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Home > हेल्थ > हस्तमैथुन से कैंसर का खतरा होगा कम! महीने में मात्र इतनी बार कर लीजिए मास्टरबेशन, रिसर्च में बड़ा दावा

हस्तमैथुन से कैंसर का खतरा होगा कम! महीने में मात्र इतनी बार कर लीजिए मास्टरबेशन, रिसर्च में बड़ा दावा

Masturbation can prevent cancer: हाल में आई एक रिसर्च ने तो लोगों को चौंका दिया. इसमें दावा किया गया है कि, हस्तमैथुन करने से प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम कम करने में मदद मिलेगा. एक गैर-लाभकारी संस्था 'एफकैंसर' के इस दावे को New York post ने प्रमुखता से जगह दी है. अब सवाल है कि, क्या सच में मास्टरबेशन करने से प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम कम हो जाएगा? प्रोस्टेट कैंसर से बचने के लिए 1 महीने में कितनी हस्तमैथुन करना चाहिए? आइए जानते हैं रिसर्च से जुड़े इस दावे को-

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: April 11, 2026 14:30:43 IST

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Masturbation can prevent cancer: अन्य गंभीर बीमारियों की तरह दुनियाभर में प्रोस्टेट कैंसर के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं. यह एक बेहद गंभीर बीमारी है. अमेरिका जैसे देश में पुरुषों में होने वाला यह दूसरा सबसे गंभीर कैंसर है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में हर आठवां मर्द इस बीमारी से पीड़ित है. हालांकि, भारत में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. बता दें कि, भारत में प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है, जिसके ज्यादातर मामले शहरी क्षेत्रों (दिल्ली, मुंबई) में तेजी से बढ़ रहे हैं. साल 2020 में देश में प्रोस्टेट कैंसर के 40,000 से अधिक नए मामले आए. यहां चिंता की बात यह है कि, 2040 तक इन मामलों के दोगुने होने का अनुमान है. इसको लेकर तमाम तरह की भ्रांतियां और दावे हैं.  ऐसे में युवा पीढ़ी को इस बारे में जागरुक करने की जरूरत है. हालांकि, इस गंभीर कैंसर से बचाव को लेकर कई बड़ी रिसर्च चल रही हैं. 

हाल में आई एक रिसर्च ने तो लोगों को चौंका दिया. इसमें दावा किया गया है कि, हस्तमैथुन करने से प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम कम करने में मदद मिलेगी. एक गैर-लाभकारी संस्था ‘एफकैंसर’ के इस दावे को New York post ने प्रमुखता से जगह दी है. अब सवाल है कि, क्या सच में मास्टरबेशन करने से प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम कम हो जाएगा? प्रोस्टेट कैंसर से बचने के लिए 1 महीने में कितनी हस्तमैथुन करना चाहिए? आइए जानते हैं रिसर्च से जुड़े इस दावे को-

मास्टरबेशन और प्रोस्टेट कैंसर

मास्टरबेशन यानी हस्तमैथुन एक नेचुरल प्रक्रिया है. ऐसा बड़ी संख्या में युवा करते भी हैं. मगर, सच्चाई यह है कि समाज में इस पर खुलकर बात नहीं की जाती है. आमतौर पर इसे एक गलत हरकत करार दिया गया है. इसी धारणा की वजह से युवाओं में इसको लेकर एक निगेटिव इमेज बन जाती है. इसी का नतीजा है कि, वे कई बार गलत सूचना के शिकार बन हो जाते हैं. प्रोस्टेट कैंसर और मास्टरबेशन को लेकर भी ऐसी ही धारणा बनी हुई है. दुनिया में इसको लेकर कथित तौर पर तमाम तरह के अध्ययन भी किए गए हैं. वर्ष 2004 में करीब 29 हजार मर्दों पर एक स्टडी की गई. इसमें उनके एजैकुलेशन फ्रीक्वेंसी को लेकर भी बात की गई.

महीने में कितनी बार स्पर्म रिलीज से होगा लाभ  

एजैकुलेशन फ्रीक्वेंसी का सीधा मतलब यह है कि एक निश्चित टाइम पीरियड जैसे- एक सप्ताह या एक माह में एक पुरुष कितनी बार अपना स्पर्म रिलीज करता है. मर्द दो तरीके से स्पर्म रिलीज करते हैं- एक मास्टरबेशन और दूसरा फिजिकल रिलेशन. इस स्टडी में दावा किया गया कि जो मर्द ज्यादा फ्रीक्वेंसी से एजैकुलेट होते हैं उनमें प्रोस्टेट कैंसर का खतरा कम होता है. ज्यादा फ्रीक्वेंसी से मतलब है कि, महीने में कम से कम 21 बार रखा गया. यानी करीब हर तीन दिन में दो बार. कुछ साइंटिफिक अध्ययन भी इस दावे को सपोर्ट करते हैं, लेकिन मेडिकल साइंस पुख्ता तौर पर इसको लेकर कुछ नहीं कहता.

