Pataleshwar Mahadev Temple (Shivaratri 2026): ये सच है कि, भारत की धरती प्राचीन काल से ही 'तपोभूमि' रही है. यहां बड़े-बड़े ऋषि-मुनि हुए, जिन्होंने अपने तप, ज्ञान और सिद्धांतों के दम पर भारतीय संस्कृति के आध्यात्मिक और नैतिक ताने-बाने को संवारा. हमारे यहां कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जो खुद में कोई न कोई खासियत समेटे हुए हैं. ऐसा ही उत्तर प्रदेश का एक 200 साल पुराना शिव मंदिर है. इस मंदिर से जुड़ी रोचक परंपरा है कि, यहां महादेव को भक्त झाड़ू चढ़ाते हैं. आइए जानते हैं इससे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं-
अद्भुत है यह प्राचीन शिव मंदिर, प्रसाद नहीं झाड़ू चढ़ाते हैं भक्त.
Pataleshwar Mahadev Temple (Shivaratri 2026): ये सच है कि, भारत की धरती प्राचीन काल से ही 'तपोभूमि' रही है. यहां बड़े-बड़े ऋषि-मुनि हुए, जिन्होंने अपने तप, ज्ञान और सिद्धांतों के दम पर भारतीय संस्कृति के आध्यात्मिक और नैतिक ताने-बाने को संवारा. इसीलिए हमारे देश को 'पुण्य भूमि' और 'देव भूमि' के रूप में भी जाना जाता है. हमारे यहां कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जो खुद में कोई न कोई खासियत समेटे हुए हैं. ऐसा ही उत्तर प्रदेश का एक 200 साल पुराना शिव मंदिर है. इस मंदिर से जुड़ी रोचक परंपरा है कि, यहां महादेव को भक्त झाड़ू चढ़ाते हैं. पौराणिक मान्यता है कि, यहां शिवजी के दर्शन और पूजन मात्र से स्किन से जुड़ी बीमारियां दूर हो जाती हैं. यही वजह है कि, यहां हमेशा ही भक्तों का मेला लगता है. 15 फरवरी को महाशिवरात्रि है, ऐसे में आप भी शिवजी के दर्शन कर सकते हैं. अब सवाल है कि आखिर ये मंदिर उत्तर प्रदेश में कहा है? इस महादेव मंदिर का नाम क्या है? इससे जुड़ी कथा क्या है? आइए जानते हैं मंदिर से जुड़ी जानकारियां-
उत्तर प्रदेश जिले के मुरादाबाद जिले के बहजोई गांव में एक प्राचीन शिव मंदिर हैं, जिसे पातालेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है. जानकार बताते हैं कि यह मंदिर करीब 200 साल पुराना है. खास बात ये है कि इस मंदिर में शिवलिंग के अलावा अन्य किसी देवी-देवता की कोई प्रतिमा आदि नहीं है. इस मंदिर की परंपरा काफी खास है क्योंकि यहां भक्त महादेव को मुख्य रूप से झाड़ू चढ़ाते हैं. सुनने में ये बात थोड़ी अजीब लगे लेकिन ये सच है. सावन और महाशिवरात्रि के मौके पर तो यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है.
प्राचीन पातालेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी एक खास मान्यता ये है कि यहां झाड़ू चढ़ाने और दर्शन-पूजन करने से त्वचा के रोग दूर होते हैं. देश के कोने-कोने से भक्त यहां इसी आस से आते हैं को उनके त्वचा रोग ठीक हो जाएं और वे भी सामान्य लोगों की तरह जीवन जी सकें. यहां भक्तों का हमेशा ही जमावड़ा रहता है.
पौराणिक कथा के अनुसार, बात करीब 200 साल पुरानी है. उस समय पास के किसी गांव में एक धनवान व्यापारी रहता था. उसे त्वचा से संबंधित भयानक रोग था. एक बार जब वह अपने उपचार के लिए वैद्य के पास जा रहा था तो उसे रास्ते में प्यास लगी. पास ही में उसे एक आश्रम दिखा. जैसे ही व्यापारी आश्रम में जाने लगा उसका पैर एक झाड़ू से टकरा गया. उस झाड़ू के स्पर्श ही उस व्यापारी का रोग ठीक हो गया. व्यापारी ने इसे भगवान का चमत्कार माना और वहां एक भव्य शिव मंदिर का निर्माण करवा दिया. बाद में ये मंदिर पातालेश्वर महादेव के नाम से जाना जाने लगा.
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