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थायराइड बढ़ने पर क्यों तेजी से बढ़ता है वजन, कैसे मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है हार्मोनल बदलाव, जानें- बचाव के तरीके?

Thyroid Symptoms: थायरॉयड एक छोटी लेकिन शरीर की बेहद महत्वपूर्ण ग्रंथि है, जो शरीर की ऊर्जा, मेटाबॉलिज्म, वजन और मूड को नियंत्रित करती है. जब यह जरूरत से ज्यादा या कम हार्मोन बनाने लगती है, तो थकान, वजन बढ़ना या घटना, दिल की धड़कन में बदलाव और मानसिक असंतुलन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: February 23, 2026 12:48:09 IST

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Thyroid and Weight Gain: थायरॉयड ग्रंथि भले ही आकार में छोटी होती है, लेकिन इसका काम बहुत बड़ा है. यह शरीर की ऊर्जा, मेटाबॉलिज्म, वजन, दिल की धड़कन, पाचन और मूड को नियंत्रित करती है. जब यह ग्रंथि ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो सकती हैं. इसलिए इसके लक्षणों को समय रहते पहचानना जरूरी है.

जब थायरॉयड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा या कम हार्मोन बनाने लगती है, तो उसे थायरॉयड असंतुलन कहा जाता है. ये हार्मोन शरीर में ऊर्जा के उपयोग को नियंत्रित करते हैं, इसलिए इनका संतुलन बिगड़ते ही शरीर की कार्यप्रणाली प्रभावित होने लगती है.

 हाइपोथायरॉयड और हाइपरथायरॉयड में अंतर

हाइपोथायरॉयड में हार्मोन कम बनते हैं, जिससे शरीर की गति धीमी हो जाती है. व्यक्ति को थकान, वजन बढ़ना, ठंड ज्यादा लगना और सुस्ती महसूस हो सकती है.
वहीं हाइपरथायरॉयड में हार्मोन ज्यादा बनने लगते हैं. इससे दिल की धड़कन तेज हो सकती है, वजन घट सकता है, घबराहट और बेचैनी बढ़ सकती है.

 मेटाबॉलिज्म पर असर

थायरॉयड हार्मोन शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा बनाने में मदद करते हैं. जब इनका लेबल खराब होता है, तो व्यक्ति को लगातार थकान महसूस हो सकती है. हाइपोथायरॉयड में मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे वजन बढ़ना आम बात है. वहीं हाइपरथायरॉयड में मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है और अचानक वजन कम हो सकता है.

 कौन-कौन सी समस्याएं हो सकती हैं

थायरॉयड की समस्या केवल वजन और थकान तक सीमित नहीं रहती. यह दिल की धड़कन, मानसिक स्वास्थ्य, पीरियड्स की नियमितता, प्रजनन क्षमता और हड्डियों की मजबूती पर भी असर डाल सकती है. समय पर इलाज न होने पर स्थिति गंभीर भी हो सकती है.

जांच और इलाज

थायरॉयड की पहचान खून की जांच से की जाती है, जिसमें टीएसएच, टी3 और टी4 हार्मोन के स्तर को देखा जाता है. इलाज स्थिति के अनुसार तय होता है. हाइपोथायरॉयड में हार्मोन की दवा दी जाती है, जबकि हाइपरथायरॉयड में हार्मोन को नियंत्रित करने की दवाएं दी जाती हैं. कई मामलों में नियमित जांच और लंबे समय तक निगरानी जरूरी होती है.

लाइफस्टाइल का महत्व

संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, तनाव कम करना और नियमित स्वास्थ्य जांच थायरॉयड को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं. आयोडीन, जिंक और सेलेनियम जैसे पोषक तत्व शरीर के लिए जरूरी होते हैं.अगर लंबे समय तक थकान, अचानक वजन में बदलाव, बाल झड़ना, दिल की धड़कन तेज होना या मूड में असामान्य बदलाव दिखें, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें. सही समय पर इलाज शुरू कर दिया जाए तो थायरॉयड को नियंत्रित किया जा सकता है और सामान्य जीवन जिया जा सकता है.

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Written By: Shivashakti narayan singh
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