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टेस्टोस्टेरोन थेरेपी क्या? जिसका अंग्रेजों के बीच बढ़ा ट्रेंड, शारीरिक संबंध में इसका रोल क्या? यूके में मिथ और फैक्ट पर बहस

Testosterone Therapy Myths Vs Facts: यह सच है कि, आजकल की भागदौड़ और खराब जीवनशैली सेहत पर भारी पड़ रही है. ऐसा होने से शरीर में जरूरी टेस्टोस्टेरोन हार्मोन तेजी से कम हो रहा है. इससे निजात पाने के लिए लोग महंगी दवाओं से लेकर तमाम घरेलू उपाय करते हैं. लेकिन, यूके (United Kingdom) में एक परेशानी से बचने के लिए खास थेरेपी की मदद ली जा रही है. आइए जानते हैं क्या है वो थेरेपी? इसकी सच्चाई को लेकर क्या चल रही बहस-

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: February 16, 2026 17:21:09 IST

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Testosterone Therapy Myths Vs Facts: यह सच है कि, आजकल की भागदौड़ और खराब जीवनशैली सेहत पर भारी पड़ रही है. ऐसी स्थिति में उपजा मानसिक तनाव यौन स्वास्थ्य (Sexual Life) में गिरावट का कारण बनता जा रहा है. आज यह समस्या युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक को प्रभावित कर रही है. ऐसा होने से शरीर में जरूरी टेस्टोस्टेरोन हार्मोन तेजी से कम हो रहा है. ये परेशानी उन लोगों में भी देखी जा रही है जो कभी रोज फिजिकल संबंध बनाते थे, लेकिन आज महीनों तक इंटीमेट नहीं हो पा रहे हैं. इससे निजात पाने के लिए लोग महंगी दवाओं से लेकर तमाम घरेलू उपाय करते हैं. लेकिन, यूके (United Kingdom) में एक परेशानी से बचने के लिए खास थेरेपी की मदद ली जा रही है. यह ट्रेंड अंग्रेजों के बीच तेजी से बढ़ रहा है. जी हां, इसका नाम है ‘टेस्टोस्टेरोन थेरेपी’. अच्छी बात यह है कि, इस थेरेपी की मदद पुरुष ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में महिलाएं भी ले रही हैं.

ब्रिटेन में लोगों की रोमांटिक लाइफ तेजी से बिगड़ रही है और इसका असर उनकी जिंदगी पर बुरी तरह पड़ रहा है. कहने का मतलब UK के युवाओं में भी संबंध बनाने की इच्छा कम हो रही है. ऐसे में बड़ी संख्या में लोग टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (TRT) का सहारा ले रहे हैं. कई लोग दावा कर रहे हैं कि इस थेरेपी से उनका लिबिडो बूस्ट हुआ है और वे पार्टनर के साथ पहले से कहीं ज्यादा इंटीमेट हो रहे हैं. 

थेरेपी दोबारा यंग महसूस कराने का दावा

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, यूके में टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (TRT) का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है. वहां के लोग बिना किसी सोच-समझे के यह थेरेपी ले रहे हैं. हालात यह हैं कि अंग्रेज लोग अब अपनी यौन समस्याओं के लिए इस थेरेपी को मैजिक मान रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, यूके में 2021 से 2024 के बीच टेस्टोस्टेरोन के प्रिस्क्रिप्शन में 135% की बढ़ोतरी बताई जा रही है. ऐसे में सवाल उठता है क्या यह सच में मैजिकल ट्रीटमेंट है या फिर हाइप और बिजनेस का खेल? इस बारे में एक्सपर्ट्स की राय जानना सभी के लिए जरूरी है, ताकि किसी भी परेशानी से बचा जा सके.

30 साल से लोगों के संबंध बनाने की फ्रीक्वेंसी में गिरावट

रिपोर्ट के मुताबिक, यूके में पिछले 30 साल से लोगों के शारीरिक संबंध बनाने की फ्रीक्वेंसी में गिरावट दर्ज की गई है. बता दें कि, 1990 में 16 से 44 वर्ष के लोग औसतन महीने में 5 बार संबंध बनाते थे, जो 2010 तक घटकर 3 बार रह गया. अब हालात इससे भी बदतर हो गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि, इस परेशानी के पीछे डिजिटल दुनिया का बढ़ता प्रभाव, तनाव, डिप्रेशन, अकेलापन और बदलती लाइफस्टाइल जैसे फैक्टर्स हो सकते हैं. इसके अलावा, मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और फिजिकल एक्टिविटी के कारण भी पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो रहा है, जो घटते लिबिडो और संबंध बनाने में कमी का एक बड़ा कारण हो सकता है. हालांकि, हर कम टेस्टोस्टेरोन वाले व्यक्ति में कम लिबिडो हो, ऐसा जरूरी नहीं है.

मेनोपॉज के दौरान महिलाएं भी ले रहीं थेरेपी का सहारा 

गौर करने वाली बात यह है कि महिलाओं में भी टेस्टोस्टेरोन को लेकर रुचि बढ़ी है. खासकर प्री-मेनोपॉज और मेनोपॉज के दौरान महिलाएं इस थेरेपी का सहारा ले रही हैं. कुछ महिलाओं का कहना है कि एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के साथ टेस्टोस्टेरोन लेने से उनकी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आया है. हालांकि एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि महिलाओं के लिए टेस्टोस्टेरोन थेरेपी आमतौर पर तभी सुझाई जाती है, जब अन्य ट्रीटमेंट कारगर न हों. महिलाओं में बिना जरूरत इस थेरेपी से कई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं. इससे चेहरे या शरीर पर ज्यादा बाल, मुंहासे, वजन बढ़ना या आवाज में बदलाव हो सकता है. पुरुषों में भी वजन बढ़ना, मूड स्विंग, गंजापन, लंबे समय तक दर्दनाक इरेक्शन और शुक्राणु उत्पादन में कमी जैसी दिक्कतें आ सकती हैं.

टेस्टोस्टेरोन पर क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉक्टर्स की मानें तो पुरुषों में 30-40 की उम्र के बाद टेस्टोस्टेरोन हर साल लगभग 1% घटता है, जो सामान्य उम्र बढ़ने की प्रक्रिया है. हर व्यक्ति को टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की जरूरत नहीं होती है. जिन पुरुषों में इसका स्तर बहुत कम जैसे 6 से 8 nmol/L से नीचे हो और स्पष्ट लक्षण दिखें, उन्हें मेडिकल मॉनिटरिंग में यह थेरेपी दी जा सकती है. महिलाओं के मामले में स्थिति और जटिल है, क्योंकि उनके मामले में ज्यादा सावधानी की जरूरत है. इसलिए बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के हार्मोन लेना खतरनाक हो सकता है. केवल हार्मोन लेने से सब कुछ ठीक हो जाएगा, यह सोच गलत हो सकती है. अगर किसी को लिबिडो में कमी महसूस हो रही है, तो फुल बॉडी चेकअप करवाना चाहिए और लाइफस्टाइल सुधारनी चाहिए.

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Last Updated: February 16, 2026 17:21:09 IST

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