Income Tax Slabs Budget 2026 Update: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते समय घोषणा की कि मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा किसी व्यक्ति को दिया गया कोई भी ब्याज आयकर से मुक्त होगा.
आयकर पर नया टैक्स स्लैब
Income Tax Slabs Budget 2026 Update: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते समय घोषणा की कि मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा किसी व्यक्ति को दिया गया कोई भी ब्याज आयकर से मुक्त होगा. केंद्रीय वित्त मंत्री ने आगे कहा कि ऐसे ब्याज पर स्रोत पर काटे जाने वाले किसी भी टैक्स (TDS) को खत्म कर दिया जाएगा. इससे यह सुनिश्चित होगा कि लाभार्थियों को बिना किसी कटौती के पूरी राशि मिले. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार अपना नौ वां बजट पेश कर रही हैं, जो एक इतिहास रच रहा है.
लोगों के बीच इनकम टैक्स को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रहीं थीं. इस बजट में लोगों के लिए क्या बदलाव होने जा रहा है? बजट के बाद उनके ऊपर बोझ बढ़ने वाला है या फिर घटेगा. खासकर नौकरी-पेशा वाले लोगों के मन में यह जरूर आ रहा है कि उन्हें इस बजट से कितना फायदा होने वाला है? सबसे बड़ी आशा की किरण टैक्स स्लैब और बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट को लेकर लगी हुई है. अगर बात पिछले साल की हो तो नए टैक्स रिजीम के तहत 12 लाख रुपये की इनकम को 87ए के रिबेट के साथ फ्री किया गया था.
पुराने टैक्स सिस्टम में 2.5 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स नहीं लगता था. वहीं, नए टैक्स सिस्टम के तहत छूट 4 लाख रुपये की गई है. जबकि, पहले 87ए की रिबेट के साथ 5 लाख की कमाई को टैक्स फ्री किया गया था, जबकि नए टैक्स स्लैब में 87ए के रिबेट के साथ 12 लाख की आय को टैक्स में छूट है. न्यू टैक्स रिजीम लोगों को काफी पसंद आई क्योंकि, लगभग 90% लोग इसके तहत फायदा उठा रहे हैं.
फाइनेंस मिनिस्टर ने साफ किया कि 60 साल पुराने 1961 के कानून के स्थान पर अब ‘आयकर अधिनियम 2025’ को पूरी तरह से 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी किया जाएगा. इस नए कानून में कठिन भाषा को हटाकर सरल भाषा में बनाया गया है. इसके अलावा धाराओं की संख्या को भी घटाया गया है. इसमें 800 से लेकर 536 धाराओं को किया गया है.
आज जब वित्त मंत्री सीतारमण केंद्रीय बजट 2026 पेश कर रही हैं, तो मुख्य ध्यान आयकर घोषणाओं और आयकर स्लैब बजट 2026 पर है. वित्त मंत्री ने आयकर स्लैब के संबंध में कोई नई घोषणा नहीं की, लेकिन संशोधित ITR फाइलिंग की समय सीमा को मामूली शुल्क के साथ 31 मार्च तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया. पुरानी बनाम नई टैक्स व्यवस्था में अलग-अलग टैक्स स्लैब हैं. NRI द्वारा अचल संपत्ति की बिक्री पर TDS अब रेसिडेंट खरीदार द्वारा काटा जाएगा, जबकि पहले TAN की ज़रूरत होती थी. टैक्सपेयर्स को रीअसेसमेंट के बाद भी इनकम टैक्स रिटर्न अपडेट करने की अनुमति है, लेकिन 10% टैक्स के साथ. पुराने बनाम नए टैक्स सिस्टम के हिसाब से टैक्स रेट चेक करें.
सबसे बड़ी खुशखबरी तो यह है कि टैक्सपेयर्स की आय में अगर कोई झोल या गड़बड़ी पाई जाती है, या फिर टैक्स की जानकारी छुपाई जाती है, तो उसे अब जेल की हवा नहीं खानी पड़ेगी. अब इस तरह के केस में सिर्फ जुर्माना भरकर मामले को खत्म किया जाएगा. जबकि, पहले टैक्स चोरी में जेल जाना पड़ता था. यह परिवर्तन 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए इनकम टैक्स एक्ट का हिस्सा होगा. गवर्मेंट का लक्ष्य टैक्स सिस्टम को पारदर्शी बनाना है. इसलिए अब करदाता को डरने की जरूरत नहीं है. इसके अलावा जिन लोगों के पास विदेशों में अघोषित संपत्ति है, उन्हें भी इसके तहत एक अवसर दिया जाएगा. ऐसे लोग 6 महीने के अंदर डिस्क्लोजर स्कीम के तहत संपत्ति की जानकारी दे सकते हैं.
