Rajagopalachari Statue: संडे को महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर राजाजी यानी आजाद भारत के पहले और एकमात्र गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती रोजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया. राजाजी की प्रतिमा को अशोक मंडप के पास ग्रैंड ओपन स्टेयरकेस एरिया में लगाया गया है. यह महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने स्थित है. राष्ट्रपति भवन में ‘राजाजी उत्सव’ समारोह का आयोजन किया गया. इसमें उपराष्ट्रपति सहित कई मंत्री मौजूद रहे.
राष्ट्रपति मुर्मू ने बताया कि हाल के वर्षों में राष्ट्रपति भवन में कई तरह के बदलाव हुए हैं. उन्होंने राजगोपालाचारी की भूमिका को देश के ‘मानसिक उपनिवेशवाद से मुक्ति’ की प्रोसेस से जोड़ा. राष्ट्रपति ने यह भी याद करते हुए बताया कि जब राजाजी यहां रहने आए तो उन्होंने अपने रूम में रामकृष्ण परमहंस और महात्मा गांधी की फोटो लगाई थी.
भारतीय विरासत को वापस लाने की तैयारी
नई दिल्ली के आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस की विरासत आजाद भारत में एक ऐसे खास माहौल की निशानी बन गई, जिसमें पावर, खानदान और असर का जबरदस्त मेल था. आलोचकों के लिए, सरकारें आती-जाती रहीं लेकिन लुटियंस के खास लोग हमेशा रहे. 2014 में ऑफिस आने के बाद से PM मोदी कभी-कभी ‘लुटियंस गैंग’ या ‘लुटियंस जमात’ कहकर जिसे बुरा-भला कहते थे, उनके बारे में कुछ भी कहने से हिचकिचाते नहीं थे.
अब लुटयंस की निशानियों को धीरे-धीरे कम किया जा रहा है. सड़कों और ताकतवर पतों के नाम बदलकर और ब्रिटिश बादशाह के लिए बने आसन पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति लगाकर बदला गया. हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं को अहमियत देकर और ब्रिटिश जमाने के नामों की जगह भारतीय विरासत और विरासत से जुड़े नाम लाकर बदलाव किया गया.
मन की बात में जिक्र
अपने महीने के ‘मन की बात’ ब्रॉडकास्ट में प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि सी राजगोपालाचारी की मूर्ति, जो एक स्वतंत्रता सेनानी थे और आज़ादी के बाद पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर जनरल बने, सोमवार को राष्ट्रपति भवन में लुटियंस की मूर्ति की जगह लगाई जाएगी. उन्होंने कहा कि राजगोपालाचारी का व्यवहार, संयम और सार्वजनिक जीवन में स्वतंत्र सोच आज भी हमें प्रेरणा देती है. दुर्भाग्य से, आज़ादी के बाद भी ब्रिटिश प्रशासकों की मूर्तियों को राष्ट्रपति भवन में रहने दिया गया लेकिन देश के महानतम सपूतों की मूर्तियों को जगह नहीं दी गई.
PM मोदी ने जयललिता की तारीफ की
जयललिता की तारीफ करते हुए PM ने कहा कि यह देश को गुलामी की मानसिकता से छुटकारा दिलाने के उनके प्रयास का हिस्सा है. एक आह्वान जो उन्होंने लाल किले से किया था और भारत की अपनी विरासत और परंपराओं को प्राथमिकता देना है. उन्होंने महात्मा गांधी के निकट सहयोगी और तत्कालीन मद्रास राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री राजगोपालाचारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे सत्ता को पद के रूप में नहीं बल्कि सेवा के रूप में देखते थे. लुटियंस के बारे में वास्तुकार और नगर योजनाकार ए के जैन ने कहा कि 1911 में राजधानी को दिल्ली में बदलने की घोषणा के बाद ही एक नियोजित ‘नई दिल्ली’ का विचार एक ऐसे शहर में आया जो बेतरतीब ढंग से बढ़ रहा था.
मोदी ने चुनावी राज्य तमिलनाडु की एक और जानी-मानी पॉलिटिकल हस्ती दिवंगत AIADMK लीडर और CM जे. जयललिता की भी तारीफ़ की. उन्होंने गुड गवर्नेंस, महिला एम्पावरमेंट के लिए उनकी कोशिशों और गुजरात की मुख्यमंत्री रहने के दौरान उनके साथ अपने पर्सनल इक्वेशन को याद किया. उन्हें भारत की कल्चरल विरासत पर भी बहुत गर्व था. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जयललिता अयोध्या में राम मंदिर की शुरुआती समर्थक थीं. जब ज़्यादातर क्षेत्रीय क्षत्रपों ने भी हिंदुत्व के मुद्दे को छोड़ दिया था.
परपोते ने जताया दुख
इस बदलाव पर लुटियंस के परपोते और ब्रिटिश विज्ञान लेखक मैट रिडले ने दुख जाहिर किया. उन्होंने सोशल मीडिया पर इसके बारे में लिखा है कि उनके परदादा की प्रतिमा को हटाने से अफसोस है. साथ ही यह भी कहा कि लुटियंस का नाम पहले ही आधार पट्टिका से हटा दिया था. सरकार ने जानकारी दी है कि राजाजी उत्सव के तहत राजगोपालाचारी के जीवन और कार्यों पर एक प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा. यह अमृत उद्यान में 24 फरवरी से 1 मार्च तक होगी.