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NXT Summit 2026: क्या सुप्रीम कोर्ट में अब रोबोट सुनाएगा फैसला? NXT कॉन्क्लेव में CJI सूर्यकांत की 10 सबसे बड़ी बातें, जरूर पढ़ें

NXT Summit 2026: AI के दौर में क्या बदल जाएगा इंसाफ का चेहरा? NXT कॉन्क्लेव 2026 में CJI सूर्यकांत ने भविष्य की अदालतों को लेकर जो कहा, वो हर नागरिक के लिए जानना ज़रूरी है, यहां पढ़िए उनके भाषण की 10 बड़ी बातें...

Written By: Shivani Singh
Last Updated: March 12, 2026 20:31:12 IST

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NXT Summit 2026: नई दिल्ली का भारत मंडपम आज एक ऐसे ऐतिहासिक संगम का गवाह बन रहा है, जहाँ दुनिया के 40 से अधिक देशों के 100 सांसद और दिग्गज राजनेता भारत की प्रगति की नई इबारत लिखने जुटे हैं. आज देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘भारत प्रोग्रेस रिपोर्ट’ जारी करेंगे. उससे पहले, दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 3 दिवसीय NXT कॉन्क्लेव 2026 के मंच से देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भविष्य की न्यायपालिका का एक स्पष्ट खाका पेश किया, जिसमें उन्होंने कानून को एक नदी और तकनीक को उसकी बदलती धाराओं के रूप में परिभाषित करते हुए यह साफ करते हुए कहा कि चाहे हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कितने ही बड़े युग में क्यों न प्रवेश कर लें, न्याय का आधार मानवीय संवेदना ही रहेगी. जिस तरह से हमारे जीवन में AI की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है ऐसे में मन में सवाल पैदा होता है कि क्या न्याय प्रणाली में रोबोट और AI जगह ले लेगा? इस पर CJI ने विस्तार से बात की है. आइये जानते हैं CJI सूर्यकांत के भाषण की 10 अहम बातें

1. कानून स्थिर नहीं, निरंतर प्रवाहमान है

अपने भाषण में CJI ने यूनानी दार्शनिक हेराक्लीटस का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह आप एक नदी में दोबारा कदम नहीं रख सकते क्योंकि पानी बदलता रहता है, वैसे ही कानून भी ‘लिविंग ऑर्गनिज्म’ है. नियम और कानून बदल सकते हैं, लेकिन न्याय की ‘नदी का तल’ हमेशा स्थिर और अटल रहता है.

2. पत्थरों से पिक्सल तक का सफर

न्यायपालिका के क्रमिक विकास पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हम मेसोपोटामिया के पत्थर के शिलालेखों और ताड़ के पत्तों से निकलकर प्रिंटिंग प्रेस तक पहुँचे और अब हम ‘कागज की दुनिया’ से ‘पिक्सल की दुनिया’ में कदम रख चुके हैं. यह बदलाव न्याय के लोकतंत्रीकरण का प्रतीक है.

3. AI हवा की तरह है, हमें पवनचक्की बनानी होगी

तकनीक और AI के डर पर उन्होंने एक पुरानी कहावत साझा की, ‘आप हवा को रोक नहीं सकते, लेकिन आप पवनचक्कियाँ ना सकते हैं.’ उनका स्पष्ट संदेश था कि हम तकनीक से पीछे नहीं हट सकते, बल्कि हमें इसे एक जिम्मेदार ढांचे के भीतर ढालना होगा.

4. SUAS और भाषाई बाधाओं का अंत

CJI ने ‘सुआस’ (SUAS) सॉफ्टवेयर की सफलता का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि यह AI टूल सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को 16 क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद कर रहा है. अब तमिलनाडु का किसान या पश्चिम बंगाल का छोटा व्यापारी अपनी मातृभाषा में देश की सबसे बड़ी अदालत का फैसला पढ़ और समझ सकता है.

5. ‘सफेद हाथी’ नहीं, मददगार है तकनीक

उन्होंने National Judicial Data Grid और e-Courts प्रोजेक्ट की सराहना की. आज कश्मीर या नगालैंड का नागरिक बिना दिल्ली आए वर्चुअल सुनवाई के जरिए सुप्रीम कोर्ट से जुड़ सकता है. वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के करीब एक-तिहाई मामलों की सुनवाई वर्चुअल हो रही है, जिससे समय और पैसा दोनों बच रहे हैं.

