Ajit Pawar Death: नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने मंगलवार को 28 जनवरी को हुए एयरक्राफ्ट क्रैश में साजिश होने का आरोप लगाया, जिसमें महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार की मौत हो गई थी. उन्होंने इस घटना की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) की काबिलियत पर सवाल उठाया.
इसके अलावा उन्होंने मांग की कि नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (फ्रांस का ब्यूरो ऑफ इंक्वायरी एंड एनालिसिस फॉर सिविल एविएशन सेफ्टी) या UK की एयर एक्सीडेंट्स इन्वेस्टिगेशन ब्रांच जैसी किसी इंडिपेंडेंट थर्ड पार्टी एजेंसी से क्रैश की जांच करने को कहा जाए.
रोहित पवार ने क्या कहा?
रोहित पवार ने आगे अपनी बात रखते हुए कहा कि फ्लाइट देने वाली कंपनी की डिटेल्स, मेन पायलट की पिछली हिस्ट्री और फ्लाइट के आखिरी मिनटों में हुई बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट की स्टडी करने के बाद मेरे साथ पार्टी के कई वर्कर इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि यहां साजिश की संभावना हो सकती है, जिससे हमारे लीडर अजित पवार की मौत हो गई. इस घटना की पूरी जांच होनी चाहिए और मुझे नहीं लगता कि सीआईडी इस घटना की जांच करने के लिए काफी काबिल है, जिसके लिए थर्ड पार्टी एक्सपर्ट की ज़रूरत है.
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अजित पवार पर दिया एक घंटे का प्रेजेंटेशन
इससे पहले, दिन में पवार ने एक घंटे का प्रेजेंटेशन दिया, जिसमें 27 जनवरी से अजित पवार की गतिविधियों की जानकारी देने वाली 54 स्लाइड थीं. प्रेजेंटेशन में VSR कंपनी के अंदरूनी WhatsApp चैट के स्क्रीनशॉट भी थे, जिसके बारे में उन्होंने दावा किया कि वे क्रैश हुए एयरक्राफ्ट की मालिक कंपनी हैं, जिसमें पायलट के कथित तौर पर शराब पीने की बात कही गई थी. क्रैश के बाद यह पहली बार है जब पवार परिवार के किसी सदस्य ने सार्वजनिक रूप से अजित पवार की मौत में साजिश का आरोप लगाया है.
रोहित पवार ने की ये मांग
रोहित पवार ने VSR ग्रुप द्वारा चलाए जा रहे एयरक्राफ्ट के इस्तेमाल पर पूरी तरह से बैन लगाने की भी मांग की और राज्य सरकार द्वारा एरो एयरक्राफ्ट सेल्स एंड चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड को नियुक्त करने पर सवाल उठाया, जो VVIP यात्रा के लिए एयरक्राफ्ट देता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि क्रैश के 28 घंटे बाद दिग्गज नेता शरद पवार ने किसी भी साजिश से इनकार किया था.
इस पर जवाब देते हुए रोहित पवार ने कहा कि उनका बयान घटना के छह घंटे के अंदर मिली जानकारी के आधार पर दिया गया था. अगले दिन लाखों लोग बारामती आने वाले थे और किसी भी बयान से लॉ एंड ऑर्डर की समस्या हो सकती थी. उस समय उन्होंने जो किया वह सही था. लेकिन मैंने 13 दिनों तक अलग-अलग सोर्स से जानकारी इकट्ठा की है और इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि इस घटना में साजिश की बू आ रही है.