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कमर से पैर तक उठने वाला तेज दर्द कहीं सायटिका की चेतावनी तो नहीं? जानिए इस बीमारी के लक्षण, कारण और पूरा इलाज

Sciatic Causes Symptoms: आजकल अक्सर लोगों को कमर से पैर तक उठने वाला तेज दर्द की शिकायत रहती है, अधिकांश लोग इसे इग्नोर कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं यह सायटिका जैसी गंभीर बिमारी का लक्षण हो सकता है आइए इसके इलाज और लक्षण के बारे में जानें.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: January 28, 2026 18:14:09 IST

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Sciatic Causes Symptoms: अगर आपकी कमर से लेकर पैर तक तेज दर्द हो रहा है, टांग सुन्न लग रही है या चलने-फिरने में दिक्कत आ रही है, तो यह सिर्फ साधारण कमर दर्द नहीं हो सकता. विशेषज्ञों के अनुसार यह सायटिका (Sciatica) का संकेत हो सकता है. सायटिका तब होती है जब शरीर की सबसे बड़ी नस, सायटिक नर्व, दब जाती है और इससे कमर, कूल्हा और पैर में खिंचाव जैसा तेज दर्द महसूस होता है.

सायटिका क्या है?

सायटिका  एक प्रकार से  नस संबंधी समस्या है, जिसमें लोअर बैक से लेकर हिप, जांघ और पैर तक दर्द फैलता है. कभी-कभी यह दर्द इतना तेज होता है कि बैठना, खड़ा होना या चलना मुश्किल हो जाता है.

सायटिका के सामान्य लक्षण

  •  कमर से पैर तक तेज दर्द
  •  टांग में झुनझुनी या सुन्नपन
  •  पैर उठाने या मोड़ने में कठिनाई
  •  लंबे समय तक बैठने पर दर्द बढ़ना
  •  चलने या खड़े होने पर पैर में बिजली जैसी झटके

गंभीर लक्षण

यदि पेशाब या मल पर नियंत्रण में कमी, पैर में अत्यधिक कमजोरी या चलने-फिरने में असमर्थता हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

सायटिका क्यों होती है?

  1. स्लिप डिस्क / हर्नियेटेड डिस्क: रीढ़ की हड्डियों के बीच की डिस्क खिसककर नस पर दबाव डालती है.
  2. गलत पॉस्चर और चोट: लंबे समय तक गलत तरीके से बैठना या उठाना.
  3. स्पाइनल स्टेनोसिस: रीढ़ की हड्डी का संकरापन.
  4. मोटापा और उम्र बढ़ना: अतिरिक्त वजन और उम्र बढ़ने से डिस्क कमजोर होती है.
  5. लंबे समय तक बैठना: लैपटॉप, मोबाइल आदि के गलत इस्तेमाल से.

 सायटिका की जांच

  • MRI: नस पर दबाव और स्थिति स्पष्ट दिखाता है.
  • X-ray: हड्डियों की जांच.
  • SLR टेस्ट (Straight Leg Raise): पैर उठाते समय दर्द बढ़ना सायटिका की पुष्टि करता है.

 इलाज और रोकथाम

  • मेडिकल इलाज: दर्द कम करने के लिए पेन रिलीवर, एंटी-इन्फ्लेमेटरी और मसल रिलैक्सेंट दवाइयां.
  • फिजियोथेरेपी: स्ट्रेचिंग, मसल मजबूती, हॉट/कोल्ड थेरेपी और सही पॉस्चर सिखाकर नस पर दबाव घटाती है.
  • इंजेक्शन: जब दवा और एक्सरसाइज पर्याप्त न हों, तो नस के पास दवा दी जाती है.
  • सर्जरी:गंभीर मामलों में मिनिमली इनवेसिव सर्जरी की जाती है, खासकर जब दर्द लंबे समय तक बना रहे या पैर कमजोर हो जाए.

 सायटिका का घरेलु इलाज

  • गर्म और ठंडी सिकाई
  • हल्की मसाज
  • सही बैठने और उठने की तकनीक
  •  संतुलित वजन और हल्की स्ट्रेचिंग

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