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Trauma Bond: रिलेशनशिप में ट्रॉमा बॉन्ड क्या… जो अपनों के बीच घोल देता विष, जनिए इसका रिश्तों पर खतरनाक प्रभाव

Trauma Bond in a Relationship: रिश्ते बनाना और रिश्ते निभाना दोनों एक दूसरे के पूरक हैं. हालांकि, आजकल इन दोनों का सामंजस्य बैठाना मुश्किल हो गया है. इस तरह के अनहेल्दी रिलेशनशिप को कई नाम दिए गए हैं. ऐसा ही एक नाम है ट्रॉमा बॉन्ड. जी हां, यह अनहेल्दी रिलेशनशिप तब विकसित होता है, जब कोई व्यक्ति दर्द, मानसिक उत्पीड़न, दुर्व्यवहार से भरे रिश्ते में फंस कर रह जाता है.

Trauma Bond in a Relationship: रिश्ते बनाना और रिश्ते निभाना दोनों एक दूसरे के पूरक हैं. हालांकि, आजकल इन दोनों का सामंजस्य बैठाना मुश्किल हो गया है. क्योंकि, रिश्ते बनाने में जितनी कठिनाई नहीं आती है, उससे अधिक परेशानी रिश्तों को निभाने में आती है. इस तरह के अनहेल्दी रिलेशनशिप को कई नाम दिए गए हैं. ऐसा ही एक नाम है ट्रॉमा बॉन्ड. जी हां, यह अनहेल्दी रिलेशनशिप तब विकसित होता है, जब कोई व्यक्ति दर्द, मानसिक उत्पीड़न, दुर्व्यवहार से भरे रिश्ते में फंस कर रह जाता है. वैसे तो यह अनहेल्दी रिलेशनशिप किसी भी संबंध में जन्म ले सकती है, लेकिन पार्टनर के साथ ज्यादा देखने को मिलता है. 

कई बार पारिवारिक सदस्यों के बीच भी ऐसी समस्याएं होती हैं. हालांकि, ये उन लोगों के बीच भी हो सकता है, जिनका आपस में कोई संबंध नहीं होता है. ट्रॉमा बॉन्ड तब बनते हैं जब एक व्यक्ति लगातार दूसरे को चोट पहुंचाता है. लेकिन, भावनात्मक लगाव के कारण पीड़ित व्यक्ति चोट पहुंचाने वाले को छोड़ नहीं पाता है. अब सवाल है कि आखिर, ट्रॉमा बॉन्ड क्या है? ट्रॉमा बॉन्ड के लक्षण क्या हैं? आइए जानते हैं इस बारे में-

क्या है ट्रॉमा बॉन्ड

onlymyhealth की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रामा बॉन्ड आमतौर पर खतरनाक होते हैं क्योंकि वे इस स्थिति से गुजर रहे लोगों को वास्तविकता को स्पष्ट रूप से देखने और इसे समझने से रोकते हैं. क्योंकि, वे उनके साथ अपने दर्द को भूलकर रहना चाहते हैं. एक ट्रॉमा बॉन्ड के संकेतों को पहचानना जीवन में आगे बढ़ने के लिए बेहद जरूरी है. 

ट्रॉमा बॉन्ड के लक्षण क्या हैं?

पार्टनर की जरूरत से ज्यादा याद: पारिवारिक सदस्य या फिर अपने पार्टनर के आस-पास नहीं होने पर उनकी जरूरत से ज्यादा याद आना, उन पर निर्भर हो जाना या फिर जरूरत से ज्यादा लगाव किसी भी संबंध के लिए हानिकारक है. क्योंकि, ये आपको अन्य लोगों से संबंध बनाने से रोकता है.

गलत व्यवहार की अनदेखी: ट्रॉमा बॉन्ड में फंसे लोग समस्या की गंभीरता को समझने और इसके खिलाफ आवाज उठाने के बजाय अपने पार्टनर या पारिवारिक सदस्य के गलत व्यवहारों को अनदेखा करते हैं और उनके लिए बहाने बनाते हैं. जिससे गलत व्यवहार करने वाले को और ताकत मिलती है.

आत्म-सम्मान में कमी: पीड़ित अक्सर ट्रॉमा बॉन्ड में बने रहते हैं क्योंकि उन्हें विश्वास होने लगता है कि वे दुर्व्यवहार के लायक हैं या फिर उन्हें नहीं लगता कि वे इससे अच्छे के लायक नहीं है. कम आत्मसम्मान लोगों को उन रिश्तों में फंसाए रखता है जहां उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता.

बदले का डर: ट्रॉमा बॉन्ड के शिकार लोग नतीजों से डरने लगते हैं. उन्हें लगता है कि अगर वह दुर्व्यवहार करने वाले के खिलाफ बोलेंगे तो वह उनसे इसका बदला ले सकते हैं या फिर उनके रिश्ते में समस्या बढ़ सकती है. हालांकि, चुप रहना समस्या को और बढ़ा सकती है.

पार्टनर बदलाव का वादा: दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने पर आपका साथी आपसे वादा करता है कि वह अपने व्यवहार में बदलाव लाएगा. लेकिन, बार-बार वह इसे दोहराता है और आप बार-बार उसे मौके देते हैं. जिसकी वजह है, उम्मीद का बने रहना. हालांकि, इससे स्थिति बदतर होती जाती है.

Lalit Kumar

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Lalit Kumar

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