यदि कोई विदेश घूमने या अपने बच्चों को बाहर पढ़ाई का प्लान तैयार कर रहा है तो बजट से लोगों की जेब पर कम बोझ पड़ने वाला है. पहले फॉरेन टूर पैकेज पर टीसीएस (TCS) की दरें 5% से लेकर 20% तक थीं. इससे लोगों का बजट बिगड़ जाता था. लेकिन, अब सरकार ने इसे घटाकर 2% कर दिया. मतलब, अब चाहे शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो या फिर विदेश यात्रा का पैकेज, केवल 2% टीसीएस ही देना पड़ेगा.
अक्सर ऐसा कई बार देखा गया कि रिटर्न भरते समय यदि कोई जानकारी छूट जाती थी, तो इसे सुधारने में कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था. वित्त मंत्री सीतारमण ने ऐलान किया है कि अब ‘रिवाइज्ड रिटर्न’ (Revised Returns) भरने के लिए टैक्सपेयर्स को अतिरिक्त वक्त दिया जाएगा. इसके लिए अब नाममात्र की फीस देनी होगी. साथ ही इसकी टाइमिंग में भी बदलाव किया गया है. ITR-1 और ITR-2 भरने वालों के लिए 31 जुलाई तक का समय दिया गया है. इसके अलावा, नॉन-ऑडिट बिजनेस और ट्रस्ट के लिए यह तारीख 31 अगस्त निर्धारित की गई है. इसके अलावा, छोटे करदाताओं के लिए अब अधिकारियों के आगे-पीछे नहीं घूमना पड़ेगा. टीडीएस सर्टिफिकेट (Lower/Nil TDS) प्राप्त करने की प्रोसेस को ऑटोमैटिक किया जाएगा.
पहले कोई निवासी किसी एनआरआई (NRI) से भारत में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए ‘टैन नंबर’ (TAN) लेने की जरूरत पड़ती थी. यह एक आम खरीदार के लिए परेशानी वाला काम था. इस बार के बजट में इसे हटा दिया गया है. अब प्रॉपर्टी खरीददार डायरेक्ट टीडीएस काट सकेगा और अलग से टैन नंबर के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा. इसके अलावा, जिन इन्वेस्टर्स का पैसा कई कंपनियों में लगा है, उनके लिए फॉर्म 15G और 15H की प्रोसेस को ईजी बना दिया गया है. अब डिपॉजिटरी इन फॉर्म्स को संबंधित कंपनियों को भेजेगी. इससे इन्वेस्टर्स का काम घर बैठे ही आसानी से हो जाएगा.
₹2,50,000 तक की इनकम – Nil
₹2,50,001 से ₹5,00,000 – 5%
₹5,00,001 से ₹10,00,000 – 20%
₹10,00,000 से ज़्यादा इनकम – 30%
₹4 लाख तक की इनकम – Nil
₹4 लाख से ₹8 लाख – 5%
₹8 लाख से ₹12 लाख – 10%
₹12 लाख से ₹16 लाख – 15%
₹16 लाख से ₹20 लाख – 20%
₹20 लाख से ₹24 लाख – 25%
₹24 लाख से ज़्यादा इनकम – 30%
NEET PG 2026 Admit Card: NBEMS 25 अगस्त को NEET PG 2026 का एडमिट कार्ड…
Awarapan 2 Box Office Collection Day 11: इमरान हाशमी की फिल्म 'आवारापन 2' 14 अगस्त…
Weather Today Update 25 August 2026 | Aaj Ka Mausam : भारत में बारिश के…
Lunar Eclipse 2026: 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन साल का आखिरी आंशिक चंद्र…
Delhi Hotel Staff Attack: दिल्ली के वेलकम इलाके में खाने के स्वाद को लेकर हुए…
Gungun Gupta Viral Video Controversy: वो लीक वीडियो जिसने रातों-रात इंटरनेट पर हड़कंप मचा दिया…