कैसे हुआ मामला शुरू?
ट्रायल कोर्ट का रुख
अपील पर आया जिला अदालत का फैसला
जज राणा ने अपने आदेश में कहा कि यह याचिका किसी ठोस कानूनी आधार पर नहीं टिकी थी. इसे केवल भ्रम फैलाने और न्यायिक समय बर्बाद करने के लिए दायर किया गया. उन्होंने यह भी जोड़ा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाया गया ₹1 लाख का जुर्माना पर्याप्त नहीं था, इसलिए ऐसे “फिजूल और उद्देश्यहीन मुकदमों” को रोकने के लिए जुर्माना बढ़ाया गया है.