Motion Sickness During Travel: कहीं भी सफर के दौरान जब लोगों को चक्कर आना, सिर दर्द होना और जी मिचलाना जैसी समस्या होती है, तो इसे मोशन सिकनेस कहा जाता है. यह समस्या बच्चों में ही नहीं, बड़ों में भी होती है. आम तौर पर आपने देखा होगा कि मोशन सिकनेस यात्रा के दौरान ही होता है, चाहे वह कार, बस, ट्रेन या फ्लाइट कुछ भी हो. इस आधार पर ये कहा जा सकता है कि जब व्यक्ति मोशन यानी गति में होता है, तो उल्टी और जी मिचलाने की समस्या आती है. इसके साथ मोशन सिकनेस की समस्या केवल पेट्रोल या डीजल कारों तक ही सीमित नहीं है. वास्तव में, अध्ययनों से पता चला है कि कुछ लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में अधिक समस्या होती है. आपको बता दें कि मोशन सिकनेस से छुटकारा पाने के तरीकों के बारे में मशहूर शिक्षक और यूट्यूबर खान सर ने भी बताया है. चलिए जानते हैं सबकुछ इस विश्लेषणात्मक लेख में.
क्या है मोशन सिकनेस?
मोशन सिकनेस तब होती है, जब यात्रा करते समय आंखें और कान दिमाग को अलग-अलग संकेत भेजते हैं. जैसे आंखें कहती हैं कि आप स्थिर हैं, लेकिन कान महसूस करते हैं कि शरीर हिल रहा है. इस उलझन में दिमाग भ्रमित हो जाता है. इसी वजह से मतली आना, उल्टी होना, सिरदर्द, चक्कर आना और ठंडा पसीना जैसे लक्षण महसूस होते हैं. आसान शब्दों में कहें तो जब शरीर की हरकत और आंखों की देखी चीज़ों में तालमेल नहीं रहता, तब मोशन सिकनेस होती है.
क्या इलेक्ट्रिक वाहन में ज्यादा होती है समस्या?
इलेक्ट्रिक गाड़ियों में सफर करते समय मोशन सिकनेस की शिकायत करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी एक बड़ी वजह यह है कि EV में इंजन की आवाज और वाइब्रेशन नहीं होता, जिससे दिमाग को यह समझने में दिक्कत होती है कि गाड़ी चल रही है या नहीं. कई यात्रियों ने बताया है कि इलेक्ट्रिक कार में बैठते ही उन्हें मतली, चक्कर और बेचैनी महसूस होती है, खासकर जब वे पीछे की सीट पर बैठते हैं. इस वजह से इलेक्ट्रिक वाहन खरीदते समय लोग इसे समझना चाहते हैं कि क्या वाकई में ऐसा है.
डीजल-पेट्रोल वाहनों से किस तरीके से अलग है इलेक्ट्रिक वाहन?
पेट्रोल-डीजल से चलने वाली गाड़ियां चलते समय आवाज और वाइब्रेशन करती हैं. दिमाग इन संकेतों को अपने-आप समझ लेता है और गाड़ी की गति में होने वाले बदलाव के लिए तैयार रहता है. लेकिन इलेक्ट्रिक गाड़ियां बहुत शांत और स्मूद चलती हैं. इनमें न तो ज्यादा आवाज होती है और न ही वाइब्रेशन. इसलिए दिमाग को वो पुराने संकेत नहीं मिल पाते, जिससे कुछ लोगों को गाड़ी की रफ्तार समझने में परेशानी होती है और उन्हें चक्कर या उल्टी महसूस हो सकती है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
फ्रांस की एक यूनिवर्सिटी में कार सिकनेस पर शोध कर रहे पीएचडी छात्र विलियम एमोंड का कहना है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों में ज्यादा चक्कर आने की एक वजह लोगों का कम अनुभव भी हो सकता है. उनके मुताबिक, दिमाग पहले पेट्रोल या डीजल गाड़ियों में मिले अनुभव के आधार पर गाड़ी की गति को समझता है. लेकिन इलेक्ट्रिक कारें अलग तरह से चलती हैं, इसलिए दिमाग को झटके, रफ्तार और मोड़ का सही अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे ड्राइवर और यात्री दोनों को मोशन सिकनेस महसूस हो सकती है.
खान सर ने मोशन सिकनेस से बचने का बताया उपाय
खान सर से एक छात्र ने पूछा कि वाहनों में सफर करते समय लोगों को उल्टी क्यों महसूस होती है? इस समस्या से बचने के लिए खान सर ने कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए. उन्होंने बताया कि सफर करने के दौरान खिड़की के पास बैठकर बाहर देखना चाहिए, इससे आंखों और कानों से आने वाले संकेतों का तालमेल बनता है और मिचली कम होती है. खुद गाड़ी चलाना भी मददगार हो सकता है, क्योंकि इससे मस्तिष्क को लगातार संकेत मिलते रहते हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने बताया कि उल्टी रोकने के लिए दवाएं भी उपलब्ध हैं, जिन्हें डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए. साथ ही खान सर ने एक मोबाइल गेम का भी जिक्र किया जो आंखों को गति का सही एहसास दिलाकर कुछ लोगों के लिए लक्षणों को कम करने में मददगार साबित हो सकता है.