Stretching Benefits: अक्सर लोग मानते हैं कि स्ट्रेचिंग सिर्फ खिलाड़ियों या मैराथन की तैयारी करने वालों के लिए होती है. लेकिन सच यह है कि स्ट्रेचिंग हर किसी के लिए जरूरी है. चाहे आप जिम जाते हों, दौड़ लगाते हों या सामान्य दिनचर्या निभाते हों, शरीर को लचीला बनाए रखने के लिए हफ्ते में कई बार स्ट्रेचिंग करना फायदेमंद होता है.
हमारे शरीर में 600 से ज्यादा मांसपेशियां होती हैं. अगर इन्हें नियमित रूप से नहीं खींचा जाए तो ये धीरे-धीरे सख्त होने लगती हैं. मांसपेशियों में जकड़न आने से जोड़ों की गति कम हो सकती है, दर्द हो सकता है और चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है. स्ट्रेचिंग मांसपेशियों और आसपास के ऊतकों पर असर डालती है, जिससे जोड़ों को बिना दबाव के आसानी से हिलने-डुलने में मदद मिलती है.स्ट्रेचिंग करते समय हल्का खिंचाव महसूस होना सामान्य है, लेकिन दर्द नहीं होना चाहिए. अगर दर्द हो तो स्ट्रेच को तुरंत रोक देना चाहिए.
किन हिस्सों पर ध्यान देना चाहिए
रोजाना कुछ मिनट निकालकर शरीर के बड़े मांसपेशी समूहों पर ध्यान देना चाहिए. ऊपरी शरीर में गर्दन, कंधे और पीठ को स्ट्रेच करना जरूरी है. वहीं निचले हिस्से में हिप फ्लेक्सर, हैमस्ट्रिंग, जांघों के सामने का भाग और पिंडलियों पर काम करना फायदेमंद रहता है.
स्ट्रेचिंग के प्रकार
स्ट्रेचिंग मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है – डायनेमिक और स्टैटिक.
- डायनेमिक स्ट्रेचिंग में शरीर को लगातार हल्की गति में रखते हुए मांसपेशियों को खींचा जाता है. यह वर्कआउट से पहले करने के लिए सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है क्योंकि इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और शरीर गतिविधि के लिए तैयार हो जाता है. इससे चोट लगने का खतरा भी कम होता है.
- स्टैटिक स्ट्रेचिंग में किसी एक स्थिति को कुछ सेकंड तक पकड़े रखा जाता है, आमतौर पर 15 से 30 सेकंड तक. यह वर्कआउट के बाद करना ज्यादा लाभकारी माना जाता है क्योंकि इससे मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और लचीलापन समय के साथ बेहतर होता है.
स्ट्रेचिंग के अन्य फायदे
नियमित स्ट्रेचिंग से शरीर की लचक बढ़ती है, थकान कम होती है और मांसपेशियों की रिकवरी बेहतर होती है. अगर स्ट्रेचिंग नहीं की जाए तो मांसपेशियां कमजोर और तनाव के प्रति कम सहनशील हो सकती हैं. हालांकि जरूरत से ज्यादा स्ट्रेचिंग भी ठीक नहीं है, क्योंकि इससे मांसपेशियों में थकान हो सकती है.
शुरू करने से पहले क्या ध्यान रखें
किसी नई एक्सरसाइज या स्ट्रेचिंग रूटीन की शुरुआत करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है. अपने शरीर की सुनें, दर्द होने पर रुकें, धीरे-धीरे सांस लें और जल्दबाजी न करें. अगर कोई पुरानी चोट या स्वास्थ्य समस्या है तो फिजिकल थेरेपिस्ट की सलाह से ही स्ट्रेचिंग करें.नियमित और सही तरीके से की गई स्ट्रेचिंग आपके कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग रूटीन को और प्रभावी बना सकती है. छोटी सी आदत, लेकिन लंबे समय तक बड़े फायदे.