Live TV
Search
Home > देश > जब Asha Bhosle ने गाया ‘अभी ना जाओ छोड़ के…’, अमित शाह भी हो गए थे दीवाने; वीडियो वायरल

जब Asha Bhosle ने गाया ‘अभी ना जाओ छोड़ के…’, अमित शाह भी हो गए थे दीवाने; वीडियो वायरल

Asha Bhosle:! अमित शाह खुद आशा भोसले के 90वे जन्म दिन पर उनसे मिलकत की थी. इसी दौरान आशा भोसले ने अपनी दिल को छू लेने वाली आवाज में मशहूर गाना ' अभी न जाओ छोड़कर ये दिल अभी भरा नहीं' गया. वहीँ अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

Written By: Divyanshi Singh
Last Updated: 2026-04-12 15:23:47

Mobile Ads 1x1

Asha Bhosle: मशहूर सिंगर आशा भोसले इस दुनिया में नहीं रहीं लेकिंन उनकी आवाज आज भी हर तरफ गूंजती है. सिनेमा जगत से लेकर राजनीतिक गलियारों में आशा भोसले की आवाज पसंद की जाती है. ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वायरल वीडियो में एक मशहूर राजनेता खुद आशा भोसले की मधुर आवाज बड़े ही ध्यान से सुन रहे हैं. क्या आप जानते हैं वायरल वीडियो में वो राजनेता कौन हैं. वो कोई और नहीं बल्कि भारत के केंद्रीय मंत्री अमित शाह हैं. जी हाँ! अमित शाह खुद आशा भोसले के 90वे जन्म दिन पर उनसे मिलकत की थी. इसी दौरान आशा भोसले ने अपनी दिल को छू लेने वाली आवाज में मशहूर गाना ‘ अभी न जाओ छोड़कर ये दिल अभी भरा नहीं’ गया. वहीँ अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली के गोअर में पंडित दीनानाथ मंगेशकर और उनकी पत्नी शेवंती के घर हुआ था. पंडित दीनानाथ एक क्लासिकल सिंगर और एक्टर थे, जिनका निधन तब हुआ जब आशा भोसले नौ साल की थीं.

इसके बाद परिवार कोल्हापुर और फिर मुंबई चला गया, जहां भोसले और उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर ने सिंगर और एक्टर के तौर पर फ़िल्मों में करियर शुरू किया. 1943 तक, वह मराठी फ़िल्म माझा बल के लिए हिट नंबर, चला चला नव बाला रिकॉर्ड कर रही थीं. भोसले ने हिंदी फिल्मों में एक सिंगर के तौर पर 1948 में फिल्म चुनरिया के गाने ‘सावन आया’ से डेब्यू किया, हालांकि फिल्म ‘अंधों की दुनिया’ में उनके गाने उसी साल चुनरिया से पहले रिलीज़ हुए थे. उनका पहला सोलो हिंदी फिल्म गाना 1949 में ‘रात की रानी’ के लिए था.

सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान 

भोसले को भारतीय संगीत में उनके योगदान के लिए 2000 में सिनेमा के क्षेत्र में भारत के सबसे बड़े पुरस्कार दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. उन्होंने कई लोकप्रिय पुरस्कारों के अलावा, 1981 में ‘दिल चीज़ क्या है’ (उमराव जान) और 1987 में ‘मेरा कुछ सामान’ (इजाज़त) के लिए बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर के तौर पर दो नेशनल फिल्म पुरस्कार जीते. म्यूज़िक लवर्स और म्यूज़िक इंडस्ट्री, दोनों ही भारत में पॉपुलर म्यूज़िक की सबसे असरदार आवाज़ों में से एक माने जाने वाले भोसले का करियर आठ दशकों से ज़्यादा लंबा था.

Tags:

MORE NEWS

Home > देश > जब Asha Bhosle ने गाया ‘अभी ना जाओ छोड़ के…’, अमित शाह भी हो गए थे दीवाने; वीडियो वायरल

Written By: Divyanshi Singh
Last Updated: 2026-04-12 15:23:47

Mobile Ads 1x1

Asha Bhosle: मशहूर सिंगर आशा भोसले इस दुनिया में नहीं रहीं लेकिंन उनकी आवाज आज भी हर तरफ गूंजती है. सिनेमा जगत से लेकर राजनीतिक गलियारों में आशा भोसले की आवाज पसंद की जाती है. ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वायरल वीडियो में एक मशहूर राजनेता खुद आशा भोसले की मधुर आवाज बड़े ही ध्यान से सुन रहे हैं. क्या आप जानते हैं वायरल वीडियो में वो राजनेता कौन हैं. वो कोई और नहीं बल्कि भारत के केंद्रीय मंत्री अमित शाह हैं. जी हाँ! अमित शाह खुद आशा भोसले के 90वे जन्म दिन पर उनसे मिलकत की थी. इसी दौरान आशा भोसले ने अपनी दिल को छू लेने वाली आवाज में मशहूर गाना ‘ अभी न जाओ छोड़कर ये दिल अभी भरा नहीं’ गया. वहीँ अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली के गोअर में पंडित दीनानाथ मंगेशकर और उनकी पत्नी शेवंती के घर हुआ था. पंडित दीनानाथ एक क्लासिकल सिंगर और एक्टर थे, जिनका निधन तब हुआ जब आशा भोसले नौ साल की थीं.

इसके बाद परिवार कोल्हापुर और फिर मुंबई चला गया, जहां भोसले और उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर ने सिंगर और एक्टर के तौर पर फ़िल्मों में करियर शुरू किया. 1943 तक, वह मराठी फ़िल्म माझा बल के लिए हिट नंबर, चला चला नव बाला रिकॉर्ड कर रही थीं. भोसले ने हिंदी फिल्मों में एक सिंगर के तौर पर 1948 में फिल्म चुनरिया के गाने ‘सावन आया’ से डेब्यू किया, हालांकि फिल्म ‘अंधों की दुनिया’ में उनके गाने उसी साल चुनरिया से पहले रिलीज़ हुए थे. उनका पहला सोलो हिंदी फिल्म गाना 1949 में ‘रात की रानी’ के लिए था.

सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान 

भोसले को भारतीय संगीत में उनके योगदान के लिए 2000 में सिनेमा के क्षेत्र में भारत के सबसे बड़े पुरस्कार दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. उन्होंने कई लोकप्रिय पुरस्कारों के अलावा, 1981 में ‘दिल चीज़ क्या है’ (उमराव जान) और 1987 में ‘मेरा कुछ सामान’ (इजाज़त) के लिए बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर के तौर पर दो नेशनल फिल्म पुरस्कार जीते. म्यूज़िक लवर्स और म्यूज़िक इंडस्ट्री, दोनों ही भारत में पॉपुलर म्यूज़िक की सबसे असरदार आवाज़ों में से एक माने जाने वाले भोसले का करियर आठ दशकों से ज़्यादा लंबा था.

Tags:

MORE NEWS