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खालसा परंपरा का देश देखेगा गौरव, सिख रेजिमेंट में 1300 युवाओं को किया गया शामिल, यहां जानें कैसे तैयार होते हैं ये हिंदुस्तान के जांबाज

Written By: Darshna Deep
Last Updated: February 3, 2026 18:01:29 IST

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Indian Army Sikh Regiment: भारतीय सेना की सबसे पराक्रमी रेजिमेंटों में से एक, सिख रेजिमेंट में इस साल 1300 से ज्यादा सिख युवाओं को शामिल कर पंजाब की युद्ध विरासत को आगे बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण काम किया. जानकारी के मुताबिक, इन युवाओं का चयन सिर्फ एक प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि अनुशासन और एक कड़ी परीक्षा भी है. तो वहीं, दूसरी तरफ रेजिमेंट के पूर्व सैनिकों और वर्तमान टीम ने मिलकर एक ‘अधिक मजबूत और संगठित’ प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य इच्छुक उम्मीदवारों (Interested Candidates) को सफल रंगरूटों (Recruits) में पूरी तरह से बदलना है. 

पूर्व सैनिकों के मार्गदर्शन में होगी तैयारी 

दरअसल, भर्ती होने वाले इन युवाओं को अनुभवी पूर्व सैनिकों के सीधे निर्देशन में कठिन परिस्थियों में तैयार किया जाएगा. इसके साथ ही इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि इसमें सिर्फ और सिर्फ शारीरिक शक्ति ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक मार्गदर्शन पर भी पूरी तरह से जोर दिया जाएगा. तो वहीं, दूसरी तरफ पूर्व सैनिक उम्मीदवारों को उन आम गलतियों से बचने की शिक्षा देते हैं जो ज्यादातर आम गलतियों से बचने की शिक्षा देते हैं जो अक्सर भर्ती के दौरान सबसे बड़ी परेशानी बनकर सामने आ जाती है. 

केवल वर्दी नहीं, जीवन जीने का अनोखा तरीका

जानकारी के मुताबिक, सिख रेजिमेंट का प्रशिक्षण कार्यक्रम सिर्फ भर्ती परिणामों तक ही सीमित देखने को नहीं मिलेगा. इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को मानसिक रूप से लचीला, अनुशासित और आत्मविश्वासी बनाने का है. और यह प्रशिक्षण युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्रीय कर्तव्य और नेतृत्व की दिशा में सबसे आगे भी ले जाने का काम करता है. यह पहल न केवल देश को सशक्त सैनिक प्रदान करती है, बल्कि आर्थिक रूप से सुरक्षित और जिम्मेदार नागरिक भी तैयार करती है, जो सैन्य और नागरिक दोनों जीवन में सफल होने की क्षमता रख सकेंगे. 

1300 युवाओं की सफलता के पीछे पूर्व सैनिकों का बड़ा हाथ

आप में से शायद बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि सिख रेजिमेंट में शामिल हुए 13 हजार युवाओं की सफलता के पीछे पूर्व सैनिकों और रेजिमेंट के विशेष मार्गदर्शन का सबसे बड़ा हाथ है. यह पहल खालसा युद्ध परंपरा को आधुनिक अनुशासन के साथ जोड़ने की कोशिश करता है. तो वहीं, इस कार्यक्रम का मूल मंत्र सिर्फ  सेना में भर्ती होना नहीं, बल्कि युवाओं को नेतृत्व, सेवा और राष्ट्रीय कर्तव्य के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से ज्यादा संगठित बनाना है. 

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