Ashna Roy vs ITC Hotels: दिल्ली के एक फाइव-स्टार होटल में हेयरकट जो एक लंबी कानूनी लड़ाई में बदल गया था, आखिरकार खत्म हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने एक मॉडल को मिलने वाले हर्जाने की रकम 2 करोड़ रुपये से घटाकर 25 लाख रुपये कर दी है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह मामला लगभग सात साल तक चला, तब काफी चर्चा में आया जब शिकायतकर्ता ने दावा किया कि ITC मौर्या होटल के सैलून में खराब तरीके से किए गए हेयरकट ने उसकी प्रोफेशनल इमेज को नुकसान पहुंचाया और उसके करियर के बड़े मौके छीन लिए.
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह झगड़ा 12 अप्रैल, 2018 का है, जब मॉडल आशना रॉय हेयरकट के लिए ITC मौर्या के सैलून गई थीं. बाद में उन्होंने आरोप लगाया कि सर्विस में लापरवाही थी और उनके निर्देशों के मुताबिक नहीं थी.
आशना रॉय ने किया ये दावा
रॉय ने दावा किया कि हेयरकट ने उनके लुक और कॉन्फिडेंस पर बुरा असर डाला, जिससे उन्हें मॉडलिंग और फिल्म असाइनमेंट से हाथ धोना पड़ा. इसके आधार पर उन्होंने काफी हर्जाना मांगा, जिससे यह मामला कंज्यूमर कोर्ट में बहस का एक बड़ा मुद्दा बन गया. जानकारी के अनुसार, रॉय ने शुरू में नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) का दरवाजा खटखटाया, जिसने सितंबर 2021 में होटल को सर्विस में कमी का दोषी ठहराया और उन्हें हर्जाने के तौर पर 2 करोड़ रुपये दिए.
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होटल ने ऑर्डर को सुप्रीम कोर्ट में किया चैलैंज
होटल ने इस ऑर्डर को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया. 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने खराब सर्विस के फैसले को सही ठहराया, लेकिन कम्पेनसेशन की रकम पर दोबारा सोचने के लिए मामला वापस कमीशन के पास भेज दिया. इस दौरान, शिकायत करने वाली ने कथित तौर पर अपना क्लेम बढ़ाकर 5.2 करोड़ रुपये कर दिया. अपने आखिरी फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सर्विस में कमी का नतीजा बरकरार रखा, लेकिन मुआवज़े की रकम को काफी कम करके 25 लाख रुपये कर दिया.
कोर्ट ने देखा कि मॉडल यह साबित करने के लिए ठोस और भरोसेमंद सबूत देने में नाकाम रही कि हेयरकट की वजह से उसके करियर को काफी नुकसान हुआ. कोर्ट ने कहा कि जमा किए गए कई डॉक्यूमेंट्स फोटोकॉपी थे और उनमें सही वेरिफिकेशन नहीं था, जबकि कुछ चीजें घटना से सीधे जुड़े समय से जुड़ी नहीं थीं.
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बेंच ने किस बात पर दिया जोर?
बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि बड़े मुआवजे के दावों के साथ मजबूत और भरोसेमंद सबूत होने चाहिए और वे सिर्फ अंदाजों या इमोशनल परेशानी पर आधारित नहीं हो सकते. उसने यह भी कहा कि शिकायत करने वाले के पास डॉक्यूमेंट्स को ऑथेंटिकेट करने और गवाह पेश करने का काफी मौका था, लेकिन उसने ऐसा ठीक से नहीं किया. साथ ही, कोर्ट ने होटल को पूरी तरह से बरी नहीं किया. उसने सर्विस में कमी के नतीजे को सही ठहराया, यह स्पष्ट करते हुए कि भले ही सैलून खराब सर्विस के लिए ज़िम्मेदार था, लेकिन शिकायत करने वाले ने जिस फाइनेंशियल नुकसान का दावा किया था, वह पूरी तरह से साबित नहीं हुआ था.
इस फैसले को आने वाले कंज़्यूमर केस के लिए अहम माना जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि हालांकि सिविल प्रोसीजर कोड कंज्यूमर फोरम पर सख्ती से लागू नहीं होता, लेकिन सबूत के बेसिक सिद्धांतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उसने कहा कि कोर्ट को मुआवजे के तौर पर बड़ी रकम देने से पहले तथ्यों और डॉक्यूमेंटेशन को ध्यान से देखना चाहिए.