International Women’s Day 2026: दुनियाभर में आज यानी 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day 2026) मनाया जा रहा है. यह दिन समाज को याद दिलाता है कि महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार, सम्मान और अवसर मिलने चाहिए. बता दें कि, इस दिन की जड़ें 20वीं सदी की शुरुआत में महिलाओं के श्रमिक आंदोलनों से जुड़ी हैं. इसलिए आज अगर महिलाओं की सेहत की न करें तो यह उनके लिए अन्याय हो सकता है. क्योंकि, आजकल महिलाएं कई गंभीर बीमारियां का शिकार हो रही हैं. इसके पीछे की वजह जो भी हो, लेकिन परेशानियां तो बढ़ ही रही हैं. हमारा लेख भी महिलाओं को उनके सेहत के प्रति सजग करने के लिए ही है. क्योंकि, स्वस्थ महिला समाज का आईना होती है.
आजकल महिलाओं में बांझपन की समस्या तेजी से बढ़ रही है. वैसे तो इसके कई कारण हैं, लेकिन देर से शादी सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आ रहा है. डॉक्टर कहती हैं कि, युवतियों में 30-35 साल के बाद शादी करने और खराब खानपान से गर्भधारण करने में दिक्कत आ रही है. ऐसे में कई महिलाओं में बांझपन का भी बढ़ा है. तमाम कोशिशों के बाद लोग आईवीएफ तकनीक का सहारा ले रहे हैं. बांझपन के अन्य कारणों में पीसीओएस (PCOS), थायराइड, तनाव, और असंतुलित जीवनशैली (फास्ट फूड, व्यायाम की कमी) शामिल हैं. हालांकि, बेहतर खान-पान, तनाव प्रबंधन, वजन नियंत्रण और समय पर जांच व विशेषज्ञ की सलाह से इसका निदान और इलाज संभव है.
देर से शादी करने पर गर्भाशय पर रहा असर?
एम्स रायबरेली की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. ज्योत्सना कहती हैं कि, एक रिसर्च की मानें तो भारत में लगभग 8% विवाहित महिलाएं इनफर्टिलिटी से प्रभावित हैं. अब उम्र सीमा बीत जाने के बाद लोग शादी कर रहे हैं. हर युवा जोड़ा करीब 30 से 35 वर्ष के बीच शादी कर रहा है. इससे महिला का गर्भाशय उतना बेहतर नहीं होता है. बता दें कि, गर्भधारण के बाद गर्भस्थ शिशु के अंगों का विकास होता है, लेकिन आंतरिक अंग कमजोर होने की वजह से बच्चों में किडनी से जुड़े केस सामने आ रहे हैं. नवजात बच्चे का उस तरह से विकास नहीं हो पा रहा है, जैसे कि एक निश्चित उम्र में शादी करने वाली महिला द्वारा जन्मे बच्चे में होना चाहिए.
प्रजनन क्षमता पर क्या पड़ रहा प्रभाव?
डॉक्टर कहती हैं कि, 30-35 की उम्र के बाद महिलाओं की फर्टिलिटी में कमी आनी शुरू हो जाती है. क्योंकि, इस उम्र में अंडों की कमी और गुणवत्ता में तेजी से गिरावट होती है. यही नहीं, 35 की उम्र के बाद गर्भपात (miscarriage), क्रोमोसोमल असामान्यताएं (जैसे डाउन सिंड्रोम) और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की आशंका बढ़ सकती है. डॉक्टर कहती हैं कि, अगर 37 वर्ष तक इसपर ध्यान न दिया गया तो यह परेशानी तेजी से बढ़ सकती है.
हालिया रिपोर्ट में चौंकाने वाली खुलासा
दिल्ली की एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक, 35 की उम्र में मां बनने का प्रतिशत 2010 में 2.25% था, जोकि साल 2023 में बढ़कर 8.39% हो गया. वहीं, 30 से 34 साल के बीच 2010 में 9.46% महिलाएं मां बनी थीं. जोकि 2023 में यह संख्या बढ़कर 24.71% हो गई. इसके अलावा, 20 से 29 साल की उम्र के बीच 86.67% मां बनी थीं, जोकि 2023 में आधे से भी कम रह गईं.
प्रेग्नेंसी के लिहाज से शादी करने की परफेक्ट उम्र?
डॉ. ज्योत्सना कहती हैं कि, शादी करने की सही उम्र 22 से 25 साल की है. क्योंकि, इसमें लड़कियों का रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स पूरी तरह से विकसित होता है. यही वह उम्र है जिसमें लड़कियों को सेहत से जुड़ी कोई भी परेशानियां या बीमारियां नहीं होती हैं. ऐसे में 22 से 25 साल की उम्र के बीच अगर लड़के और लड़कियां शादी करते हैं तो मां बनने में कोई दिक्कत नहीं होती है और बच्चा भी पूरी तरह से स्वस्थ होता है. अबॉर्शन की कोई कंडीशन नहीं बनती है और बच्चा बेहद सेहतमंद होता है. मां और बच्चा दोनों प्रसव के बाद स्वस्थ रहते हैं.
गर्भधारण करने की सबसे सही उम्र क्या है?
डॉक्टर बताती हैं कि, 35 वर्ष की आयु के बाद, मां बनने का सपना जोखिम भरा होता है. दरअसल जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती है, अंडों की संख्या में कमी आने लगती है. कुछ अंडे होते भी हैं वे आसानी से पुरुष के शुक्राणु द्वारा निषेचित नहीं होते हैं. वहीं, यदि कोई महिला कंसीव करती भी है तो उसमें सी-सेक्शन डिलीवरी का जोखिम बढ़ता है. ऐसे में कंसीव करने के लिए वैसे तो 20 से 30 वर्ष की उम्र परफेक्ट है.