Ragi For Constipation: अगर आपको भी रोज सुबह पेट साफ न होने की समस्या रहती है, तो अपनी डाइट में रागी (फिंगर मिलेट) को शामिल करना आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. रागी में मौजूद भरपूर फाइबर पेट को अंदर से साफ करने में मदद करता है. खास बात यह है कि रात में रागी खाने से सुबह बाउल मूवमेंट बेहतर होता है और पेट खुलकर साफ हो जाता है.
कब्ज में क्यों असरदार है रागी?
आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों को लंबे समय से कब्ज की शिकायत रहती है, उन्हें रोज के भोजन में रागी को जगह देनी चाहिए. रागी में फाइबर के साथ-साथ कैल्शियम, आयरन और जरूरी अमीनो एसिड पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं. यह अनाज आंतों की कार्यक्षमता को सुधारने में मदद करता है और पेट की सफाई को आसान बनाता है.
फाइबर से भरपूर, पेट के लिए वरदान
रागी में सॉल्यूबल और नॉन-सॉल्यूबल दोनों तरह के फाइबर मौजूद होते हैं. यही फाइबर मल को नरम बनाते हैं और आंतों की गति को बेहतर करते हैं. नियमित रूप से रागी खाने से बाउल मूवमेंट सुधरता है और पुरानी कब्ज की समस्या धीरे-धीरे कम होने लगती है. जिन लोगों को रोज पेट साफ न होने से परेशानी होती है, उनके लिए रागी बेहद कारगर साबित हो सकती है.
एसिडिटी और गैस में भी राहत
जब पाचन सही रहता है तो गैस और एसिडिटी की दिक्कत अपने आप कम होने लगती है. रागी की तासीर क्षारीय (एल्कलाइन) मानी जाती है, जो पेट में बनने वाले अतिरिक्त एसिड को संतुलित करने में मदद करती है. इससे खट्टी डकार, सीने में जलन और पेट फूलने जैसी समस्याएं भी कम हो सकती हैं.
वजन घटाने में भी मददगार
रागी सिर्फ पेट साफ करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वजन कंट्रोल करने में भी सहायक है. इसमें मौजूद कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे लंबे समय तक पेट भरा रहता है. इससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग से बचाव होता है. यही वजह है कि वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी रागी एक अच्छा विकल्प है.
गट हेल्थ और इम्युनिटी को करता है मजबूत
अच्छी सेहत की शुरुआत गट हेल्थ से होती है. रागी में ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं. इससे पाचन बेहतर होता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत बनती है. जब गट हेल्दी रहता है तो शरीर पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाता है.
मेटाबॉलिज्म को रखता है संतुलित
रागी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, इसलिए यह ब्लड शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाता. यही कारण है कि डायबिटीज के मरीज भी सीमित मात्रा में इसका सेवन कर सकते हैं. रागी खाने से मेटाबॉलिज्म बेहतर रहता है और पाचन क्रिया संतुलित बनी रहती है, जिससे शरीर अंदर से स्वस्थ महसूस करता है.