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PM Modi ने बागुरुम्बा नृत्य को इंटरनेशनल लेवल पर दिलाई पहचान, प्रधानमंत्री के सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मिलाकर मिले 200 मिलियन से ज्यादा व्यूज

Bagurumba Dwhou Dance: असम के बोडो समुदाय के पारंपरिक बागुरुम्बा नृत्य को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अहम योगदान है. आइए पूरे मामले को समझते हैं.

Written By: Sohail Rahman
Last Updated: January 20, 2026 19:41:09 IST

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Bagurumba Dwhou Dance: असम के बोडो समुदाय के पारंपरिक बागुरुम्बा नृत्य में एक ऐतिहासिक बदलाव आया है, जो एक स्थानीय विरासत से इंटरनेशनल स्तर पर छा गया है. दरअसल, 18 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुवाहाटी के सरुसजाई स्टेडियम में सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर का एक शानदार प्रदर्शन देखा, जहां 10,000 से ज्यादा बोडो कलाकारों ने “बागुरुम्बा ड्व्हौ” (बागुरुम्बा लहर) का प्रदर्शन किया.

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस मेगा-इवेंट ने इस स्वदेशी कला रूप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है और इस नृत्य के लिए वैश्विक सर्च इंटरेस्ट दो दशकों में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है.

पीएम मोदी ने पारंपरिक बागुरुम्बा नृत्य को वैश्विक स्तर पर दिलाई पहचान (PM Modi has given global recognition to the traditional Bagurumba dance)

क्षेत्रीय संस्कृति पर “मोदी प्रभाव” इस प्रदर्शन के डिजिटल फुटप्रिंट में सबसे ज्यादा साफ दिखता है. प्रधानमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जिसमें X, इंस्टाग्राम और यूट्यूब शामिल है – पर शेयर किए गए बागुरुम्बा नृत्य के वीडियो और क्लिप को कुल मिलाकर 200 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले हैं. इस बड़े पैमाने पर पहुंच ने दुनिया भर के दर्शकों को जटिल “बटरफ्लाई डांस” से परिचित कराया है, जिसका नाम नर्तकियों की शॉल की सुंदर, फड़फड़ाती हरकतों के कारण पड़ा है, जो ब्रह्मपुत्र घाटी के पेड़-पौधों और जीवों की नकल करती हैं.

अपने बड़े ऑनलाइन फॉलोअर्स का फायदा उठाकर प्रधानमंत्री ने पारंपरिक सांस्कृतिक पहरेदारों को सफलतापूर्वक दरकिनार कर दिया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि बोडो समुदाय की पहचान पूर्वोत्तर भारत की सीमाओं से बहुत दूर तक मनाई जाए.



Bagurumba Dwhou Dance: असम के बोडो समुदाय के पारंपरिक बागुरुम्बा नृत्य को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अहम योगदान है. आइए पूरे मामले को समझते हैं.

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क्या है ये नृत्य? (What is this dance?)

यह प्रदर्शन अपने आप में पैमाने और तालमेल का एक मास्टरक्लास था. चमकीले पीले और लाल “दोखना” और “ज्वमगरा” पोशाक पहने 10,000 महिलाओं ने “खाम” (ढोल), “सिफुंग” (बांसुरी), और “सेरजा” (वायलिन) की पारंपरिक धुनों पर एकदम सही ताल में नृत्य किया. “बागुरुम्बा ड्व्हौ 2026” का यह प्रदर्शन सरकार द्वारा इसी तरह के सांस्कृतिक हस्तक्षेपों की एक श्रृंखला के बाद हुआ है, जिसमें पिछले वर्षों में रिकॉर्ड तोड़ने वाले बिहू और झुमुर प्रदर्शन शामिल हैं.

पीएम मोदी की मौजूदगी से नृत्य को पूरी दुनिया में मिली पहचान (PM Modi’s presence gave the dance form recognition all over the world)

इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति ने पूर्वोत्तर की समृद्ध आदिवासी विरासत को भारत की मुख्यधारा की राष्ट्रीय कहानी में एकीकृत करने के लिए एक व्यापक रणनीतिक प्रयास को रेखांकित किया, जिससे इस क्षेत्र को सांस्कृतिक पर्यटन और शांति के केंद्र के रूप में फिर से ब्रांड किया गया. बोडो समुदाय के लिए यह वैश्विक पहचान सिर्फ एक कलात्मक उपलब्धि नहीं है, बल्कि 2020 के शांति समझौते के बाद बोडोलैंड में स्थायी शांति का प्रतीक है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह डांस “भारत की आत्मा” को दिखाता है, जहां परंपरा और आधुनिकता एक साथ मौजूद हैं. जैसे-जैसे बगुरुम्बा के लिए इंटरनेशनल सर्च क्वेरी बढ़ रही हैं, यह इवेंट इस बात का सबूत है कि पारंपरिक लोक कलाएं वायरल कंटेंट के जमाने में भी कैसे फल-फूल सकती हैं, बशर्ते उन्हें इतने बड़े पैमाने पर प्लेटफॉर्म दिया जाए.

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