6. ‘ब्लैक बॉक्स’ की समस्या: AI के पास जवाब है, तर्क नहीं

AI की सीमाओं पर सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि AI बिजली की गति से उत्तर तो दे सकता है, लेकिन वह उसके पीछे का कारण नहीं बता सकता. न्याय केवल गणितीय आउटपुट नहीं है; इसमें तर्क और मानवीय विश्लेषण की जरूरत होती है, जो AI के ‘ब्लैक बॉक्स’ में गायब है.

7. फर्जी फैसलों पर सख्त चेतावनी

CJI ने अदालतों में AI द्वारा तैयार किए गए काल्पनिक फैसलों और मिसालों के इस्तेमाल पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत में फर्जी मिसालें पेश करना केवल एक गलती नहीं, बल्कि गंभीर पेशेवर कदाचार माना जाएगा.

8. जज का स्थान कोई मशीन नहीं ले सकती

उन्होंने जोर देकर कहा कि AI दस्तावेजों को छाँटने या क्लर्कियल काम में मदद कर सकता है, लेकिन वह विवेक और नैतिकता का विकल्प नहीं है. अंतिम फैसला और सत्य की रक्षा हमेशा एक मानवीय जज के हाथों में ही रहेगी.

9. एक्सेस और ईज ऑफ जस्टिस (Access & Ease of Justice)

CJI ने अपने विजन को दो स्तंभों पर टिका बताया:

  • पहुंच: नागरिक बिना किसी बाधा के कानून तक पहुँच सकें.
  • सुगमता: कानून की प्रक्रिया किसी भूलभुलैया जैसी न हो, बल्कि सरल और सहज हो.

10. भविष्य की ‘स्मार्ट कोर्ट’

भाषण के अंत में उन्होंने एक समार्र्टर कोर्ट की कल्पना की, जहाँ परंपरा और नवाचार का संतुलन होगा. उन्होंने कहा कि कानून और AI दो नदियों की तरह हैं, यदि हम उन्हें सही दिशा दें, तो वे तर्क, नैतिकता और सहानुभूति की एक ऐसी धारा बनाएंगे जो न्याय के सागर की ओर जाएगी.

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Written By: Shivani Singh
Last Updated: March 12, 2026 20:31:12 IST

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NXT Summit 2026: नई दिल्ली का भारत मंडपम आज एक ऐसे ऐतिहासिक संगम का गवाह बन रहा है, जहाँ दुनिया के 40 से अधिक देशों के 100 सांसद और दिग्गज राजनेता भारत की प्रगति की नई इबारत लिखने जुटे हैं. आज देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘भारत प्रोग्रेस रिपोर्ट’ जारी करेंगे. उससे पहले, दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 3 दिवसीय NXT कॉन्क्लेव 2026 के मंच से देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भविष्य की न्यायपालिका का एक स्पष्ट खाका पेश किया, जिसमें उन्होंने कानून को एक नदी और तकनीक को उसकी बदलती धाराओं के रूप में परिभाषित करते हुए यह साफ करते हुए कहा कि चाहे हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कितने ही बड़े युग में क्यों न प्रवेश कर लें, न्याय का आधार मानवीय संवेदना ही रहेगी. जिस तरह से हमारे जीवन में AI की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है ऐसे में मन में सवाल पैदा होता है कि क्या न्याय प्रणाली में रोबोट और AI जगह ले लेगा? इस पर CJI ने विस्तार से बात की है. आइये जानते हैं CJI सूर्यकांत के भाषण की 10 अहम बातें

1. कानून स्थिर नहीं, निरंतर प्रवाहमान है

अपने भाषण में CJI ने यूनानी दार्शनिक हेराक्लीटस का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह आप एक नदी में दोबारा कदम नहीं रख सकते क्योंकि पानी बदलता रहता है, वैसे ही कानून भी ‘लिविंग ऑर्गनिज्म’ है. नियम और कानून बदल सकते हैं, लेकिन न्याय की ‘नदी का तल’ हमेशा स्थिर और अटल रहता है.

