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World Obesity Day 2026: मोटापा बढ़ा तो घटेगी जिंदगी..! 100 से ज्यादा बीमारियों की है जड़, इन बीमारियों का जोखिम अधिक

World Obesity Day 2026: दुनियाभर में 4 मार्च को वर्ल्ड ओबेसिटी डे मनाया जाता है. इसका उद्देश्य लोगों में मोटापे की समस्या से निपटने के लिए जागरूकता बढ़ाना है. क्योंकि, आजकल मोटापा एक गंभीर समस्या बनकर उभरा है. हजारों-लाखों नहीं, करोड़ों की तादाद में लोग इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मोटापा हमारे शरीर के अंगों के कामकाज की क्षमता को धीरे-धीरे कम कर देता है. अब सवाल है कि मोटापे से जिंदगी कम क्यों होती है? इस बारे में बता रही हैं सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा पाठक-

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: March 3, 2026 18:00:00 IST

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World Obesity Day 2026: दुनियाभर में 4 मार्च को वर्ल्ड ओबेसिटी डे मनाया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य लोगों में मोटापे की समस्या से निपटने के लिए जागरूकता बढ़ाना है. क्योंकि, आजकल मोटापा एक गंभीर समस्या बनकर उभरा है. हजारों-लाखों नहीं, करोड़ों की तादाद में लोग इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मोटापा शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर देने वाली सैकड़ों बीमारियों की जड़ है. आपको जानकर हैरानी होगी कि, मोटापा की वजह जिंदगी कम हो सकती है. दरअसल, मोटापा हमारे शरीर के अंगों के कामकाज की क्षमता को धीरे-धीरे कम कर देता है. जब तक इसके स्पष्ट लक्षण सामने आते हैं, तब तक शरीर को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है. अगर समय रहते वजन कंट्रोल न किया गया तो कई बीमारियों की वजह बन सकता है. अब सवाल है कि आखिर मोटापे से जिंदगी कम क्यों होती है? मोटापे से किन गंभीर बीमारियों का खतरा? किन कारणों से बढ़ता है मोटापा? इस बारे में India News को बता रही हैं नोएडा की सीनियर मेडिकल ऑफिसर एवं गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा पाठक-

मोटापे से किन बीमारियों का खतरा

डॉ. मीरा पाठक कहती हैं कि, मोटापा असल में सिर्फ शरीर के बनावट की गड़बड़ी की समस्या नहीं है, ये कई तरह की क्रॉनिक और जानलेवा बीमारियों की जड़ भी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट कहती है कि, दुनियाभर में मोटापे की दर पिछले कुछ दशकों में लगभग तीन गुना बढ़ी है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. भारत में बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक सभी में मोटापे का संकट देखा जा रहा है. मोटापे के कारण होने वाली क्रॉनिक बीमारियों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर साल-दर-साल अतिरिक्त दबाव भी बढ़ता जा रहा है, जो काफी चिंताजनक स्थिति है. भारत में इन बीमारियों को बेहद गंभीर श्रेणी में रखा गया है.

क्यों बढ़ता है मोटापा

डॉक्टर कहते हैं कि, पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी शरीर के भीतर एक साइलेंट किलर की तरह काम करती है. यह चर्बी इंसुलिन की प्रक्रिया को बाधित करती है, जिससे व्यक्ति धीरे-धीरे डायबिटीज की चपेट में आ जाता है. इतना ही नहीं, बढ़ा हुआ वजन दिल की नसों पर भारी दबाव डालता है, जो बिना किसी चेतावनी के हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बन सकता है. इसके अलावा लिवर में चर्बी का जमा होना और शरीर में बनी रहने वाली सूजन किडनी और जोड़ों को बुरी तरह प्रभावित करती है, जिससे पूरा शरीर बीमारियों का घर बन जाता है. कई तरह के कैंसर का खतरा भी मोटापे से बढ़ सकता है.

मोटापा घटाने में दवा कितनी कारगर

डॉक्टर कहते हैं कि, रातोंरात वजन कम करने के चक्कर में बिना विशेषज्ञ की सलाह के इंजेक्शन लेना या अत्यधिक कम कैलोरी वाली क्रैश डाइट अपनाना घातक हो सकता है. ऐसी कोशिशें शरीर में पानी और नमक का संतुलन बिगाड़ देती हैं, जिससे दिल की धड़कन अनियमित होना, मांसपेशियों में कमजोरी और पाचन तंत्र की खराबी जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. ऐसी कोशिशें जोखिम भरी हो सकती हैं. हाल में कई लोग जान तक गवां चुके हैं. इसलिए एक्सपर्ट की सलाह से कुछ भी लेना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

प्रेग्नेंसी में भी बाधा बन रहा मोटापा

डॉ. मीरा पाठक कहती हैं कि, अनियमित माहवारी और गर्भधारण में देरी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. इसके पीछे का मुख्य कारण बढ़ा हुआ वजन ही है. पीसीओएस से जूझ रही लगभग 70-80% महिलाएं मोटापे का शिकार हैं. तनाव, देर रात तक जागना और बाहर का खान-पान इस समस्या को और गंभीर बना रहा है. चिंता की बात यह है कि जो समस्याएं पहले परिपक्व उम्र में दिखती थीं, वे अब 16 से 20 साल की कम उम्र की लड़कियों में भी तेजी से देखी जा रही हैं. अच्छी बात यह है कि अगर समय रहते वजन को संतुलित कर लिया जाए, तो रिप्रोडक्टिव हेल्थ से जुड़ी समस्याओं और लाइफस्टाइल से जुड़ी अन्य बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है.

