Khushi Mukherjee Fitness: अपने हॉट लुक्स की वजह से सोशल मीडिया पर तहलका मचाने वाली खुशी मुखर्जी किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं. एक-दो बार नहीं, कई बार खुशी मुखर्जी अपने कपड़ों की वजह से लोगों को सदमा दे चुकी हैं. वे सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल होने लगी हैं. हालांकि खुशी मुखर्जी को इन सब बातों से फर्क नहीं पड़ता है. खुशी मुखर्जी अपने हॉट लुक्स में अपनी फिगर फ्लॉन्ट करने का एक भी मौका हाथ से नहीं जाने देती हैं. ऐसे में हर कोई उनकी खूबसूरती का राज जानना चाहता है. हाल ही में खुशी मुखर्जी ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वे कई अभ्यासों का जबरदस्त कॉम्बो पैक ‘सूर्य नमस्कर’ करती दिखाई दे रही हैं. यह योग उनकी काया को कमसिन बनाने में मददगार है. अब सवाल है कि आखिर, खुशी मुखर्जी के फिटनेस का राज क्या है? वे सूर्य नमस्कार क्यों करती हैं और इसके फायदे क्या हैं? सूर्य नमस्कार करने का तरीका क्या है? आइए जानते हैं इस बारे में-
खुशी मुखर्जी की खूबसूरती का राज
पिछले दिनों एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से बातचीत में उन्होंने खुलासा किया था कि, ‘मुझे डांसिंग, योगा और मेडिटेशन करना बहुत पसंद है. ये तीनों काम करने के लिए मैं रोज कुछ समय जरूर निकालती हूं. इसके साथ ही, ‘मैं हॉट फिगर पाने के लिए भूखा नहीं रह सकती हूं. और न ही मैं कोई स्ट्रिक्ट डाइट फॉलो करती हूं. मुझे लगता है कि आपको एक हद में रहकर सब कुछ खाना चाहिए. नियमित एक्सरसाइज और घर का बना खाना खाने से आप खुद को फिट रख सकते हैं. इसके अलावा, एक बार अगर आपने खुद को प्यार करना शुरू कर दिया तो आप अपने आप ही सुंदर होते चले जाते हैं.
सूर्य नमस्कार कितने अभ्यासों का कॉम्बिनेशन
दिल्ली के योगा ट्रेनर शशांक गुप्ता बताते हैं कि, सूर्य नमस्कार 12 शक्तिशाली योगासनों का कॉम्बिनेशन है. इस योग में सांसों की लय के साथ शरीर की 12 मुद्राएं दोहराई जाती हैं. हर मुद्रा एक खास योगासन है और उसको करते वक्त सांस के साथ उसका तालमेल बिठाना होता है. इस योगासन को नियमित और सही से करने से ढेरों लाभ होते हैं. मतलब साफ है कि सूर्य नमस्कार करने से काया में निखार आता है.
नियमित सूर्य नमस्कार करने के फायदे
नियमित रूप से सूर्य नमस्कार का अभ्यास करने से पूरे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. इससे स्किन की रंगत निखरती है.साथ ही शरीर में ऑक्सीजन का सप्लाई बढ़ने से अंदरूनी अंग अधिक सक्रिय हो जाते हैं और अधिक एनर्जी मिलती है. सूर्य नमस्कार का अभ्यास मांसपेशियों को मजबूत करता है, रीढ़ की हड्डी को लचीलापन देता है और शरीर के दूसरे कई फंक्शंस को सुधारता है. गट हेल्थ को ठीक करने और मोटापे को काबू करने के अलावा यह डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों से बचाने में भी मददगार होता है.
सूर्य नमस्कार के योग और अभ्यास करने का तरीका
प्रणाम आसन: इस आसन को करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों पंजे जोड़कर अपने आसन मैट के किनारे पर खड़े हो जाएं. फिर दोनों हाथों को कंधे के समान्तर उठाएं और पूरा वजन दोनों पैरों पर समान रूप से डालें. दोनों हथेलियों के पृष्ठभाग एक दूसरे से चिपकाए रहें और नमस्कार की मुद्रा में खड़े हो जाएं.
हस्ततुन्नासन: इस आसन को करने के लिए गहरी सांस भरें और दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं. अब हाथ और कमर को झुकाते हुए दोनों भुजाओं और गर्दन को भी पीछे की ओर झुकाएं.
हस्तपाद आसन: इस आसन में बाहर की तरफ सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की तरफ नीचे की ओर झुकें. अपने दोनों हाथों को कानों के पास से घुमाते हुए ज़मीन को छूएं.
अश्व संचालन आसन: इस आसन में अपनी हथेलियों को ज़मीन पर रखें, सांस लेते हुए दाएं पैर को पीछे की तरफ ले जाएं और बाएं पैर को घुटने की तरफ से मोड़ते हुए ऊपर रखें. गर्दन को ऊपर की तरफ उठाएं और कुछ देर इसी स्थिती में रहें.
दंडासन: इस आसने को करने के दौरान सांस लेते हुए बाएं पैर को पीछे ले जाएं और पूरे शरीर को सीधी रेखा में रखें और अपने हाथ ज़मीन पर सीधे रखें.
अष्टांग नमस्कार: इस आसन को करते वक्त अपने दोनों घुटने ज़मीन पर टिकाएं और सांस छोड़ें. अपने कूल्हों को पीछे ऊपर की ओर उठाएं और अपनी छाती और ठुड्डी को ज़मीन से छुआएं और कुछ देर इसी स्थिति में रहें.
भुजंग आसन: इस आसन को करते वक्त धीरे-धीरे अपनी सांस छोड़ते हुए छाती को आगे की और ले जाएं. हाथों को ज़मीन पर सीधा रखें. गर्दन पीछे की ओर झुकाएं और दोनों पंजों को सीधा खड़ा रखें.
अधोमुखश्वनासन: इस स्थिति में सांस छोड़ते हुए दोनों पैरों को धीरे-धीरे पीछे ले जाएं, दोनों हाथों को आगे की तरफ ज़मीन से लगाएं और गर्दन को झुकाएं. इस आसन में आप V की स्थिति में आ जाएंगे.
अश्वसंचालन आसन: इस आसन में अपनी हथेलियों को ज़मीन पर रखें, सांस लेते हुए दाएं पैर को पीछे की तरफ ले जाएं और बाएं पैर को घुटने की तरफ से मोड़ते हुए ऊपर रखें. गर्दन को ऊपर की तरफ उठाएं और कुछ देर इसी स्थिति में रहें.
हस्तपाद आसन: इस आसन में अपने दोनों हाथों को कानों के पास से घुमाते हुए नीचे ज़मीन की तरफ लाएं और ज़मीन को स्पर्श करें. इस आसन को करते समय ध्यान रखें की आपके घुटने बिल्कुल सीधे होने चाहिए.
हस्तउत्थान आसन: ये स्थिति दूसरी स्थिति के समान हैं. इसे करने के लिए गहरी सांस भरें और दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं. अब हाथ और कमर को झुकाते हुए दोनों भुजाओं और गर्दन को भी पीछे की ओर झुकाएं.
ताड़ासन: इस आसन को करते वक्त धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए अपने शरीर को सीधा करें और दोनों हाथों को नीचे लाएं.