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Toilet Soap vs Bathing Bar: कहीं आप टॉयलेट सॉप से तो नहीं नहाते, क्या है नहाने की साबुन के मापदंड, टॉयलेट और बाथिंग बार में अंतर?

Toilet Soap vs Bathing Bar: लोग नहाते वक्त साबुन का यूज तो करते ही हैं. आजकल कई सारी कंपनियां मार्केट में हैं, जिनकी साबुन मार्केट में आसानी से मिल जाती हैं. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि जिस साबुन से आप नहाते हैं वो नहाने का है या टॉयलेट वाला.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: January 10, 2026 12:08:47 IST

Toilet Soap vs Bathing Bar: लोग नहाते वक्त साबुन का यूज तो करते ही हैं. आजकल कई सारी कंपनियां मार्केट में हैं, जिनकी साबुन मार्केट में आसानी से मिल जाती हैं. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि जिस साबुन से आप नहाते हैं वो नहाने का है या टॉयलेट वाला. कुछ लोग टॉयलेट साबुन और बाथिंग बार के बीच कंफ्यूजन रहता है. तो चिंता मत कीजिए यहां पर आपके लिए इन दोनों के बारे में जानकारी दी गई है.

टॉयलेट सॉप और बाथिंग बार में अंतर

टॉयलेट सॉप को आमतौर पर लौंडरी यानि कपड़े या जूते धोने में इस्तेमाल किया जाता है. टॉयलेट साबुन को आमतौर पर मलत्याग करने के बाद हाथों को क्लीन करने या कपड़ों, जूते आदि साफ करने के लिए यूज किया जाता है. अधिकतर लोग इस साबुन को स्किन पर भी यूज करने लगते हैं या हाथो पर रगडने लगते हैं. लेकिन, इस टॉयलेट को स्किन पर नहीं लगाया जाता और इसके बारे सलाह भी नहीं दी जाती. मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स, फूड एंड डिस्ट्रि्यूशन के मुताबिक इसमें 60 से 70 प्रतिशत तक फैटी मैटर पाया जाता है. यह आपकी स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है. जबकि, बाथिंग सॉप यानि नहाने का साबुन इससे अलग होता है, जिसे स्किन पर लगाने की परमिशन दी जाती है. टॉयलेट सॉप में एलकलाइन पाया जाता है, जो स्किन को ड्राई बना सकती है. इसके यूज से रिंकल्स और पुरानी स्किन की परेशानी फिर से हो सकती है. 

बाथिंग बार के बारे में जानें 

बाथिंग बार या नहाने का साबुन आमतौर पर नहाने के लिए यूज की जाती है. इन्हें सिंडेड बार भी कहा जाता है. इसमें फैटी मैटर की बात की जाए तो यह 60 फीसदी से कम होता है. बाथिंग बार का PH लेवल आपकी स्किन के पीएच लेवल से मिलता-जुलता है. इन साबुन में मॉइश्चुराइजिंग गुण पाए जाते हैं. इनसे नहाने पर आपकी स्किन मॉइश्चराइज होती है और हाइड्रेट रखती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर आप साबुन लगाते हैं तो प्रयास करें कि बाथिंग बार से ही नहाए. यदि आप टॉयलेट सॉप से नहाते हैं तो इससे जलन और रिंकल जैसी परेशानी से जूझ सकते हैं. 

TFM क्या है?

यह साबुन में मौजूद फैटी पदार्थ का प्रतिशत बताता है. कई तरह से यह साबुन की क्वालिटी का एक मुख्य इंडिकेटर है. TFM जितना ज़्यादा होगा, साबुन उतना ही बेहतर होगा, जो आपकी स्किन पर हार्श नहीं होगा. साथ ही सफाई और मॉइस्चराइज़िंग में अच्छा होगा. भारत में कानूनी और रेगुलेटरी स्टैंडर्ड के अनुसार, टॉयलेट सॉप में कम से कम 60 प्रतिशत TFM होना चाहिए. इसका मतलब है कि इसमें नेचुरल तेलों और फैट की ज़्यादा मात्रा होती है. यह सफाई और मॉइस्चराइज़िंग के लिए असरदार है. TFM को तीन ग्रेड में बांटा गया है.

ग्रेड 1: 76% और उससे ज़्यादा.
ग्रेड 2: 70% से 76%.
ग्रेड 3: 60% से 70%.

कई साबुनों में जानवरों की चर्बी भी शामिल होती है. ऐसे में रैपर को सावधानी पूर्वक पढ़ना चाहिए. अगर साबुन के पैकेट पर टैलो (Tallow) लिखा है तो साबुन में जानवरों की चर्बी का यूज किया गया है. 76 फीसदी से ज्यादा टीएफएम का होना बहुत जरूरी है, तभी आप उसे नहाने के लिए यूज कर सकते हैं. 

नोट- यहां पर दिया गया लेख सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है. इंडिया न्यूज इस बारे कोई जिम्मेदारी नहीं लेता कि आप इसका कैसे यूज करते हैं. कोई भी वस्त या साबुन यूज करने से पहले एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर लें. किसी प्रकार की परेशानी होने पर हमारी जिम्मेदारी नहीं होगी.

