Causes of Nerve Damage: हमारा नसों का सिस्टम पूरे शरीर को कंट्रोल करता है. यह मूड से लेकर शरीर की हर गतिविधि तक को नियंत्रित करता है. अगर नसों में कोई बदलाव आता है, तो यह पूरे शरीर की क्षमता को प्रभावित कर सकता है.नसों की कमजोरी का पता लगाना आसान नहीं होता क्योंकि इसके कई कारण हो सकते हैं-जैसे उम्र, तनाव, या संक्रमण.
दुनिया में लगभग 2.4% लोग किसी न किसी प्रकार की परिफेरल न्यूरोपैथी या नसों की कमजोरी से प्रभावित हैं. यह थकान, दर्द या ऐंठन जैसी परेशानियाँ पैदा कर सकती है.
नसों की कमजोरी क्या है?
मायो क्लिनिक (mayoclinic) की रिपोर्ट के अनुसार परिफेरल न्यूरोपैथी या नसों की कमजोरी वह स्थिति है जिसमें दिमाग या रीढ़ की हड्डी के बाहर की नसें प्रभावित होती हैं. इसके कारणों में चोट, संक्रमण, वंशानुगत स्थिति हो सकता है. सबसे आम कारण ‘मधुमेह’ यानी शुगर है. मधुमेह के लगभग 70% मरीजों को नसों की समस्या होती है.
नसों की कमजोरी के कारण
- गुर्दे की कोई पुरानी बीमारी
- संक्रमण जैसे HIV/AIDS, शिंगल्स, हेपेटाइटिस C
- विटामिन की कमी (B1, B6, B12)
- मधुमेह और अन्य मेटाबॉलिक रोग
- थायरॉइड की कमजोरी
- हड्डी के मज्जा की समस्याएं
- पैरों में खराब ब्लड सर्कुलेशन
इसके अलावा चोट, सर्जरी, शराब का अधिक सेवन, कुछ दवाइयां लंबे समय तक ठंडे में रहना या नर्व पर दबाव जैसे कारण भी नसों को कमजोर कर सकते हैं.
किन लोगों को अधिक प्रभावित करता है?
नसों की कमजोरी आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ अधिक होती है. हालांकि यह किसी भी उम्र, लिंग, या जाति के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है, फिर भी उम्र बढ़ने और कुछ स्वास्थ्य स्थितियों के कारण खतरा अधिक होता है.
नसों की कमजोरी के लक्षण
- शरीर के हिस्सों को हिलाने में कठिनाई, पैरों में दर्द
- झुनझुनी, जलन, सुन्नपन
नसों की कमजोरी के बचने के लिए क्या करें
- शुगर कंट्रोल रखें
- संतुलित आहार लें
- व्यायाम करें और वजन कंट्रोल रखें
- शराब और धूम्रपान से बचें
- नियमित जांच कराएं
अगर आपको नसों में कमजोरी, झुनझुनी या सुन्नपन महसूस हो, तो जल्दी डॉक्टर से सलाह लें. समय पर इलाज और सावधानी से समस्या बढ़ने से रोकी जा सकती है.