कैंसर से बचाव के लिए दो तरीके से स्पर्म करें रिलीज

प्रोस्टेट कैंसर की रोकथाम और शीघ्र पता लगाने के लिए एक गैर-लाभकारी संस्था, एफकैंसर ने अपना मिशन “कैंसर को सचमुच हराना” घोषित किया है. उन्होंने पुरुषों से अपने स्वास्थ्य के लिए अधिक बार वीर्यपात करने का आग्रह किया है. दावा है कि, महीने में कम से कम 21 बार स्खलन करने से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा 22% तक कम हो सकता है. हालांकि, जरूरी नहीं कि खुद से मास्टरबेशन करें आप शारीरिक संबंध बनाकर भी वीर्यपात कर सकते हैं. रिसर्च में दावा है कि, जो लोग प्रति माह 21 या अधिक बार स्खलन करते हैं, उनमें प्रोस्टेट कैंसर का खतरा उन लोगों की तुलना में 19-22% कम होता है जो कम बार स्खलन करते हैं.

ये भी पढ़ें: कितने पार्टनर से यौन संबंध बनाने से हो सकता एड्स? 2, 3, 4 या फिर इससे ज्यादा, डॉक्टर से समझिए HIV Myth

ये भी पढ़ें: शारीरिक संबंध बनाते समय दर्द क्यों होता है? डॉक्टर ने बताए वेजाइनल पेन के 5 ऐसे कारण, सुनकर चौंक जाएंगे

कैंसर में मास्टरबेशन का मेडिकल साइंस में जिक्र नहीं

वैसे इस रिसर्च से यह बात स्पष्ट हो गई है कि मास्टरबेशन या फिर ज्यादा फिजिकल रिलेशन बनाने से प्रोस्टेट कैंसर नहीं होता है. ऐसी ही कुछ रिपोर्ट्स के हवाले से कई जगहों पर तमाम अन्य तरह के दावे किए जाते हैं. हालांकि, कुछ में यह भी कहा गया है कि एंग एज में ज्यादा फिजिकल रिलेशन या मास्टरबेशन करने वाले पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. लेकिन, अभी तक मेडिकल साइंस इस पर पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहती.

क्या है यूरोलॉजिस्ट की सलाह

दिल्ली के आरएमएल हॉस्पिटल में सीनियर यूरोलॉजिस्ट डॉ. हेमंत गोयल इस बात से बिल्कुल इत्तेफाक नहीं रखते हैं. उनका सीधे तौर पर कहना है कि आपके फिजिकल रिलेशन की फ्रिक्वेंसी या मास्टरबेशन की फ्रिक्वेंसी से प्रोस्टेट कैंसर का कुछ लेना देना नहीं है. उनका कहना है कि सामान्य तौर पर 50 साल की उम्र में ऐसी शिकायतें आने लगती हैं. मर्दों में 40 की उम्र के बाद प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ने लगता है. इसके कारणों की बात करने के बजाय अलर्ट रखने पर ध्यान देना चाहिए. पेशाब में किसी तरह की परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. 

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Masturbation can prevent cancer: अन्य गंभीर बीमारियों की तरह दुनियाभर में प्रोस्टेट कैंसर के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं. यह एक बेहद गंभीर बीमारी है. अमेरिका जैसे देश में पुरुषों में होने वाला यह दूसरा सबसे गंभीर कैंसर है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में हर आठवां मर्द इस बीमारी से पीड़ित है. हालांकि, भारत में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. बता दें कि, भारत में प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है, जिसके ज्यादातर मामले शहरी क्षेत्रों (दिल्ली, मुंबई) में तेजी से बढ़ रहे हैं. साल 2020 में देश में प्रोस्टेट कैंसर के 40,000 से अधिक नए मामले आए. यहां चिंता की बात यह है कि, 2040 तक इन मामलों के दोगुने होने का अनुमान है. इसको लेकर तमाम तरह की भ्रांतियां और दावे हैं.  ऐसे में युवा पीढ़ी को इस बारे में जागरुक करने की जरूरत है. हालांकि, इस गंभीर कैंसर से बचाव को लेकर कई बड़ी रिसर्च चल रही हैं. 

