Virus From Sea Food: नॉनवेज खाने वाले बहुत से लोगों को सीफूड खाना काफी पसंद होता है. हालांकि सीफूड खाना आपकी आंखों के लिए परेशानी का कारण हो सकता है. हाल ही में एक रिपोर्ट ने लोगों को चौंका दिया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र में एक वायरस पाया जाता है, जिसके कारण इंसानों की आंखों को भी नुकसान हो सकता है. पहले ये वायरस झींगा और दूसरे समुद्री जीवों में मिलता था, लेकिन अब ये वायरस लोगों में पाया जा रहा है. इसे आंखों की बीमारी से जोड़ा जा रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि ये बीमारी लोगों की आंखें छीन सकती है. ऐसे में अब लोगों के मन में डर है कि क्या अब सीफूड भी बीमारी का कारण बन सकता है.
झींगा और समुद्री जीवों में Covert Mortality Nodavirus यानी CMNV पाया जाता है. वैज्ञानिक इसे आंखों की बीमारी से जोड़कर देखते हैं. आंखों में पाई जाने वाली इस बीमारी को ‘पर्सिस्टेंट ऑक्यूलर हायपरटेंशन वायरल एंटेरियल यूवेइटिस’ कहा जाता है. इससे आंखों के अंदर दबाव बढ़ता है और सूजन भी हो जाती है. इस वायरस के कारण नज़र धुंधली हो सकती है और रोशनी कम हो सकती है.
सीफूड नहीं खाने वालों में भी वायरस
दरअसल, चीन में एक स्टडी की गई, जिसमें 70 मरीजों को शामिल किया गया. इन मरीजों को आंखों की समस्या थी. उन लोगों की जांच करने पर पता चला कि उनकी आंखों के अंदर वायरस जैसे कण थे. इन मरीजों के शरीर में CMNV के खिलाफ एंटीबॉडी भी मिली. वैज्ञानिकों ने इस वायरस का टेस्ट चूहों पर किया. चूहों में भी इंसानों जैसे लक्षण दिखे. रिसर्च में पाया गया कि 70 फीसदी मरीजों को ये वायरस कच्चे समुद्री खाने या समुद्री जीवों से हुआ था. कच्चा या अधपका खाना भी इस बीमारी का कारण हो सकता है. हालांकि कुछ मामलों में मरीज सीफूड नहीं खाते थे, लेकिन इसके बावजूद वे वायरस के संपर्क में थे. इसके लिए अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये संक्रमण किसी और तरीके से भी फैल सकता है. इसके कारण इस वायरस पर अभी और रिसर्च की जरूरत है.
डॉक्टरों ने लोगों को दी सलाह
चिंता की बात ये है कि ये वायरस अब तक समुद्री प्रजातियों में पाया जाता था. ये वायरस दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद है. डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि कच्चा या अधपका समुद्री खाना खाने से बचने की कोशिश करें. किसी भी समुद्री चीजों को छूने के बाद साफ तरीके से हाथ धुलें. अगर आपकी आंखों में किसी तरह का दर्द, धुंधलापन या लालिमा नज़र आती है, तो डॉक्टर से जांच ज़रूर कराएं.