What is the Frog Poison Epibatidine: हाल ही में एलेक्सी नवलनी की मृत्यु के संदर्भ में एपाइबेटिडाइन (Epibatidine) के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा की जा रही है. दरअसल, यह एक एल्कलॉइड है जो मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिकी मेंढक इपेपिडोबेट्स ट्राइकलर की त्वचा में पाया जाता है. तो वहीं, दूसरी तरफ इस खास रूप से से दर्द निवारक (Pain Reliver) के रूप में भी अध्ययन किया गया था, हालांकि, इसकी विष इसे दुनिया के सबसे खतरनाक पदार्थों में से एक बनाने का काम करती है.
तो वहीं, एपाइबेटिडाइन शरीर के निकोटिनिक एसिटाइलकोलाइन रिसेप्टर्स (nAChRs) से जुड़कर काम करता है. जो सामान्य परिस्थितियों में, ये रिसेप्टर्स दिमाग और मांसपेशियों के बीच संचार को पूरी तरह से नियंत्रित करते हैं. इसके अलावा जब एपाइबेटिडाइन इन रिसेप्टर्स से चिपक जाता है, तो यह उन्हें स्थायी रूप से “ऑन” कर देता है. ऐसा करने से मांसपेशियों में ऐंठन और आखिरी में हृदय गति रुकने से मृत्यु हो जाती है.
आखिर क्यों होता है इतना ज्यादा घातक?
जानकारी के मुताबिक, इसकी घातकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह मॉर्फिन की तुलना में लगभग 200 गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है. और यह रक्त-मस्तिष्क बाधा (Blood-brain barrier) को बड़ी आसानी से पार कर लेता है, जिससे यह सीधे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है. एपाइबेटिडाइन की एक छोटी सी खुराक भी एक मनुष्य को मारने के लिए काफी होती है.
वैज्ञानिकों की दृष्टि में क्यों बताया गया सबसे बड़ा खतरा?
हालांकि, वैज्ञानिक इसे सबसे खतरनाक प्राकृतिक न्यूरोटॉक्सिन में से एक मानते हैं क्योंकि इसका कोई ज्ञात विशिष्ट मारक (Antidote) नहीं है. तो वहीं, दूसरी तरफ इसकी कार्यप्रणाली इतनी तीव्र है कि उपचार के लिए समय बहुत कम मिलता है.
इसके अलावा, इसकी रासायनिक संरचना इसे प्रयोगशाला में संश्लेषित करना आसान बनाती है, जिससे इसके दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है. इतना ही नहीं, चिकित्सा विज्ञान में इसकी क्षमता को ‘दोधारी तलवार’ माना जाता है, जहां यह पुराने दर्द के इलाज में क्रांतिकारी हो सकता था, वहीं इसकी संकरी सुरक्षा सीमा (Safety margin) इसे एक घातक जैविक हथियार की श्रेणी में लाकर खड़ा कर देती है.