2. पत्थरों से पिक्सल तक का सफर

न्यायपालिका के क्रमिक विकास पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हम मेसोपोटामिया के पत्थर के शिलालेखों और ताड़ के पत्तों से निकलकर प्रिंटिंग प्रेस तक पहुँचे और अब हम ‘कागज की दुनिया’ से ‘पिक्सल की दुनिया’ में कदम रख चुके हैं. यह बदलाव न्याय के लोकतंत्रीकरण का प्रतीक है.

3. AI हवा की तरह है, हमें पवनचक्की बनानी होगी

तकनीक और AI के डर पर उन्होंने एक पुरानी कहावत साझा की, ‘आप हवा को रोक नहीं सकते, लेकिन आप पवनचक्कियाँ ना सकते हैं.’ उनका स्पष्ट संदेश था कि हम तकनीक से पीछे नहीं हट सकते, बल्कि हमें इसे एक जिम्मेदार ढांचे के भीतर ढालना होगा.

4. SUAS और भाषाई बाधाओं का अंत

CJI ने ‘सुआस’ (SUAS) सॉफ्टवेयर की सफलता का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि यह AI टूल सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को 16 क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद कर रहा है. अब तमिलनाडु का किसान या पश्चिम बंगाल का छोटा व्यापारी अपनी मातृभाषा में देश की सबसे बड़ी अदालत का फैसला पढ़ और समझ सकता है.

5. ‘सफेद हाथी’ नहीं, मददगार है तकनीक

उन्होंने National Judicial Data Grid और e-Courts प्रोजेक्ट की सराहना की. आज कश्मीर या नगालैंड का नागरिक बिना दिल्ली आए वर्चुअल सुनवाई के जरिए सुप्रीम कोर्ट से जुड़ सकता है. वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के करीब एक-तिहाई मामलों की सुनवाई वर्चुअल हो रही है, जिससे समय और पैसा दोनों बच रहे हैं.

6. ‘ब्लैक बॉक्स’ की समस्या: AI के पास जवाब है, तर्क नहीं

AI की सीमाओं पर सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि AI बिजली की गति से उत्तर तो दे सकता है, लेकिन वह उसके पीछे का कारण नहीं बता सकता. न्याय केवल गणितीय आउटपुट नहीं है; इसमें तर्क और मानवीय विश्लेषण की जरूरत होती है, जो AI के ‘ब्लैक बॉक्स’ में गायब है.

7. फर्जी फैसलों पर सख्त चेतावनी

CJI ने अदालतों में AI द्वारा तैयार किए गए काल्पनिक फैसलों और मिसालों के इस्तेमाल पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत में फर्जी मिसालें पेश करना केवल एक गलती नहीं, बल्कि गंभीर पेशेवर कदाचार माना जाएगा.

8. जज का स्थान कोई मशीन नहीं ले सकती

उन्होंने जोर देकर कहा कि AI दस्तावेजों को छाँटने या क्लर्कियल काम में मदद कर सकता है, लेकिन वह विवेक और नैतिकता का विकल्प नहीं है. अंतिम फैसला और सत्य की रक्षा हमेशा एक मानवीय जज के हाथों में ही रहेगी.

9. एक्सेस और ईज ऑफ जस्टिस (Access & Ease of Justice)

CJI ने अपने विजन को दो स्तंभों पर टिका बताया:

  • पहुंच: नागरिक बिना किसी बाधा के कानून तक पहुँच सकें.
  • सुगमता: कानून की प्रक्रिया किसी भूलभुलैया जैसी न हो, बल्कि सरल और सहज हो.

10. भविष्य की ‘स्मार्ट कोर्ट’

भाषण के अंत में उन्होंने एक समार्र्टर कोर्ट की कल्पना की, जहाँ परंपरा और नवाचार का संतुलन होगा. उन्होंने कहा कि कानून और AI दो नदियों की तरह हैं, यदि हम उन्हें सही दिशा दें, तो वे तर्क, नैतिकता और सहानुभूति की एक ऐसी धारा बनाएंगे जो न्याय के सागर की ओर जाएगी.

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