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Toilet Soap vs Bathing Bar: कहीं आप टॉयलेट सॉप से तो नहीं नहाते, क्या है नहाने की साबुन के मापदंड, टॉयलेट और बाथिंग बार में अंतर?

Toilet Soap vs Bathing Bar: लोग नहाते वक्त साबुन का यूज तो करते ही हैं. आजकल कई सारी कंपनियां मार्केट में हैं, जिनकी साबुन मार्केट में आसानी से मिल जाती हैं. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि जिस साबुन से आप नहाते हैं वो नहाने का है या टॉयलेट वाला.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: January 10, 2026 12:08:47 IST

Toilet Soap vs Bathing Bar: लोग नहाते वक्त साबुन का यूज तो करते ही हैं. आजकल कई सारी कंपनियां मार्केट में हैं, जिनकी साबुन मार्केट में आसानी से मिल जाती हैं. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि जिस साबुन से आप नहाते हैं वो नहाने का है या टॉयलेट वाला. कुछ लोग टॉयलेट साबुन और बाथिंग बार के बीच कंफ्यूजन रहता है. तो चिंता मत कीजिए यहां पर आपके लिए इन दोनों के बारे में जानकारी दी गई है.

टॉयलेट सॉप और बाथिंग बार में अंतर

टॉयलेट सॉप को आमतौर पर लौंडरी यानि कपड़े या जूते धोने में इस्तेमाल किया जाता है. टॉयलेट साबुन को आमतौर पर मलत्याग करने के बाद हाथों को क्लीन करने या कपड़ों, जूते आदि साफ करने के लिए यूज किया जाता है. अधिकतर लोग इस साबुन को स्किन पर भी यूज करने लगते हैं या हाथो पर रगडने लगते हैं. लेकिन, इस टॉयलेट को स्किन पर नहीं लगाया जाता और इसके बारे सलाह भी नहीं दी जाती. मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स, फूड एंड डिस्ट्रि्यूशन के मुताबिक इसमें 60 से 70 प्रतिशत तक फैटी मैटर पाया जाता है. यह आपकी स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है. जबकि, बाथिंग सॉप यानि नहाने का साबुन इससे अलग होता है, जिसे स्किन पर लगाने की परमिशन दी जाती है. टॉयलेट सॉप में एलकलाइन पाया जाता है, जो स्किन को ड्राई बना सकती है. इसके यूज से रिंकल्स और पुरानी स्किन की परेशानी फिर से हो सकती है. 

बाथिंग बार के बारे में जानें 

बाथिंग बार या नहाने का साबुन आमतौर पर नहाने के लिए यूज की जाती है. इन्हें सिंडेड बार भी कहा जाता है. इसमें फैटी मैटर की बात की जाए तो यह 60 फीसदी से कम होता है. बाथिंग बार का PH लेवल आपकी स्किन के पीएच लेवल से मिलता-जुलता है. इन साबुन में मॉइश्चुराइजिंग गुण पाए जाते हैं. इनसे नहाने पर आपकी स्किन मॉइश्चराइज होती है और हाइड्रेट रखती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर आप साबुन लगाते हैं तो प्रयास करें कि बाथिंग बार से ही नहाए. यदि आप टॉयलेट सॉप से नहाते हैं तो इससे जलन और रिंकल जैसी परेशानी से जूझ सकते हैं. 

TFM क्या है?

यह साबुन में मौजूद फैटी पदार्थ का प्रतिशत बताता है. कई तरह से यह साबुन की क्वालिटी का एक मुख्य इंडिकेटर है. TFM जितना ज़्यादा होगा, साबुन उतना ही बेहतर होगा, जो आपकी स्किन पर हार्श नहीं होगा. साथ ही सफाई और मॉइस्चराइज़िंग में अच्छा होगा. भारत में कानूनी और रेगुलेटरी स्टैंडर्ड के अनुसार, टॉयलेट सॉप में कम से कम 60 प्रतिशत TFM होना चाहिए. इसका मतलब है कि इसमें नेचुरल तेलों और फैट की ज़्यादा मात्रा होती है. यह सफाई और मॉइस्चराइज़िंग के लिए असरदार है. TFM को तीन ग्रेड में बांटा गया है.

ग्रेड 1: 76% और उससे ज़्यादा.
ग्रेड 2: 70% से 76%.
ग्रेड 3: 60% से 70%.

कई साबुनों में जानवरों की चर्बी भी शामिल होती है. ऐसे में रैपर को सावधानी पूर्वक पढ़ना चाहिए. अगर साबुन के पैकेट पर टैलो (Tallow) लिखा है तो साबुन में जानवरों की चर्बी का यूज किया गया है. 76 फीसदी से ज्यादा टीएफएम का होना बहुत जरूरी है, तभी आप उसे नहाने के लिए यूज कर सकते हैं. 

नोट- यहां पर दिया गया लेख सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है. इंडिया न्यूज इस बारे कोई जिम्मेदारी नहीं लेता कि आप इसका कैसे यूज करते हैं. कोई भी वस्त या साबुन यूज करने से पहले एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर लें. किसी प्रकार की परेशानी होने पर हमारी जिम्मेदारी नहीं होगी.

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