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Last Updated: March 3, 2026 18:00:00 IST

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World Obesity Day 2026: दुनियाभर में 4 मार्च को वर्ल्ड ओबेसिटी डे मनाया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य लोगों में मोटापे की समस्या से निपटने के लिए जागरूकता बढ़ाना है. क्योंकि, आजकल मोटापा एक गंभीर समस्या बनकर उभरा है. हजारों-लाखों नहीं, करोड़ों की तादाद में लोग इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मोटापा शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर देने वाली सैकड़ों बीमारियों की जड़ है. आपको जानकर हैरानी होगी कि, मोटापा की वजह जिंदगी कम हो सकती है. दरअसल, मोटापा हमारे शरीर के अंगों के कामकाज की क्षमता को धीरे-धीरे कम कर देता है. जब तक इसके स्पष्ट लक्षण सामने आते हैं, तब तक शरीर को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है. अगर समय रहते वजन कंट्रोल न किया गया तो कई बीमारियों की वजह बन सकता है. अब सवाल है कि आखिर मोटापे से जिंदगी कम क्यों होती है? मोटापे से किन गंभीर बीमारियों का खतरा? किन कारणों से बढ़ता है मोटापा? इस बारे में India News को बता रही हैं नोएडा की सीनियर मेडिकल ऑफिसर एवं गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा पाठक-

मोटापे से किन बीमारियों का खतरा

डॉ. मीरा पाठक कहती हैं कि, मोटापा असल में सिर्फ शरीर के बनावट की गड़बड़ी की समस्या नहीं है, ये कई तरह की क्रॉनिक और जानलेवा बीमारियों की जड़ भी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट कहती है कि, दुनियाभर में मोटापे की दर पिछले कुछ दशकों में लगभग तीन गुना बढ़ी है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. भारत में बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक सभी में मोटापे का संकट देखा जा रहा है. मोटापे के कारण होने वाली क्रॉनिक बीमारियों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर साल-दर-साल अतिरिक्त दबाव भी बढ़ता जा रहा है, जो काफी चिंताजनक स्थिति है. भारत में इन बीमारियों को बेहद गंभीर श्रेणी में रखा गया है.

क्यों बढ़ता है मोटापा

डॉक्टर कहते हैं कि, पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी शरीर के भीतर एक साइलेंट किलर की तरह काम करती है. यह चर्बी इंसुलिन की प्रक्रिया को बाधित करती है, जिससे व्यक्ति धीरे-धीरे डायबिटीज की चपेट में आ जाता है. इतना ही नहीं, बढ़ा हुआ वजन दिल की नसों पर भारी दबाव डालता है, जो बिना किसी चेतावनी के हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बन सकता है. इसके अलावा लिवर में चर्बी का जमा होना और शरीर में बनी रहने वाली सूजन किडनी और जोड़ों को बुरी तरह प्रभावित करती है, जिससे पूरा शरीर बीमारियों का घर बन जाता है. कई तरह के कैंसर का खतरा भी मोटापे से बढ़ सकता है.

मोटापा घटाने में दवा कितनी कारगर

डॉक्टर कहते हैं कि, रातोंरात वजन कम करने के चक्कर में बिना विशेषज्ञ की सलाह के इंजेक्शन लेना या अत्यधिक कम कैलोरी वाली क्रैश डाइट अपनाना घातक हो सकता है. ऐसी कोशिशें शरीर में पानी और नमक का संतुलन बिगाड़ देती हैं, जिससे दिल की धड़कन अनियमित होना, मांसपेशियों में कमजोरी और पाचन तंत्र की खराबी जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. ऐसी कोशिशें जोखिम भरी हो सकती हैं. हाल में कई लोग जान तक गवां चुके हैं. इसलिए एक्सपर्ट की सलाह से कुछ भी लेना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

प्रेग्नेंसी में भी बाधा बन रहा मोटापा

डॉ. मीरा पाठक कहती हैं कि, अनियमित माहवारी और गर्भधारण में देरी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. इसके पीछे का मुख्य कारण बढ़ा हुआ वजन ही है. पीसीओएस से जूझ रही लगभग 70-80% महिलाएं मोटापे का शिकार हैं. तनाव, देर रात तक जागना और बाहर का खान-पान इस समस्या को और गंभीर बना रहा है. चिंता की बात यह है कि जो समस्याएं पहले परिपक्व उम्र में दिखती थीं, वे अब 16 से 20 साल की कम उम्र की लड़कियों में भी तेजी से देखी जा रही हैं. अच्छी बात यह है कि अगर समय रहते वजन को संतुलित कर लिया जाए, तो रिप्रोडक्टिव हेल्थ से जुड़ी समस्याओं और लाइफस्टाइल से जुड़ी अन्य बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है.

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