World Cancer Day 2026: पूरी दुनिया में हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य कैंसर से बचाव और उसके प्रति जागरूकता पैदा करना है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य कैंसर से बचाव और उसके प्रति जागरूकता पैदा करना है. सीनियर पेन कंसल्टेंट डॉ. भुवना आहुजा कहती हैं कि, कैंसर दर्द को पीड़ित ही बेहद अच्छे तरीके से जान सकता है. आइए जानते हैं इस दर्द के कारण और उपचार-
विश्व कैंसर दिवस पर जानिए, क्यों होता है कैंसर का दर्द और कैसे पाएं निजात. (Canva)
World Cancer Day 2026: पूरी दुनिया में हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य कैंसर से बचाव और उसके प्रति जागरूकता पैदा करना है. दरअसल, कई लोग यह समझते हैं कि कैंसर की बीमारी छूने से फैलती है, जिससे लोग इससे पीड़ितों से ठीक व्यवहार नहीं करते हैं. यही वजह है कि कैंसर के संबंध में फैली गलत धारणाओं को कम करने और कैंसर मरीजों को मोटीवेट करने के लिए इस दिन को मनाया जाता है. बता दें कि, कैंसर दिवस की शुरुआत साल 1933 में हुई थी. सबसे पहले विश्व कैंसर दिवस वर्ष 1993 में जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल के द्वारा मनाया गया था. विश्व कैंसर दिवस 2026 की थीम है ‘यूनाइटेड बाय यूनिक’ (United by Unique). इसका मतलब है कि कैंसर से लड़ने का लक्ष्य सभी का एक है, लेकिन हर मरीज की कहानी और अनुभव अलग-अलग होते हैं. बता दें कि, अभियान का पहला वर्ष दुनिया भर में कैंसर देखभाल में असमानताओं को समझने और पहचानने के बारे में था.
एलएनजेपी हॉस्पिटल दिल्ली की सीनियर पेन कंसल्टेंट डॉ. भुवना आहुजा कहती हैं कि, कैंसर बेहद गंभीर बीमारी है. इस दौरान होने वाले दर्द को पीड़ित ही बेहद अच्छे तरीके से जान सकता है. ऐसे में सवाल होता है कि आखिर कैंसर दर्द होता क्यों हैं? इसपर डॉक्टर बताती हैं कि, कैंसर दर्द का दर्द ट्यूमर द्वारा नसों, हड्डियों या अंगों पर दबाव डालने के कारण होता है. इस तरह का दर्द गंभीर और पुराना हो सकता है. पीड़ित को यह जलन, चुभन या ऐंठन जैसा महसूस हो सकता है. इस तरह का दर्द 30-75 प्रतिशत मरीजों को प्रभावित करता है.
ट्यूमर का दबाव: डॉक्टर कहती हैं कि, कैंसर के आसपास की नसों, हड्डियों या अंगों पर अधिक दबाव पड़ता है. इसके चलते दर्द बढ़ जाता है.
उपचार के दुष्प्रभाव: कैंसर में दर्द का दूसरा बड़ा कारण कीमोथेरेपी, रेडिएशन या सर्जरी है. इस स्थिति के बाद भी दर्द बढ़ जाता है.
ब्रेकथ्रू पेन: डॉक्टर कहती हैं कि, यह वह तेज दर्द होता है, जो नियमित दवाओं के बावजूद अचानक उभर आता है. ये स्थिति बेहद दुखद है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कैंसर दर्द के लिए एक ‘पेन लैडर’ (Pain Ladder) निर्धारित की है. इसमें दर्द को तीन स्टेप में लिया है. पहला हल्का, दूसरा मध्यम और तीसरा गंभीर दर्द. सभी के लिए अलग-अलग दवाएं हैं. लेकिन, जब दवाएं पर्याप्त नहीं होतीं, तो विशेषज्ञ कुछ अन्य तकनीकों का उपयोग करते हैं. इसमें सबसे पहले दर्द के संकेतों को मस्तिष्क तक पहुंचने से रोकने के लिए नसों में इंजेक्शन लगाते हैं. एक एपिड्यूरल इंजेक्शन होता है, जिसके जरिए रीढ़ की हड्डी के पास दवा पहुंचाई जाती है. इसके अलावा, रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन होता है, जिसकी गर्मी के जरिए दर्द पैदा करने वाली नसों को सुन्न करना होता है.
एक्सपर्ट कहते हैं कि, दवाओं के अलावा, जीवनशैली में बदलाव और वैकल्पिक चिकित्सा भी कैंसर दर्द से राहत दे सकती है. तनाव और अवसाद को दूर रखें. क्योंकि, मानसिक स्थिति दर्द की अनुभूति को प्रभावित करती है. इसके अलावा योग करें. इससे मन को शांत रखने और सहनशक्ति बढ़ाने में मदद मिलेगी.
1. दवा का समय: दर्द निवारक दवाएं डॉक्टर द्वारा बताए गए समय पर ही लें, दर्द बढ़ने का इंतजार न करें.
2. दुष्प्रभावों पर ध्यान: ओपिओइड दवाओं से कब्ज या सुस्ती हो सकती है, इसके बारे में डॉक्टर को बताएं.
3. दर्द डायरी: अपने दर्द के स्तर (0-10 के पैमाने पर) को नोट करें ताकि डॉक्टर उपचार में बदलाव कर सकें.
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