Live TV
Search
Home > देश > CEC ज्ञानेश कुमार को ‘हटाने का प्रस्ताव’ फेल! सभापति के फैसले से पलटी बाजी, 193 सांसदों के साइन भी बेअसर

CEC ज्ञानेश कुमार को ‘हटाने का प्रस्ताव’ फेल! सभापति के फैसले से पलटी बाजी, 193 सांसदों के साइन भी बेअसर

CEC Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की विपक्ष की कोशिश नाकाम हो गई है. जानिए कैसे 193 सांसदों के साइन वाला प्रस्ताव खारिज हुआ और क्यों टला यह महाभियोग.

Written By: Shivani Singh
Last Updated: 2026-04-06 22:26:16

Mobile Ads 1x1

CEC Gyanesh Kumar: लोकतंत्र में संस्थाओं और उनके प्रमुखों को लेकर अक्सर राजनीतिक खींचतान देखने को मिलती है. भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की विपक्षी दलों की हालिया कोशिश पर अब विराम लग गया है. राज्यसभा के सभापति ने विपक्ष के 193 सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित उस प्रस्ताव नोटिस को खारिज कर दिया है, जिसमें CEC को पद से हटाने की मांग की गई थी.

मामला क्या है?

दरअसल, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उस प्रस्ताव के नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है, जिस पर लोकसभा के 130 सांसदों और राज्यसभा के 63 सदस्यों यानी कुल 193 सांसदों के हस्ताक्षर थे और जिसमें ज्ञानेश कुमार को भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाने की मांग की गई थी. गौरतलब है कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव कुछ ही दिन पहले पेश किया गया था, जिसकी अगुवाई तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने की थी. यह भारत में पहला ऐसा मौका था जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था.

ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने का प्रस्ताव

13 मार्च को दस पन्नों से अधिक के एक नोटिस में तृणमूल कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए सात विशिष्ट आधारों का हवाला दिया था. इन सात बिंदुओं में बिहार में SIR प्रक्रिया के संदर्भ भी शामिल थे. प्रस्ताव में नागरिकों के मतदान अधिकारों में कटौती का आरोप भी लगाया गया था. इसके अलावा, इसमें कुछ राजनीतिक दलों के पक्ष में पक्षपात करने के आरोप भी लगाए गए थे. दस्तावेज़ में सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णयों का भी हवाला दिया गया था.

राज्यसभा के सभापति ने इस प्रस्ताव इनकार कर दिया

राज्यसभा के सभापति ने इस प्रस्ताव की गहन जांच की. सभी प्रासंगिक पहलुओं और मुद्दों का मूल्यांकन करने के बाद, सभापति ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम 1968 की धारा 3 के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया.

MORE NEWS

Home > देश > CEC ज्ञानेश कुमार को ‘हटाने का प्रस्ताव’ फेल! सभापति के फैसले से पलटी बाजी, 193 सांसदों के साइन भी बेअसर

Written By: Shivani Singh
Last Updated: 2026-04-06 22:26:16

Mobile Ads 1x1

CEC Gyanesh Kumar: लोकतंत्र में संस्थाओं और उनके प्रमुखों को लेकर अक्सर राजनीतिक खींचतान देखने को मिलती है. भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की विपक्षी दलों की हालिया कोशिश पर अब विराम लग गया है. राज्यसभा के सभापति ने विपक्ष के 193 सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित उस प्रस्ताव नोटिस को खारिज कर दिया है, जिसमें CEC को पद से हटाने की मांग की गई थी.

मामला क्या है?

दरअसल, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उस प्रस्ताव के नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है, जिस पर लोकसभा के 130 सांसदों और राज्यसभा के 63 सदस्यों यानी कुल 193 सांसदों के हस्ताक्षर थे और जिसमें ज्ञानेश कुमार को भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाने की मांग की गई थी. गौरतलब है कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव कुछ ही दिन पहले पेश किया गया था, जिसकी अगुवाई तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने की थी. यह भारत में पहला ऐसा मौका था जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था.

ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने का प्रस्ताव

13 मार्च को दस पन्नों से अधिक के एक नोटिस में तृणमूल कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए सात विशिष्ट आधारों का हवाला दिया था. इन सात बिंदुओं में बिहार में SIR प्रक्रिया के संदर्भ भी शामिल थे. प्रस्ताव में नागरिकों के मतदान अधिकारों में कटौती का आरोप भी लगाया गया था. इसके अलावा, इसमें कुछ राजनीतिक दलों के पक्ष में पक्षपात करने के आरोप भी लगाए गए थे. दस्तावेज़ में सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णयों का भी हवाला दिया गया था.

राज्यसभा के सभापति ने इस प्रस्ताव इनकार कर दिया

राज्यसभा के सभापति ने इस प्रस्ताव की गहन जांच की. सभी प्रासंगिक पहलुओं और मुद्दों का मूल्यांकन करने के बाद, सभापति ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम 1968 की धारा 3 के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया.

MORE NEWS