Right age to start gym: ये सच है कि, समय के साथ लोगों की प्रवृत्ति में भी बदलाव आता है. उनकी लाइफस्टाइल, खानपान, रहन-सहन और हर चीज का तौर तरीका बदल जाता है. ठीक इसी तरह आज की जनरेशन (Gen Z) के साथ है. आज कम उम्र से ही लोगों में बॉडी बनाने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है. टीनएजर लड़के सिक्स पैक, एब्स, मसल्स, और बॉडी बनाने के लिए ये घंटों-घंटों जिम में पसीना बहा रहे हैं. वहीं, टीनएजर लड़कियां जीरो फिगर और स्लिम लुक पाने के लिए जिम शुरू करती हैं. लेकिन, हेल्थ एक्सपर्ट इस उम्र को जिम के लिए सही नहीं मानते हैं. वे कहते हैं कि, टीनएज में एक्सरसाइज तक तो ठीक है, लेकिन इस उम्र में जिम जाना खतरनाक हो सकता है. ऐसे में जानना जरूरी है कि आखिर, जिम जाने की सही उम्र क्या है? कम उम्र में जिम शुरू करने के नुकसान क्या हैं? कम उम्र में जिम शुरू करने पर क्या रखें सावधानियां? इस बारे में बता रहे हैं गुरु तेग बहादुर मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल दिल्ली के डायरेक्टर प्रोफेसर एवं यूनिट हेड मेडिसिन डॉ. अमितेश अग्रवाल-
जिम नहीं, खेलने-कूदने लिए होता है बचपन
डॉ. अमितेश अग्रवाल कहते हैं कि, ये सही कि शरीरिक विकास के लिए एक्सरसाइज बहुत जरूरी होती है. इसके लिए जन्म से ही बच्चा हाथ-पैर मारना शुरू कर देता है. ऐसा करने से बच्चे का शरीर विकसित होता है, साथ ही बॉडी में लचीलापन और मजबूती आने लगती है. इसके बाद टीनएजर में खेलना-कूदना चाहिए, ताकि हड्डियों में मजबूती आए. लेकिन जिम जाने से बचना चाहिए. क्योंकि खेलने-कूदने से जहां शरीर का विकास होगा. वहीं, जिम जाने से हेल्थ इशूज हो सकते हैं.
किस उम्र में शुरू कर सकते हैं जिम?
डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, टीनएजर को जिम भेजना मतलब सेहत के साथ खिलवाड़ करना है. ऐसे में पैरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना होगा. इस उम्र में शरीर का विकास हो रहा होता है. हड्डियों में मजबूती बढ़ रही होती है. अगर ऐसे में जिम करेंगे तो ग्रोथ रुक सकती है. बेशक 13-14 साल की उम्र में हड्डियां और शरीर के अंग मजबूत हो जाते हों, लेकिन जिम ज्वाइन करने की यह उम्र भी सही नहीं है. ऐसे में जिम भेजने की सही उम्र 20 साल के बाद से लेकर 50 साल तक होती है. हालांकि, आप चाहें तो 17-18 की उम्र में भी जिम ज्वाइन कर सकते हैं. लेकिन, समय और वजन का विशेष ध्यान रखें.
कम उम्र में जिम करने से बॉडी को होते हैं ये नुकसान
- कम ऐज में जिम करने से मांसपेशियों को नुकसान पहुंचता है साथ ही उन्हें इंजरी भी हो सकती है.
- जल्दी बॉडी बनाने के चलते स्टीरॉइड्स या हेवी वर्कआउट करने से हड्डियों में कमजोरी आती है.
- मसल्स पेन या फिर स्ट्रेन होने के साथ-साथ मांसपेशियों में कमजोरी का भी खतरा बढ़ जाता है.
- जिम में कार्डियो या फिर पावर लिफ्टिंग करने से हार्ट बीट बढ़ने और हार्ट डैमेज का खतरा रहता है.