Supreme Court: पश्चिम बंगाल में चुनावी हलचल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है. राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान जो कुछ भी घटा, उसे देखते हुए कोर्ट ने साफ कह दिया है कि फिलहाल केंद्रीय सुरक्षा बलों को वहां से नहीं हटाया जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से कहा है कि वे तीन जजों की एक स्पेशल बेंच बनाएं. यह पैनल उन अपीलीय न्यायाधिकरणों के लिए प्रक्रिया तय करेगा जो वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने के खिलाफ शिकायतों की सुनवाई कर रहे हैं. मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने जोर देकर कहा कि ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए जिससे ये ट्रिब्यूनल ज्यादा से ज्यादा अपीलों का निपटारा कर सकें.
अधिकारियों की पेशी और चुनावी सरगर्मी
सोमवार का दिन बंगाल की राजनीति के लिए काफी भारी रहा, कोर्ट के आदेश पर पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, डीजीपी, मालदा के डीएम और एसपी दोपहर 4 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए और अपनी अनुपालन रिपोर्ट सौंपी. एक तरफ कानूनी लड़ाई चल रही थी, तो दूसरी तरफ चुनावी बिगुल बज चुका है. राज्य विधानसभा चुनाव के पहले चरण (23 अप्रैल) के लिए 152 सीटों पर नामांकन भरने का आज आखिरी दिन था.
विवाद की जड़ क्या है?
केंद्रीय बलों की तैनाती का फैसला अचानक नहीं लिया गया. इसके पीछे 1 अप्रैल को मालदा जिले के कालियाचक में हुई एक गंभीर घटना है, वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के विरोध में उग्र भीड़ ने तीन महिला अफसरों समेत सात न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे तक बंधक बनाए रखा था. कोर्ट ने इसे राज्य सरकार की ‘कर्तव्य में चूक’ माना और मुख्य सचिव व डीजीपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था.
23 लाख से ज्यादा वोटर बाहर
चुनाव आयोग के इस SIR में बड़े पैमाने पर नाम काटे गए हैं, जिससे राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है. नवंबर 2025 से अब तक कुल 63,66,952 नाम हटाए जा चुके हैं. कोर्ट द्वारा बनाए गए 19 न्यायाधिकरणों में से फिलहाल एक भी पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है. कुल 60 लाख मामलों में से 52 लाख का निपटारा हुआ है, जिनमें से 23.4 लाख (45%) वोटरों के नाम काट दिए गए हैं.
विवाद का कारण क्या है?
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस प्रक्रिया को चुनौती दी है. खास तौर पर चुनाव आयोग द्वारा इस्तेमाल की गई ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ कैटेगरी पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिसकी वजह से लाखों लोग लिस्ट से बाहर हो गए हैं.
आपको बताते चलें कि पश्चिम बंगाल में दो चरणों 23 अप्रैल और 29 अप्रैल 2026 को मतदान होना है. ऐसे में कोर्ट की यह सख्ती और सुरक्षा बलों की मौजूदगी चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए बेहद अहम मानी जा रही है.