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Video: निधन की खबर सुनते ही अस्पताल की तरफ रोते हुए दौड़े लोग, बारामती मेडिकल कॉलेज में उमड़ा जनसैलाब; जानें इस जगह से किताना गहरा था अजित पवार का रिश्ता?

Ajit Pawar Baramati Connection: अजित पवार का बारामती से गहरा नाता था. उन्होंने 1991 में अपना पहला लोकसभा चुनाव बारामती सीट से ही जीता था.

Written By: Divyanshi Singh
Last Updated: January 28, 2026 13:47:08 IST

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Ajit Pawar: महाराष्ट्र के डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजित पवार का निधन हो गया है. बुधवार सुबह बारामती में उनका प्लेन क्रैश हो गया. प्लेन में अजित पवार समेत पांच लोग सवार थे और सभी की मौत हो गई है. बताया जा रहा है कि प्लेन लैंडिंग के दौरान क्रैश हुआ. क्रैश के बाद प्लेन टुकड़ों में टूट गया और पूरी तरह जल गया.

अजित पवार की मौत से बारामती में मातम का माहौल है. उनके सपोर्टर गमगीन हैं. खबर सुनते ही अजित पवार नहीं रहे.उनके सपोर्टर हॉस्पिटल पहुंचे. एक वीडियो सामने आया है जिसमें सपोर्टर हॉस्पिटल की तरफ भागते दिख रहे हैं. खबर के बाद बारामती मेडिकल कॉलेज में सपोर्टर की भीड़ जमा हो गई. प्लेन ने सुबह 9 बजे मुंबई से उड़ान भरी थी और ठीक एक घंटे बाद बारामती में क्रैश हो गया. अजित पवार का वहां एक प्रोग्राम था.

अजित पवार और बारामती: तीन दशक का रिश्ता

  • अजित पवार का बारामती से गहरा कनेक्शन था. अजित पवार की पॉलिटिकल पहचान बारामती से जुड़ी हुई है, जिससे उन्हें इस इलाके में “दादा” (बड़े भाई) का पॉपुलर नाम मिला. उन्होंने 1991 में बारामती सीट से अपना पहला लोकसभा चुनाव जीता था. ससे बारामती के साथ उनका पॉलिटिकल जुड़ाव शुरू हुआ जो तीन दशकों से ज़्यादा चला.
  • महाराष्ट्र लेजिस्लेटिव असेंबली के अपने पहले चुनाव के बाद से, उन्होंने लगातार बारामती सीट को रिप्रेजेंट किया, लगातार आठ बार सीट जीती, सबसे हाल ही में 2024 के असेंबली चुनाव में, जो राज्य में एक रिकॉर्ड है.
  • बारामती सिर्फ़ एक चुनावी गढ़ से आगे बढ़कर उनके डेवलपमेंट मॉडल के लिए एक टेस्टिंग ग्राउंड बन गया, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई, एजुकेशन और पब्लिक इंस्टीट्यूशन में बड़े पैमाने पर इन्वेस्टमेंट किया गया.
  • उन्हें बारामती को एक “मॉडल चुनाव क्षेत्र” में बदलने का क्रेडिट दिया जाता है, जिसका अक्सर पूरे महाराष्ट्र में इसके प्लान्ड डेवलपमेंट के लिए ज़िक्र किया जाता है.
    अजित पवार का असर कोऑपरेटिव सेक्टर में, खासकर चीनी फैक्ट्रियों और ग्रामीण बैंकिंग नेटवर्क में गहरा था.
  • उन्होंने 16 साल (1991–2007) तक पुणे डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन के तौर पर काम किया, जिससे ज़मीनी स्तर पर उनका कंट्रोल और इंस्टीट्यूशनल दबदबा मज़बूत हुआ.
  • उन्होंने पिछले दो चुनाव 100,000 से ज़्यादा वोटों के अंतर से जीते हैं. 2024 के विधानसभा चुनाव में अजित पवार ने अपने ही भतीजे युगेंद्र पवार को 100000 से ज़्यादा वोटों के अंतर से हराया.

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