से पीड़ित कुछ महिलाओं में या तो पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं होती हैं या वे कंसीव नहीं कर पाती हैं या फिर उन्हें दोनों समस्याएं हो सकती हैं.

PCOS में पीरियड्स कितने दिन तक चलते हैं?

डॉक्टर कहती हैं कि, PCOS में पीरियड्स का समय और पैटर्न हर महिला में अलग हो सकते हैं. कुछ महिलाओं में पीरियड्स 7 से 10 दिनों या उससे भी ज्यादा समय तक चल सकते हैं. हार्मोनल असंतुलन के कारण गर्भाशय की परत ज्यादा मोटी हो जाती है, जिससे हैवी ब्लीडिंग होने लगती है. कई मामलों में पीरियड्स बहुत कम दिनों के लिए आते हैं या महीनों तक नहीं आते हैं. अगर PCOS में ब्लीडिंग 10 दिनों से ज्यादा हो रही है या बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो तो डॉक्टर से सलाह जरूरी है.

PCOS में पीरियड साइकिल कैसे प्रभावित हो सकती है?

PCOS के कारण पीरियड्स पर होने वाला असर महिला की उम्र और अवस्था पर निर्भर करता है. अगर महिला फर्टाइल एज में है (आमतौर पर 50 से कम उम्र), तो उसके पीरियड्स अलग तरह से प्रभावित हो सकते हैं, जबकि मेनोपॉज (आमतौर पर 50 से ज्यादा उम्र) के बाद पीरियड्स पर अलग तरह से असर पड़ सकता है.

PCOS में क्या-क्या परेशानियां होती हैं?

एंड्रोजन हार्मोन में तेजी: PCOS में शरीर के अंदर एंड्रोजन हार्मोन की मात्रा ज्यादा बढ़ जाती है. इससे अंडा बनने और निकलने की प्रक्रिया काफी प्रभावित होती है. जब ओव्यूलेशन नहीं होता है, तो महिलाओं के पीरियड्स देर से या अनियमित हो सकते हैं. एक स्टडी के अनुसार, महिलाओं के शरीर में एंड्रोजन यानी मेल हार्मोन बढ़ने के कारण ओव्यूलेशन ठीक तरह से नहीं हो पाता है, जिसका असर पीरियड्स पर पड़ता है.

इंसुलिन रेजिस्टेंस: पीसीओएस का सीधा असर उनके पीरियड्स साइकिल पर पड़ता है. PCOS से पीड़ित महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस और अनियमित पीरियड्स के बीच गहरा कनेक्शन है. जैसे-जैसे महिलाओं के शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है, पीरियड से जुड़ी समस्याएं और गंभीर होती जाती हैं.”

वजन बढ़ना: PCOS में वजन बढ़ना एक आम समस्या है. एक स्टडी में पाया गया है कि जिन लड़कियों का BMI और शरीर की चर्बी ज्यादा थी, उनमें अनियमित पीरियड साइकिल और ओवरी का आकार बड़ा होने की संभावना पाई गई. यह उन लड़कियों की तुलना में था जिनका BMI और फैट कम पाया गया है.

तनाव: तनाव, नींद की कमी, जंक फूड और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी हार्मोनल असंतुलन को बढ़ाते हैं, जो अनियमित पीरियड्स का कारण बनता है. अलग-अलग तरह के मानसिक तनाव पीरियड साइकिल को प्रभावित करते हैं.

डॉक्टर को कब दिखाएं?

गायनेकोलॉजिस्ट कहती हैं कि, PCOS के लक्षण दिखने पर बिना देर किए डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए. इसलिए, अगर 3 महीने से ज्यादा समय तक पीरियड्स न आएं, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो या बार-बार स्पॉटिंग हो, अचानक वजन बढ़ने या फिर चेहरे या शरीर पर ज्यादा बाल आने लगें तो इस समस्या को बिना नजरअंदाज किए डॉक्टर से जांच करवाएं और स्थिति के बारे में पता लगाने के लिए टेस्ट करवाएं.

Lalit Kumar

9 साल से ज्यादा के लंबे करियर में ललित कुमार ने दैनिक जागरण, दैनिक भाष्कर, हिन्दुस्तान और नेटवर्क 18 जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, समाज, कला व संस्कृति के अलावा जटिल स्वास्थ्य विषयों और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं का विश्लेषण उनकी विशेषता है। खबरों का डीप एनालिसिस उनकी पहचान है। हर खबर को आसान भाषा में पाठक तक पहुंचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वर्तमान में वे देश के सबसे बड़े मीडिया संस्थानों में एक इंडिया न्यूज (डिजिटल) में लाइफस्टाइल, हेल्थ, धर्म और एस्ट्रो टीम का हिस्सा हैं।

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