पश्चिम बंगाल के नार्थ 24 परगना में निपाह वायरस के दो मामलों की पुष्टि हुई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि वेस्ट बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले से जुड़े ये केस सीमित हैं और यात्रा या व्यापार पर कोई पाबंदी लगाने की जरूरत नहीं है.
प. बंगाल में निपाह वायरस के दो मामलों की हुई पुष्टि
Health: भारत में निपाह वायरस के दो मामलों की पुष्टि हुई है. ये दोनों मामले पश्चिम बंगाल के नार्थ 24 परगना में पाए गए हैं. लक्षणों की पुष्टि के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे कम जोखिम वाला बताया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि वेस्ट बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले से जुड़े ये केस सीमित हैं और यात्रा या व्यापार पर कोई पाबंदी लगाने की जरूरत नहीं है. WHO ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी अपडेट में इसके राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक जोखिम को निम्न माना है.
निपाह वायरस से संक्रमित दोनों मरीज 25 वर्षीय मेडिकल कर्मी हैं, इनमें से एक महिला और एक पुरुष हैं. ये दोनों मरीज बरासात के एक निजी अस्पताल में काम करते थे. लक्षण दिसंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में शुरू हुए और जनवरी की शुरुआत में न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं में बदल गए. लक्षणों की पुष्टि के बाद से दोनों को क्वारंटीन में रखा गया.
इसके बाद कुल 196 संपर्कों की पहचान की गई, जिनकी निगरानी और टेस्टिंग हुई. ये सभी संपर्क लक्षणरहित हैं और टेस्ट में निपाह नेगेटिव आए. अभी तक कोई अतिरिक्त केस नहीं मिला है. केंद्र सरकार ने राज्य के साथ मिलकर निगरानी, लैब टेस्टिंग, संक्रमण रोकथाम और फील्ड जांच शुरू की है.
WHO ने कहा कि मरीजों के लक्षण दिखते समय कोई यात्रा नहीं हुई, इसलिए अन्य राज्यों या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके फैलाव की संभावना कम है. पश्चिम बंगाल में फ्रूट बैट रिजर्वायर की मौजूदगी से स्थानीय जोखिम मध्यम है, लेकिन समग्र रूप से स्थिति नियंत्रण में है. WHO ने भारत के पिछले प्रकोपों के सफल प्रबंधन पर भरोसा जताया है. WHO भारत के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ समन्वय में है और किसी तरह की यात्रा या व्यापार प्रतिबंध की सिफारिश नहीं की है. हालांकि, नेपाल, थाईलैंड, ताइवान, चीन और सिंगापुर जैसे देशों ने सतर्कता बरतते हुए स्क्रीनिंग बढ़ाई गई है.
निपाह एक जूनोटिक बीमारी है, जो मुख्यतः चमगादड़ों से इंसानों में फैलती है. इसके अलावा यह संक्रमित व्यक्तियों के निकट संपर्क से भी फैलती है. व्यक्ति-से-व्यक्ति संक्रमण संभव है, लेकिन इसके लिए लंबे समय तक करीबी संपर्क जरूरी होता है. इस वायरस से संक्रमित लोगों की मृत्यु दर 40-75% तक हो सकती है.
यह वायरस भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्रों में आवर्ती है. वर्तमान में कोई स्वीकृत टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है. शुरुआती सहायक उपचार ही सर्वोत्तम विकल्प है.
निपाह वायरस से संक्रमित होने पर शुरुआती लक्षण जैसे बुखार, सिरदर्द, मांसपेशी दर्द सामान्य लगते हैं, लेकिन बाद में मस्तिष्क की सूजन (एन्सेफलाइटिस), सांस की तकलीफ, दौरा या कोमा हो सकता है. ज्यादातर लोग रोकथाम करने पर स्वस्थ हो जाते हैं, लेकिन कुछ में न्यूरोलॉजिकल क्षति रह जाती है. संक्रमण के अधिक फ़ैल जाने पर व्यक्ति को बचना मुश्किल हो जाता है.
निपाह के संक्रमण से बचने के लिए जरूरी रोकथाम करना आवश्यक है. इसके लिए जानवरों से संपर्क से बचना चाहिये, विशेषकर फल खाने वाले चमगादड़ों और सूअरों से. उन क्षेत्रों से भी दूर रहें जहां चमगादड़ रहते हैं. कच्चे या किण्वित खजूर का सेवन न करें, यह फल चमगादड़ों द्वारा दूषित हो सकता है. साथ ही हाइजीन का ध्यान रखें. संक्रमित व्यक्तियों के निकट सम्पर्क से बचें, उन्हें क्वारंटीन करें. यदि संपर्क करना आवश्यक हो तो PPE किट का उपयोग करें.
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