Improve Lung Capacity Tips: आज के समय में हवा की क्वालिटी तेजी से गिर रही है. बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक प्रदूषण एक गंभीर चुनौती बन चुका है. हम जो सांस अंदर लेते हैं, उसी के साथ कई हानिकारक कण और विषैले तत्व शरीर में चले जाते हैं. इसका सबसे ज्यादा असर हमारे फेफड़ों पर पड़ता है. यही वजह है कि कम उम्र के लोगों में भी सांस से जुड़ी परेशानियां बढ़ रही हैं.तेज रफ्तार जिंदगी, सिगरेट या तंबाकू का सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी और लगातार धूल-धुएं के संपर्क में रहना फेफड़ों की स्ट्रेंथ को धीरे-धीरे कम कर सकता है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आपके फेफड़े कितनी अच्छी तरह काम कर रहे हैं.
कौन सा टेस्ट बताता है फेफड़ों की स्थिति?
फेफड़ों की स्ट्रेंथ जांचने के लिए सबसे अधिक भरोसेमंद जांच ‘स्पाइरोमेट्री’ कहलाती है. इसे आमतौर पर लंग फंक्शन टेस्ट भी कहा जाता है. इस प्रक्रिया में व्यक्ति को एक विशेष उपकरण में गहरी सांस भरकर पूरी ताकत से बाहर छोड़नी होती है. मशीन यह रिकॉर्ड करती है कि फेफड़े कितनी मात्रा में हवा ले सकते हैं और कितनी तेजी से उसे बाहर निकाल सकते हैं.यह जांच अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) जैसी सांस से जुड़ी बीमारियों की पहचान में काफी मददगार साबित होती है. यदि रिपोर्ट सामान्य सीमा से कम आती है, तो यह फेफड़ों में कमजोरी या रुकावट का संकेत हो सकता है.
किन हालात में और जांच जरूरी होती है?
विशेष परिस्थितियों में डॉक्टर पीक फ्लो मीटर या गैस एक्सचेंज से संबंधित जांच भी कराने की सलाह दे सकते हैं. लंबे समय तक धूम्रपान करने वालों में श्वसन क्षमता धीरे-धीरे कम हो सकती है. अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों के अनुसार वायु प्रदूषण भी फेफड़ों के कामकाज को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारणों में से एक है.अगर आपको बार-बार खांसी, सीने में भारीपन, थोड़ी-सी मेहनत में सांस फूलना या असामान्य थकावट महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें. समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है.
फेफड़ों को मजबूत कैसे रखें?
- विशेषज्ञों के अनुसार श्वसन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जीवनशैली में सुधार सबसे अहम कदम है.
- तंबाकू और सिगरेट से पूरी तरह दूरी बनाएं.
- रोजाना तेज चाल से चलना, दौड़ लगाना, साइकिल चलाना या तैराकी जैसी गतिविधियां अपनाएं.
- गहरी सांस लेने के अभ्यास और प्राणायाम श्वसन मांसपेशियों को सशक्त बनाते हैं.
- घर और ऑफिस में साफ वातावरण बनाए रखें, धूल और धुएं से बचें.
- आवश्यकता पड़ने पर मास्क का उपयोग करें.