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Best Sleeping Position: रात में बिस्तर पर जाते ही हम ज्यादातर बिना सोचे-समझे अपनी पसंदीदा पोजिशन में लेट जाते हैं. लेकिन क्या सच में हर सोने का तरीका हमारे शरीर के लिए सही होता है? स्लीप एक्सपर्ट के अनुसार, युवा और स्वस्थ लोगों के लिए पोजिशन उतनी मायने नहीं रखती. लेकिन उम्र बढ़ने के साथ या किसी मेडिकल समस्या के होने पर सोने की पोजिशन का असर साफ दिखने लगता है. आइए जानते हैं आखिर सबसे अच्छी पोजिशन कौन सी है.
सोने के लिए कौन-सी पोजिशन है सबसे अच्छी?
Best Sleeping Position: हम सभी दिनभर की भागदौड़ के बाद बिस्तर पर गिरते ही राहत महसूस करते हैं. लेकिन जिस बात पर सबसे कम ध्यान जाता है, वही असल में सबसे ज्यादा असर डालती है - हम किस तरह सोते हैं. नींद पूरी होना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है सही पोजिशन में सोना. रिसर्च बताती है कि गलत पोजिशन धीरे-धीरे गर्दन, कमर, पाचन, सांस और यहां तक कि दिल की सेहत को भी प्रभावित कर सकती है.
अच्छी नींद शरीर की रिकवरी को तेज करती है, हार्मोन बैलेंस बनाए रखती है और दिनभर की थकान दूर करती है. इसलिए आज रात से आदत के भरोसे नहीं, समझदारी से अपनी सोने की मुद्रा चुनें. छोटी-सी जागरूकता आपके लंबे समय की सेहत को बेहतर बना सकती है.
पीठ के बल लेटकर सोना रीढ़ की हड्डी को सीधा सहारा देता है. इस मुद्रा में शरीर का वजन बराबर बंट जाता है, जिससे गर्दन और कमर पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता. चेहरे का तकिए से कम संपर्क होता है, इसलिए स्किन पर झुर्रियां बनने की संभावना भी कम रहती है.हालांकि, जिन लोगों को खर्राटे आते हैं या स्लीप एपनिया की समस्या है, उनके लिए यह पोजिशन ठीक नहीं मानी जाती. पीठ के बल सोते समय जीभ पीछे की ओर खिसक सकती है, जिससे सांस लेने का रास्ता थोड़ा संकरा हो जाता है. इससे सांस रुक-रुक कर आ सकती है और नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है. जिनको पुराना कमर दर्द है, उन्हें भी इस पोजिशन में असहजता हो सकती है.
अगर आपको एसिडिटी, गैस या खाना ऊपर चढ़ने की परेशानी रहती है, तो बाईं करवट सोना काफी मददगार हो सकता है. शरीर की बनावट ऐसी है कि बाईं ओर लेटने से पेट का एसिड इसोफेगस में कम लौटता है. इसलिए जिन लोगों को रात में जलन की शिकायत रहती है, उन्हें अक्सर यही पोजिशन अपनाने की सलाह दी जाती है.गर्भवती महिलाओं के लिए भी बाईं करवट बेहतर मानी जाती है, क्योंकि इससे ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है.लेकिन जिन लोगों को दिल से जुड़ी गंभीर समस्या है, उन्हें अपने डॉक्टर से सलाह लेकर ही यह पोजिशन अपनानी चाहिए, क्योंकि दिल शरीर के बाईं ओर स्थित होता है और कुछ मामलों में दबाव का एहसास हो सकता है.
दाईं तरफ सोना कई लोगों को ज्यादा आराम देता है, खासकर उन्हें जिन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है. इस पोजिशन में डायाफ्राम को बेहतर मूवमेंट मिलती है, जिससे फेफड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है.कुछ दिल के मरीजों को भी दाईं करवट में ज्यादा सहजता महसूस होती है. हालांकि अगर आपको एसिडिटी की समस्या है, तो दाईं ओर सोने से जलन बढ़ सकती है. इसलिए अपनी स्थिति के अनुसार संतुलन बनाना जरूरी है.
कई लोग पेट के बल सोना पसंद करते हैं, क्योंकि शुरुआत में यह पोजिशन सुकून देती है. लेकिन लंबी अवधि में यह गर्दन और कमर के लिए सही नहीं मानी जाती. इस मुद्रा में गर्दन एक ओर मुड़ी रहती है, जिससे सर्वाइकल दर्द हो सकता है. साथ ही कमर के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे बैक पेन की समस्या बढ़ सकती है.चेहरा तकिए में दबा रहने से स्किन पर सूजन और समय से पहले झुर्रियां आने की आशंका भी रहती है. अगर पहले से गर्दन या पीठ में दर्द है, तो इस पोजिशन से स्थिति और बिगड़ सकती है.
सच यह है कि कोई एक मुद्रा सबके लिए परफेक्ट नहीं होती. सही पोजिशन वही है जो आपकी सेहत, उम्र, मेडिकल स्थिति और आराम के अनुसार फिट बैठे.फिर भी सामान्य तौर पर देखा जाए तो ज्यादातर लोगों के लिए करवट लेकर सोना ज्यादा संतुलित और सुरक्षित विकल्प माना जाता है. इससे रीढ़ को सहारा मिलता है, सांस लेने में आसानी होती है और पाचन भी बेहतर रहता है.
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