विश्व क्षय रोग दिवस हर वर्ष 24 मार्च को मनाया जाता है. यह दिन क्षय रोग (टीबी) के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में जागरूकता फैलाने और रोकथाम के प्रयासों को मजबूत करने का प्रतीक है.
वर्ष 1882 में इसी दिन रॉबर्ट कोच ने टीबी पैदा करने वाले जीवाणु की खोज की थी, जो चिकित्सा विज्ञान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी. रोकथाम और इलाज संभव होने के बावजूद, टीबी आज भी विश्व स्तर पर लाखों लोगों को प्रभावित कर रही है.
विश्व क्षय रोग दिवस 2026 की थीम
विश्व क्षय रोग दिवस 2026 की थीम है “Yes! We Can End TB: Led by Countries, Powered by People!”. यह थीम विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा निर्धारित की गई है. यह थीम देशों के नेतृत्व और जन भागीदारी पर जोर देती है, जो टीबी उन्मूलन के लिए आवश्यक है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह संदेश आशा का प्रतीक है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, नवाचार और बहु-क्षेत्रीय सहयोग से टीबी को समाप्त किया जा सकता है. दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र, जिसमें भारत शामिल है, वैश्विक टीबी बोझ का लगभग 34% वहन करता है.
तपेदिक के बारे में
तपेदिक (टीबी) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु से होने वाला एक संक्रामक रोग है जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है. यह हवा के माध्यम से फैलता है और उचित एवं समय पर उपचार से इसे रोका और ठीक किया जा सकता है. टीबी संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने, बोलने या हंसने पर हवा में मौजूद बूंदों के माध्यम से फैलता है. बता दें कि संक्रमित व्यक्ति के साथ निकट रूप से रहने या काम करने वाले लोगों को टीबी होने का खतरा अधिक होता है. एचआईवी, मधुमेह या कुपोषण से पीड़ित व्यक्तियों जैसी कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं. सुप्त टीबी में, बैक्टीरिया बिना लक्षणों के निष्क्रिय रहते हैं, जबकि सक्रिय टीबी में, रोग लक्षणयुक्त और संक्रामक हो जाता है.
टीबी की वैश्विक स्थिति
2024 में दक्षिण-पूर्व एशिया में अनुमानित 36.8 लाख लोग टीबी से प्रभावित हुए और 4.33 लाख मौतें हुईं, जिनमें 13,000 एचआईवी रोगी शामिल हैं. हालांकि, 2015 से इस क्षेत्र में टीबी से होने वाली मृत्यु दर में 23% की कमी आई है, जो वैश्विक औसत (12%) से बेहतर है. टीबी का उपचार कवरेज 85% से अधिक हो गया है, जिसमें 31 लाख से ज्यादा लोगों का उपचार हो रहा है.
भारत में टीबी की स्थिति
वैश्विक टीबी मामलों के 27% मरीज भारत में हैं. राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) प्रगति कर रहा है, लेकिन पुरानी निदान विधियां (जैसे सूक्ष्मदर्शी) और लंबे उपचार (6-24 माह) जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं.
भारत में Ni-Kshay पोर्टल और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल एकीकरण से सेवाएं मजबूत हो रही हैं. Ni-Kshay पोर्टल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो टीबी रोगियों पर नजर रखता है, उपचार की प्रगति की निगरानी करता है और स्वास्थ्य कर्मियों को समय पर देखभाल और उपचार के पालन को सुनिश्चित करने में मदद करता है. इसके अलावा निक्षय पोषण योजना टीबी रोगियों को उनकी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने और स्वास्थ्य लाभ की संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रति माह ₹1000 प्रदान करती है. साथ ही प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान व्यक्तियों, गैर सरकारी संगठनों और संस्थाओं को टीबी रोगियों को गोद लेने और पोषण और देखभाल जैसी अतिरिक्त सहायता प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करता है.