Cervical Cancer Myth vs Science: भारत सरकार ने सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जंग के लिए राष्ट्रीय HPV टीकाकरण अभियान शुरू किया है. इस अभियान के तहत 14 वर्ष की बेटियों का मुफ्त में टीकाकरण होगा. इसके इतर, सोशल मीडिया पर HPV वैक्सीन को लेकर कुछ अफवाह भी है, जिनमें इसके नुकसान बताए जा रहे हैं. हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, सर्वाइकल कैंसर से बचाने में HPV वैक्सीन ही एक मात्र ऑप्शन है.
सर्वाइकल कैंसर से बचाने में HPV वैक्सीन ही एक मात्र ऑप्शन है. अफवाहों से बचें. (Canva)
Cervical Cancer Myth vs Science: भारत सरकार ने सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जंग के लिए राष्ट्रीय HPV टीकाकरण अभियान शुरू किया है. इस अभियान के तहत 14 वर्ष की बेटियों का मुफ्त में टीकाकरण होगा. बता दें कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च इस पहल के तहत हर साल 1.15 करोड़ लड़कियों को सरकारी केंद्रों पर मुफ्त टीका लगाया जाएगा. यह एक जन स्वास्थ्य पहल है, जिसका उद्देश्य सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम, स्क्रीनिंग और उपचार पर ध्यान केंद्रित करना है. इसके इतर, सोशल मीडिया पर HPV वैक्सीन को लेकर कुछ अफवाह भी है, जिनमें इसके नुकसान बताए जा रहे हैं. हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, सर्वाइकल कैंसर से बचाने में HPV वैक्सीन ही एक मात्र ऑप्शन है. महिलाओं के गर्भाशय ग्रीवा में होने वाली सर्वाइकल कैंसर बेहद जानलेवा बीमारी है. यह कैंसर महिलाओं के शरीर में इतने धीरे से पनपता है, कि कब गंभीर हो जाए कहा ही नहीं जा सकता है. इसलिए किसी भी अफवाहों से बचने में ही समझदारी है.
गर्भाशय के निचले हिस्से में विकसित होने वाला सर्वाइकल कैंसर, हाई रिश्क वाले ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमणों के माध्यम से होता है. इसे टीकाकरण के जरिए रोकने और स्क्रीनिंग से प्रारंभिक अवस्था में ही कैंसर का पता लगाया जा सकता है. संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के अनुसार, HPV वैक्सीन न लेने से हर 2 मिनट में एक महिला की मौत हो रही है. भारत में HPV वैक्सीन को लेकर लोगों में कई तरह के भ्रम हैं. इन्हीं भ्रम को दूर करने और सच्चाई जानने के लिए India News ने नोएडा की मेडिकल ऑफिसर एवं सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा पाठक से बात की.
डॉक्टर की मानें तो, HPV यानी ह्यूमन पैपिलोमावायरस एक नॉर्मल वायरस है, जो मुख्य तौर पर संपर्क के जरिए फैलता है. यह लंबे समय तक शरीर में बिना लक्षण के रह सकता है. इतना ही नहीं कुछ प्रकार के HPV संक्रमण आगे चलकर सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) का कारण बन सकते हैं. पिछले कुछ समय से महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के मामले तेजी से बढ़े हैं और इसी वजह से सरकार ने इस अभियान की शुरुआत की है.
डॉ. मीरा पाठक कहती हैं कि सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा (गर्भाशय के निचले हिस्से) में होता है. सर्वाइकल कैंसर को ग्रीवा कैंसर भी कहा जाता है. गर्भाशय के शुरुआती हिस्से को ग्रीवा कहते हैं. आम भाषा में इसे बच्चेदानी का मुंह भी कहा जाता है.
डॉक्टर कहती हैं कि, सर्वाइकल के 200 से ज्यादा स्ट्रेन होते हैं. इनमें 4 टाइप के स्ट्रेन कैंसर को कॉज करते हैं. इसलिए जरूरी है कि, हर महिला को 2 बार स्क्रीनिंग जरूर करानी चाहिए. पहली स्क्रीनिंग 35 की उम्र में तो दूसरी 45 के आसपास.
डॉ. मीरा पाठक बताती हैं कि, यह कैंसर ह्यूमन पेपिलोमावायरस के कारण होता है. यह वायरस हर इंसान में मौजूद होता है लेकिन कुछ इंसान में इस वायरस का एक प्रकार कुछ कारणों से उभर आता है.
सर्वाइकल कैंसर सर्विक्स यानी गर्भाशय ग्रीवा की सतह से शुरू होता है. यह तब होता है जब गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाएं कैंसर-पूर्व कोशिकाओं में बदलने लगती हैं. सभी मामलों के लिए एचपीवी (ह्यूमन पेपिलोमावायरस) का इंफेक्शन ही जिम्मेदार बनता है.
एचपीवी एक वायरस है जो यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है. आमतौर पर सेक्स के दौरान इस कैंसर से संबंधित वायरस महिला में प्रवेश कर जाते हैं. खासतौर पर जिन महिलाओं के एक से अधिक सेक्सुअल पार्टनर होते हैं, उनमें सर्वाइकल कैंसर होने की आशंका ज्यादा रहती है.
9 से 14 वर्ष की आयु की बच्चियों को एचपीवी वैक्सीन लगवानी चाहिए. यह टीका भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करता है. यह वैक्सीन गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) में होने वाले एचपीवी के संक्रमण से बचाती है, जो कैंसर का कारण बन सकता है.
जी बिलकुल, 15 साल के बाद भी एचपीवी वैक्सीन ली जा सकती है. लेकिन, महिलाओं के लिए 3 डोज की जरूरत होती है. जोकि 42 की उम्र तक लगवा सकती हैं.
जी हां, इस टीके को पुरुष भी लगवा सकते हैं. पुरुषों में यह वैक्सीन पेनिस कैंसर, एनल कैंसर और मुंह का कैंसर जैसी कई बीमारियों से बचाव करेगी.
सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षणों में पोस्द क्वाइडल ब्लीडिंग होना बेहद कॉमन है. इसके अलावा, फिजिकल रिलेशन बनाते समय भी ब्लीडिंग हो जाना. पेट फूल जाना, पैरों में सूजन आना तेजी से वजन घटना आदि.
विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO के मुताबिक हर साल साढ़े तीन लाख महिलाओं की मौत सर्वाइकल कैंसर के कारण हो जाती है. भारत में सर्वाइकल कैंसर की स्थिति बद से बदतर है. एक तरफ साढ़े तीन लाख महिलाओं की मौत सर्वाइकल कैंसर से होती है तो दूसरी ओर भारत में हर साल लगभग 1.2 से 1.3 लाख सर्वाइकल कैंसर के नए मामले सामने आते हैं जिनमें 70 से 75 हजार मरीजों की मौत हो जाती है.
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