Science-backed tips for longevity: लंबी उम्र तक जीने की चाहत किसे नहीं होती है. इसके लिए लोग क्या-क्या नहीं करते हैं. लेकिन, सही दिनचर्या को अनुशासन के साथ अपनाकर हेल्दी और लंबी आयु जी सकते हैं. आज हम यहां विज्ञान के हिसाब से बता रहे हैं कि कैसे कोई लंबी उम्र तक जी सकता है और सेहतमंद रह सकता है.
Science-backed tips for longevity: लंबी उम्र तक जीने की चाहत किसे नहीं होती है. आप भी कोशिश करते ही होंगे. इसके लिए लोग क्या-क्या नहीं करते हैं. दरअसल, 30-40 साल के हर इंसान को यही लगता है वह हमेशा जवान रहेंगे. लेकिन, यह दुनिया नश्वर है. यहां जो आया है वो एक दिन जाएगा ही. पर क्यों न जितने दिन यहां रहा जाए उसे खुशी-खुशी के साथ जिया जाए. इसके लिए शरीर को जवान और सेहतमंद होना जरूरी है. लंबी उम्र जीने का सीधा मतलब है कि, अच्छी नींद के साथ दिनचर्या का पालन करें. बता दें कि, उम्र का संबंध सोने और जागने के समय से भी जुड़ा है, जिसका खुलासा ब्रिटेन में हुए एक शोध से हुआ है.
रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन में 38 से 73 साल के 4 लाख 30 हजार लोगों पर रिसर्च की गई है. शोध में यह बात सामने आई है कि जो लोग देर रात तक जागते हैं और सुबह देर तक सोते रहते हैं, उनमें जल्दी सोने और जल्दी जागने वालों की तुलना में मरने की आशंका 10 प्रतिशत अधिक होती है. इसके इतर, जो लोग देर रात तक बिस्तर से दूर रहते हैं और सुबह देर तक सोते रहते हैं, वे जल्दी सोने वालों की तुलना में कम जीते हैं. लेकिन, सही दिनचर्या को अनुशासन के साथ अपनाकर हेल्दी और लंबी आयु जी सकते हैं. आज हम यहां विज्ञान के हिसाब से बता रहे हैं कि कैसे कोई लंबी उम्र तक जी सकता है और सेहतमंद रह सकता है.
शिकागो की नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता और रिपोर्ट के सह-लेखक क्रिस्टन कुनटसन का कहना है कि रात में जागने वालों में शारीरिक समस्याएं भी अधिक होती हैं. रिसर्च में शामिल करीब 27 प्रतिशत लोगों ने खुद को पूरी तरह से सुबह काम करने वाला व्यक्ति बताया, 35 प्रतिशत ने खुद को ज्यादा काम सुबह तो कुछ काम शाम में करने वाला बताया. 28 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वे शाम में ज्यादा और सुबह कम काम करते हैं, जबकि 9 प्रतिशत लोग पूरी तरह से खुद को शाम में काम करने वाला व्यक्ति मानते हैं. शोध में इन लोगों के वजन, धूम्रपान की आदत, सामाजिक-आर्थिक स्थिति को भी सूचीबद्ध किया गया.
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सेहतमंद रहने के लिए रोजना कम से कम 7 से 8 घंटे की सुकून की नींद जरूरी है. अच्छी और पूरी नींद जवान और स्वस्थ बने रहने की सबसे ज़रूरी शर्तों में से एक है. रिसर्च बताती है कि कम नींद लेने से बुढ़ापा तेजी से बढ़ता है. दरअसल, हमारी कोशिकाओं के केंद्र में डीएन होता है. उसके सिरों पर मौजूद कैप होता है जिसे टेलोमीअर्स कहते हैं. जब टेलोमीअर्स छोटे होने लगते हैं तब शरीर में सूजन बढ़ती है और कोशिकाएं बूढ़ी होने लगती हैं. वहीं, अगर नींद की आदतें सुधार ली जाएं तो यह टेलोमीअर्स जल्दी छोटे नहीं होते और इंसान की उम्र लंबी हो जाती है. इसलिए रोज सही समय पर सोएं. इसके अलावा, सबसे जरूरी बात कि, सोते समय स्क्रीन का इस्तेमाल न करें.
देर रात तक जागने वाले समूह के लोग डायबिटीज, पेट और सांस की तकलीफ, मनोवैज्ञानिक विकार और कम नींद की समस्या से भी ग्रस्त होते हैं. साथ ही ये लोग धूम्रपान, शराब, कॉफी और ड्रग्स का सेवन भी अधिक करते हैं. शोध के मुताबिक, इन लोगों में मौत का जोखिम इसलिए भी अधिक होता है, क्योंकि देर से सोकर उठने की वजह से इनकी बायोलॉजिकल क्लॉक अपने आसपास के वातावरण से मेल नहीं खाती. शोधकर्ताओं ने देर रात तक जागने वालों के लिए खास प्रकार के इलाज की बात भी कही है.
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