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सूरत की भाविका माहेश्वरी ने एशिया में लहराया भारत का परचम, रामायण और भारतीय दर्शन से जीता दिल

Written By: Indianews Webdesk
Last Updated: March 28, 2026 20:22:40 IST

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जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान में दिए प्रभावशाली व्याख्यान, भारतीय संस्कृति, आधुनिक जीवन मूल्यों और मोबाइल एडिक्शन पर रखे विचार

सूरत (गुजरात), मार्च 28: शहर की युवा प्रेरक वक्ता, टेडेक्स स्पीकर, लेखिका और एंटरप्रेन्योर भाविका माहेश्वरी ने जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने विचारों से भारतीय संस्कृति का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने भारतीय दर्शन, रामायण के सार्वभौमिक संदेश और मोबाइल एडिक्शन जैसे समकालीन विषयों पर प्रभावशाली प्रस्तुतियां देकर विदेशों में श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया।

हाल ही में संपन्न इस विदेश दौरे के दौरान भाविका ने इंडियन एम्बेसी, स्वामी विवेकानंद कल्चरल सेंटर और अन्य संस्थाओं के सहयोग से कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में व्याख्यान दिए। दक्षिण कोरिया के भुसान यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज में उन्होंने ” इंडियन फिलोसॉफी फॉर मॉर्डन लाइफ” विषय पर विशेष संबोधन दिया। इस दौरान प्रोफेसर सर्जन कुमार ने उनके व्याख्यान का कोरियन भाषा में अनुवाद किया। कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों और विद्वानों ने उनके विचारों की सराहना की। इस उपलब्धि को इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस (ICCR) ने भी अपने आधिकारिक मंच पर साझा किया। कार्यक्रम के दौरान चेयरमैन सून सियोल ली द्वारा भाविका का सम्मान किया गया।

भाविका

जापान में टोक्यो के पास स्थित बंदो के हिंदू मंदिर में भाविका ने ” यूनिवर्सल टीचिंग्स ऑफ रामायण” विषय पर प्रेरक प्रवचन दिया। कार्यक्रम के दौरान भारतीय संस्कृति के प्रति स्थानीय लोगों का उत्साह देखने लायक रहा। होली उत्सव में जापानी कलाकार बॉलीवुड गीतों पर थिरकते नजर आए, जिससे भारतीय परंपराओं के प्रति वहां का अपनापन झलकता दिखा।

वहीं, ताइवान की राजधानी ताइपे स्थित सबका मंदिर में उन्होंने “21वीं शताब्दी में रामायण” विषय पर व्याख्यान दिया। उनके विचारों ने वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति की प्रासंगिकता को मजबूती से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मंदिर के संस्थापक एंडी सिंह ने उन्हें भारत-ताइवान मित्रता का प्रतीक भेंट कर सम्मानित किया।

गौरतलब है कि भाविका माहेश्वरी इससे पहले यूनाइटेड किंगडम की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी हिंदू सोसाइटी में भी सबसे कम उम्र की आध्यात्मिक वक्ता के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। कम उम्र में ही वैश्विक मंचों पर भारतीय संस्कृति, नैतिकता और आधुनिक जीवन मूल्यों पर उनके प्रभावशाली वक्तृत्व ने उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई है।

भाविका अब तक इंडोनेशिया, आयरलैंड, स्कॉटलैंड और लंदन सहित देश-विदेश में 500 से अधिक कार्यक्रमों में भाग ले चुकी हैं। अपने विचारों और आध्यात्मिक दृष्टिकोण के माध्यम से उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को विश्व स्तर पर नई पहचान दी है।

भाविका की यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि सूरत, गुजरात और पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। कम उम्र में वैश्विक मंचों पर भारतीय संस्कृति का प्रभावशाली प्रतिनिधित्व कर उन्होंने यह साबित किया है कि भारत की नई पीढ़ी विश्व पटल पर अपनी मजबूत पहचान बना रही है।

(The article has been published through a syndicated feed. Except for the headline, the content has been published verbatim. Liability lies with original publisher.)

