Solar Eclipse 2026 Date: खगोलीय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वालों के लिए साल 2026 बेहद खास होने वाला है. इस साल सूर्य और चंद्र को मिलाकर कुल 4 ग्रहण लगेंगे. इसमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण होंगे. अगर ग्रहों की चहलकदमी देखें तो फरवरी का महीना और भी रोचक होने वाला है. क्योंकि, इस बार फरवरी में दो-दो खगोलीय घटनाएं एक साथ होने जा रही हैं. जहां पहला सूर्य ग्रहण होगा, तो दूसरा 6 प्रमुख ग्रहों की प्लैनेट परेड. यही वजह है कि, दुनिया भर के लोग इन दोनों कमाल के नजारों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. ज्योतिष आचार्यों की मानें तो 17 फरवरी को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा. यह सूर्य ग्रहण होगा, जिसे वलयाकार सूर्य ग्रहण या ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है. यह भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए इनका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. अब सवाल है कि आखिर साल के पहले सूर्य ग्रहण का समय क्या है? भारत में सूर्य ग्रहण दिखेगा या नहीं? इस बारे में India News को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-
17 फरवरी को लगने वाले सूर्य ग्रहण का समय
साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण इसी महीने लगेगा. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि, साल का पहला ग्रहण 17 फरवरी को होगा. यह एक सूर्य ग्रहण है, जिसे वलयाकार सूर्य ग्रहण या ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है. इस ग्रहण में सूर्य का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा ढक जाएगा और यह लगभग 2 मिनट 20 सेकेंड तक रहेगा. यह ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अर्जेंटीना और अंटार्कटिका में दिखेगा. भारत में यह दिखाई नहीं देगा. इसलिए इसका सूतक काल भी लागू नहीं होगा.
सूतक काल क्या होता है?
ज्योतिष आचार्यों की मानें तो, सूतक काल सूर्य या चंद्र ग्रहण से पहले का एक ऐसा समय है, जिसे हिंदू धर्म में अशुभ और सूतक (अशुद्धता) का काल माना जाता है. इस दौरान पूजा-पाठ, भोजन पकाना-खाना, और शुभ कार्यों की मनाही होती है. चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले और सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले यह अवधि शुरू होकर ग्रहण की समाप्ति पर खत्म होती है. हालांकि, फरवरी में लगने वाले सूर्य ग्रहण का भारत में कोई प्रभाव नहीं. इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. हालांकि, एहतियात के तौर पर इससे जुड़े उपाय किए जा सकते हैं.
क्यों लगता है सूर्य ग्रहण?
खगोलीय घटनाओं के जानकारों की मानें तो, सूर्य ग्रहण उस स्थिति में होता है, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है. ऐसी स्थिति होने पर सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुंच पाना मुश्किल हो जाता है. ऐसा होने से चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ने लगती है, और सूरज का कुछ ही हिस्सा दिखाई देता है. हालांकि, सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं, आंशिक, वलयाकार और पूर्ण सूर्य ग्रहण.
फरवरी में कब होगी ग्रहों की परेड?
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, खगोलीय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वालों के लिए 28 फरवरी 2026 की शाम बेहद खास होने वाली है. 28 फरवरी 2026 को शाम ढलते ही आसमान में एक खूबसूरत नजारा दिखेगा. बता दें कि, सूर्यास्त के बाद पश्चिमी या दक्षिण-पश्चिमी क्षितिज पर छह ग्रह एक लाइन में नजर आएंगे. ये ग्रह हैं- बुध, शुक्र, शनि, नेप्च्यून, यूरेनस और बृहस्पति. नासा और खगोल विशेषज्ञों के अनुसार, यह दुर्लभ प्लैनेटरी अलाइनमेंट फरवरी के अंत से मार्च की शुरुआत तक चलेगा. 28 फरवरी को यह सबसे अच्छा नजारा दिखेगा. यह मौका खास है, क्योंकि इतने ग्रह एक साथ शाम के आसमान में कम ही दिखते हैं.
क्या है प्लैनेट परेड और कैसे दिखेंगे?
स्काईमेट वेदर के अनुसार, प्लैनेट पैरेड एक विजुअल अलाइनमेंट होता है, जहां कई ग्रह पृथ्वी से देखने पर आसमान के एक ही हिस्से में एक साथ चमकते नजर आते हैं. फरवरी 2026 की इस खास घटना में 28 तारीख के आसपास शुक्र, बुध, शनि, नेपच्यून, यूरेनस और बृहस्पति सूर्यास्त के बाद रात को आसमान में एक साथ दिखेंगे. ये कोई असली ग्रहों का ग्रुप या गुरुत्वाकर्षण समूह नहीं होता है, बस हमारी नजर के पर्सपेक्टिव इफेक्ट होता है.