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‘ऑफिस में महिला कर्मी की छाती को…’, बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, धारा 354C को किया परिभाषित

Bombay High Court: बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि वर्कप्लेस पर महिला सहकर्मी के सीने को घूरना या टकटकी लगाकर देखना भले ही नैतिक तौर पर पूरी तरह से गलत और अपमानजनक हो सकता है. लेकिन इसे अपराध नहीं माना जा सकता है.

Written By: Sohail Rahman
Last Updated: April 13, 2026 19:26:42 IST

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Bombay High Court: बॉम्बे हाई कोर्ट ने वर्कप्लेस पर व्यवहार को लेकर एक बहुत ही अहम फैसला सुनाया है. दरअसल, पूरा मामला यह है कि कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि ऑफिस में किसी महिला सहकर्मी के सीने को घूरना या टकटकी लगाकर देखना भले ही  नैतिक तौर पर पूरी तरह से गलत और अपमानजनक हो सकता है, लेकिन इसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354C के तहत ‘ताक-झांक’ (Voyeurism) का अपराध नहीं माना जा सकता.

कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा कि नैतिकता और कानून के बीच एक बारीक लकीर होती है और किसी भी कानून की व्याख्या उसके तय दायरे से बाहर जाकर नहीं की जा सकती.

जस्टिस अमित बोरकर की पीठ ने सुनाया फैसला

जस्टिस अमित बोरकर की एकल-न्यायाधीश पीठ ने यह फ़ैसला सुनाया. यह फ़ैसला मैक्स लाइफ़ इंश्योरेंस के एक कर्मचारी अभिजीत निगुडकर के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए दिया गया. कोर्ट ने माना कि भले ही आरोपी का बर्ताव किसी भी पेशेवर माहौल के लिए गलत था, लेकिन तकनीकी और कानूनी आधार पर इसे ‘ताक-झांक’ के दायरे में नहीं लाया जा सकता.

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद एक इंश्योरेंस कंपनी के अंदर शुरू हुआ. कंपनी की एक महिला कर्मचारी ने अपने एक सीनियर सहकर्मी पर गंभीर आरोप लगाए. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि मीटिंग के दौरान आरोपी सामान्य तौर पर नजरें मिलाने के बजाय जान-बूझकर उसकी छाती को घूरता था. इसके अलावा, महिला ने आरोप लगाया कि वह व्यक्ति गलत टिप्पणियां भी करता था, जिससे काम का माहौल असहज हो जाता था.

कंपनी की आंतरिक शिकायत समिति ने की थी जांच

जानकारी सामने आ रही है कि कानूनी कार्रवाई शुरू होने से पहले ही कंपनी की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने इस मामले की जांच की थी. अपनी जांंच पूरी करने के बाद ICC ने आरोपी निगुडकर को क्लीन चिट दे दी थी. इसके बावजूद यह मामला पुलिस तक पहुंचा और IPC की धारा 354C के तहत एक केस दर्ज किया गया.

क्या है इस कानून की परिभाषा?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कानून की सटीक व्याख्या की है. कोर्ट ने समझाया कि आईपीसी की धारा 354C  ‘वॉयरिज्म’ से जुड़ी हैं. यह नियम तभी लागू होती है जब कोई व्यक्ति किसी महिला को किसी ‘निजी काम’ (private act) के दौरान देखता है या जब वह महिला ऐसा कोई काम कर रही होती है, तब उसकी तस्वीरें/वीडियो बनाता है. यहां निजी कृत्य से मतलब उस पल से होता है जब कोई महिला पूरी तरह से निजता की उम्मीद करती है. उदाहरण के तौर पर अगर समझें तो जब कोई महिला वॉशरूम का इस्तेमाल कर रही हों या कपड़े बद रही है. ये सभी काम निजी कृत्य के अंतर्गत आते हैं.

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Bombay High Court: बॉम्बे हाई कोर्ट ने वर्कप्लेस पर व्यवहार को लेकर एक बहुत ही अहम फैसला सुनाया है. दरअसल, पूरा मामला यह है कि कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि ऑफिस में किसी महिला सहकर्मी के सीने को घूरना या टकटकी लगाकर देखना भले ही  नैतिक तौर पर पूरी तरह से गलत और अपमानजनक हो सकता है, लेकिन इसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354C के तहत ‘ताक-झांक’ (Voyeurism) का अपराध नहीं माना जा सकता.

कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा कि नैतिकता और कानून के बीच एक बारीक लकीर होती है और किसी भी कानून की व्याख्या उसके तय दायरे से बाहर जाकर नहीं की जा सकती.

जस्टिस अमित बोरकर की पीठ ने सुनाया फैसला

जस्टिस अमित बोरकर की एकल-न्यायाधीश पीठ ने यह फ़ैसला सुनाया. यह फ़ैसला मैक्स लाइफ़ इंश्योरेंस के एक कर्मचारी अभिजीत निगुडकर के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए दिया गया. कोर्ट ने माना कि भले ही आरोपी का बर्ताव किसी भी पेशेवर माहौल के लिए गलत था, लेकिन तकनीकी और कानूनी आधार पर इसे ‘ताक-झांक’ के दायरे में नहीं लाया जा सकता.

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद एक इंश्योरेंस कंपनी के अंदर शुरू हुआ. कंपनी की एक महिला कर्मचारी ने अपने एक सीनियर सहकर्मी पर गंभीर आरोप लगाए. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि मीटिंग के दौरान आरोपी सामान्य तौर पर नजरें मिलाने के बजाय जान-बूझकर उसकी छाती को घूरता था. इसके अलावा, महिला ने आरोप लगाया कि वह व्यक्ति गलत टिप्पणियां भी करता था, जिससे काम का माहौल असहज हो जाता था.

कंपनी की आंतरिक शिकायत समिति ने की थी जांच

जानकारी सामने आ रही है कि कानूनी कार्रवाई शुरू होने से पहले ही कंपनी की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने इस मामले की जांच की थी. अपनी जांंच पूरी करने के बाद ICC ने आरोपी निगुडकर को क्लीन चिट दे दी थी. इसके बावजूद यह मामला पुलिस तक पहुंचा और IPC की धारा 354C के तहत एक केस दर्ज किया गया.

क्या है इस कानून की परिभाषा?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कानून की सटीक व्याख्या की है. कोर्ट ने समझाया कि आईपीसी की धारा 354C  ‘वॉयरिज्म’ से जुड़ी हैं. यह नियम तभी लागू होती है जब कोई व्यक्ति किसी महिला को किसी ‘निजी काम’ (private act) के दौरान देखता है या जब वह महिला ऐसा कोई काम कर रही होती है, तब उसकी तस्वीरें/वीडियो बनाता है. यहां निजी कृत्य से मतलब उस पल से होता है जब कोई महिला पूरी तरह से निजता की उम्मीद करती है. उदाहरण के तौर पर अगर समझें तो जब कोई महिला वॉशरूम का इस्तेमाल कर रही हों या कपड़े बद रही है. ये सभी काम निजी कृत्य के अंतर्गत आते हैं.

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