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जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान में दिए प्रभावशाली व्याख्यान, भारतीय संस्कृति, आधुनिक जीवन मूल्यों और मोबाइल एडिक्शन पर रखे विचार

सूरत (गुजरात), मार्च 28: शहर की युवा प्रेरक वक्ता, टेडेक्स स्पीकर, लेखिका और एंटरप्रेन्योर भाविका माहेश्वरी ने जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने विचारों से भारतीय संस्कृति का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने भारतीय दर्शन, रामायण के सार्वभौमिक संदेश और मोबाइल एडिक्शन जैसे समकालीन विषयों पर प्रभावशाली प्रस्तुतियां देकर विदेशों में श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया।

हाल ही में संपन्न इस विदेश दौरे के दौरान भाविका ने इंडियन एम्बेसी, स्वामी विवेकानंद कल्चरल सेंटर और अन्य संस्थाओं के सहयोग से कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में व्याख्यान दिए। दक्षिण कोरिया के भुसान यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज में उन्होंने ” इंडियन फिलोसॉफी फॉर मॉर्डन लाइफ” विषय पर विशेष संबोधन दिया। इस दौरान प्रोफेसर सर्जन कुमार ने उनके व्याख्यान का कोरियन भाषा में अनुवाद किया। कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों और विद्वानों ने उनके विचारों की सराहना की। इस उपलब्धि को इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस (ICCR) ने भी अपने आधिकारिक मंच पर साझा किया। कार्यक्रम के दौरान चेयरमैन सून सियोल ली द्वारा भाविका का सम्मान किया गया।

भाविका

जापान में टोक्यो के पास स्थित बंदो के हिंदू मंदिर में भाविका ने ” यूनिवर्सल टीचिंग्स ऑफ रामायण” विषय पर प्रेरक प्रवचन दिया। कार्यक्रम के दौरान भारतीय संस्कृति के प्रति स्थानीय लोगों का उत्साह देखने लायक रहा। होली उत्सव में जापानी कलाकार बॉलीवुड गीतों पर थिरकते नजर आए, जिससे भारतीय परंपराओं के प्रति वहां का अपनापन झलकता दिखा।

वहीं, ताइवान की राजधानी ताइपे स्थित सबका मंदिर में उन्होंने “21वीं शताब्दी में रामायण” विषय पर व्याख्यान दिया। उनके विचारों ने वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति की प्रासंगिकता को मजबूती से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मंदिर के संस्थापक एंडी सिंह ने उन्हें भारत-ताइवान मित्रता का प्रतीक भेंट कर सम्मानित किया।

गौरतलब है कि भाविका माहेश्वरी इससे पहले यूनाइटेड किंगडम की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी हिंदू सोसाइटी में भी सबसे कम उम्र की आध्यात्मिक वक्ता के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। कम उम्र में ही वैश्विक मंचों पर भारतीय संस्कृति, नैतिकता और आधुनिक जीवन मूल्यों पर उनके प्रभावशाली वक्तृत्व ने उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई है।

भाविका अब तक इंडोनेशिया, आयरलैंड, स्कॉटलैंड और लंदन सहित देश-विदेश में 500 से अधिक कार्यक्रमों में भाग ले चुकी हैं। अपने विचारों और आध्यात्मिक दृष्टिकोण के माध्यम से उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को विश्व स्तर पर नई पहचान दी है।

भाविका की यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि सूरत, गुजरात और पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। कम उम्र में वैश्विक मंचों पर भारतीय संस्कृति का प्रभावशाली प्रतिनिधित्व कर उन्होंने यह साबित किया है कि भारत की नई पीढ़ी विश्व पटल पर अपनी मजबूत पहचान बना रही है।

(The article has been published through a syndicated feed. Except for the headline, the content has been published verbatim. Liability lies with original publisher.)

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