हाल में आई एक रिसर्च ने तो लोगों को चौंका दिया. इसमें दावा किया गया है कि, हस्तमैथुन करने से प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम कम करने में मदद मिलेगी. एक गैर-लाभकारी संस्था ‘एफकैंसर’ के इस दावे को New York post ने प्रमुखता से जगह दी है. अब सवाल है कि, क्या सच में मास्टरबेशन करने से प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम कम हो जाएगा? प्रोस्टेट कैंसर से बचने के लिए 1 महीने में कितनी हस्तमैथुन करना चाहिए? आइए जानते हैं रिसर्च से जुड़े इस दावे को-

मास्टरबेशन और प्रोस्टेट कैंसर

मास्टरबेशन यानी हस्तमैथुन एक नेचुरल प्रक्रिया है. ऐसा बड़ी संख्या में युवा करते भी हैं. मगर, सच्चाई यह है कि समाज में इस पर खुलकर बात नहीं की जाती है. आमतौर पर इसे एक गलत हरकत करार दिया गया है. इसी धारणा की वजह से युवाओं में इसको लेकर एक निगेटिव इमेज बन जाती है. इसी का नतीजा है कि, वे कई बार गलत सूचना के शिकार बन हो जाते हैं. प्रोस्टेट कैंसर और मास्टरबेशन को लेकर भी ऐसी ही धारणा बनी हुई है. दुनिया में इसको लेकर कथित तौर पर तमाम तरह के अध्ययन भी किए गए हैं. वर्ष 2004 में करीब 29 हजार मर्दों पर एक स्टडी की गई. इसमें उनके एजैकुलेशन फ्रीक्वेंसी को लेकर भी बात की गई.

महीने में कितनी बार स्पर्म रिलीज से होगा लाभ  

एजैकुलेशन फ्रीक्वेंसी का सीधा मतलब यह है कि एक निश्चित टाइम पीरियड जैसे- एक सप्ताह या एक माह में एक पुरुष कितनी बार अपना स्पर्म रिलीज करता है. मर्द दो तरीके से स्पर्म रिलीज करते हैं- एक मास्टरबेशन और दूसरा फिजिकल रिलेशन. इस स्टडी में दावा किया गया कि जो मर्द ज्यादा फ्रीक्वेंसी से एजैकुलेट होते हैं उनमें प्रोस्टेट कैंसर का खतरा कम होता है. ज्यादा फ्रीक्वेंसी से मतलब है कि, महीने में कम से कम 21 बार रखा गया. यानी करीब हर तीन दिन में दो बार. कुछ साइंटिफिक अध्ययन भी इस दावे को सपोर्ट करते हैं, लेकिन मेडिकल साइंस पुख्ता तौर पर इसको लेकर कुछ नहीं कहता.

कैंसर से बचाव के लिए दो तरीके से स्पर्म करें रिलीज

प्रोस्टेट कैंसर की रोकथाम और शीघ्र पता लगाने के लिए एक गैर-लाभकारी संस्था, एफकैंसर ने अपना मिशन “कैंसर को सचमुच हराना” घोषित किया है. उन्होंने पुरुषों से अपने स्वास्थ्य के लिए अधिक बार वीर्यपात करने का आग्रह किया है. दावा है कि, महीने में कम से कम 21 बार स्खलन करने से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा 22% तक कम हो सकता है. हालांकि, जरूरी नहीं कि खुद से मास्टरबेशन करें आप शारीरिक संबंध बनाकर भी वीर्यपात कर सकते हैं. रिसर्च में दावा है कि, जो लोग प्रति माह 21 या अधिक बार स्खलन करते हैं, उनमें प्रोस्टेट कैंसर का खतरा उन लोगों की तुलना में 19-22% कम होता है जो कम बार स्खलन करते हैं.

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कैंसर में मास्टरबेशन का मेडिकल साइंस में जिक्र नहीं

वैसे इस रिसर्च से यह बात स्पष्ट हो गई है कि मास्टरबेशन या फिर ज्यादा फिजिकल रिलेशन बनाने से प्रोस्टेट कैंसर नहीं होता है. ऐसी ही कुछ रिपोर्ट्स के हवाले से कई जगहों पर तमाम अन्य तरह के दावे किए जाते हैं. हालांकि, कुछ में यह भी कहा गया है कि एंग एज में ज्यादा फिजिकल रिलेशन या मास्टरबेशन करने वाले पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. लेकिन, अभी तक मेडिकल साइंस इस पर पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहती.

क्या है यूरोलॉजिस्ट की सलाह

दिल्ली के आरएमएल हॉस्पिटल में सीनियर यूरोलॉजिस्ट डॉ. हेमंत गोयल इस बात से बिल्कुल इत्तेफाक नहीं रखते हैं. उनका सीधे तौर पर कहना है कि आपके फिजिकल रिलेशन की फ्रिक्वेंसी या मास्टरबेशन की फ्रिक्वेंसी से प्रोस्टेट कैंसर का कुछ लेना देना नहीं है. उनका कहना है कि सामान्य तौर पर 50 साल की उम्र में ऐसी शिकायतें आने लगती हैं. मर्दों में 40 की उम्र के बाद प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ने लगता है. इसके कारणों की बात करने के बजाय अलर्ट रखने पर ध्यान देना चाहिए. पेशाब में किसी तरह की परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. 

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