Assam Election 2026: असम विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. एक समय में तरुण गोगोई के दम पर कांग्रेस ने असम में 15 साल तक राज किया था. अब एक बार फिर कांग्रेस ने कुछ ऐसा कदम उठाया है. जिससे बीजेपी का नुकसान हो सकता है. कांग्रेस के लिए दशकों पहले असम में एक ‘गोगोई’ उसके लिए भाग्यशाली साबित हुए, उन्होंने खुद को राज्य के सबसे बड़े नेताओं में से एक के तौर पर स्थापित किया और सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता के रूप में इतिहास में अपनी जगह पक्की कर ली.
तरुण गोगोई का कार्यकाल 2016 में 15 साल बाद समाप्त हो गया और तब से असम में BJP का दबदबा देखने को मिला है. 2021 में पार्टी ने अकेले ही 126 में से 60 सीटें जीतीं और लगातार दूसरी बार गठबंधन के लिए आरामदायक बहुमत का रास्ता साफ कर दिया.
कांग्रेस ने किसके साथ किया गठबंधन?
असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का 2020 में निधन हो गया था. उनकी बड़ी विरासत को संभालने में जूझ रही कांग्रेस को उम्मीद है कि 3 गोगोई मिलकर असम की सत्ता में वापसी कराएंगे. पार्टी और उसके गठबंधन को मजबूती देने के लिए गौरव गोगोई ने बड़ा दाव खेला है. अब तक ये तीनों गोगोई अलग-अलग चुनाव लड़ रहे थे, लेकिन इस साल पहली बार ‘असम सोनमिलित मोर्चा’ के हिस्से के तौर पर वे एक साथ आए हैं. इन 3 गोगोई की बात करें तो इसमें गौरव गोगोई (43 वर्ष), जो असम कांग्रेस के अध्यक्ष हैं; लुरिनज्योति गोगोई (43 वर्ष), जो ‘असम जातीय परिषद’ के प्रमुख हैं; और अखिल गोगोई (50 वर्ष) जो ‘रायजोर दल’ के संस्थापक हैं.
किस पार्टी को मिली कितनी सीट?
माना जा रहा है कि तीनों गोगोई के एक साथ आने का असर ऊपरी असम की 40 से 45 विधानसभा सीटों पर पड़ेगा. यह वह इलाका है जहां अहोम समुदाय का काफी दबदबा है. जिससे ये तीनों ताल्लुक रखते हैं. कांग्रेस पार्टी ने अखिल गोगोई की ‘रायजोर दल’ को 11 सीटें और लुरिनज्योति गोगोई की ‘असम जातीय परिषद’ को 10 सीटें दी हैं.
पिछले चुनाव में किसको कितनी सीट मिली थी?
पिछले चुनाव में एनडीए को असम में 44.5 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 43.7 प्रतिशत वोट मिले थे. जहां वोटों का अंतर सिर्फ 0.8 प्रतिशत था, वहीं सीटों के मामले में यह अंतर 25 का था. असम जातीय परिषद ने राज्य की 126 सीटों में से 82 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 3.7 प्रतिशत वोट हासिल किए थे, जबकि रायजोर दल ने 29 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और 1.5 प्रतिशत वोटों पर कब्जा जमाया था.