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‘लद्दाख का शेर’ अब नहीं रहा, कौन हैं कर्नल सोनम वांगचुक? कारगिल युद्ध के असली हीरो की कैसे हुई मौत

Colonel Sonam Wangchuk: महावीर चक्र सम्मानित कर्नल सोनम वांगचुक दिल का दौरा पड़ने के कारण आज दुनिया को अलविदा कह दिया. इस दुखद घटना की जानकारी भारतीय सेना के पूर्व कमांडर कर्नल वाई.के. जोशी ने सोशल मीडिया X पर यह जानकारी साझा की. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें उनकी वीरता के किस्से.

Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-04-10 17:08:51

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Colonel Sonam Wangchuk Death: कर्नल सोनम वांगचुक जिन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था शुक्रवार को निधन हो गया. आज सुबह उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्होंने अंतिम सांस ली. महावीर चक्र विजेता कर्नल वांगचुक कारगिल युद्ध के सच्चे नायक थे. 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान, उन्होंने लद्दाख स्काउट्स की चौथी बटालियन की कमान संभाली थी.
 
 कर्नल सोनम वांगचुक के वीरता के किस्से काफी मशहूर थें. लद्दाख में उन्हें ‘असली शेर’ के नाम से जाना जाता था. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें उनके बारे में जानकारी.
 

पूर्व कमांडर कर्नल वाई.के. जोशी ने उनके निधन की जानकारी दी

भारतीय सेना के पूर्व कमांडर कर्नल वाई.के. जोशी ने सोशल मीडिया X पर यह जानकारी साझा की. अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा कि कर्नल सोनम वांगचुक (MVC) के अचानक निधन की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ. आज सुबह दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली. इस बहादुर सैनिक को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि. महावीर चक्र से सम्मानित कर्नल वांगचुक कारगिल युद्ध के सच्चे नायक थे. उनका समर्पण, बहादुरी और निस्वार्थ सेवा हमेशा याद रखी जाएगी.



 

कौन थें कर्नल सोनम वांगचुक?

कर्नल सोनम वांगचुक का जन्म 11 मई, 1964 को लद्दाख के लेह जिले के शंकर गांव में हुआ था. उनके पिता 14वें दलाई लामा के सुरक्षा अधिकारी के रूप में कार्यरत थे. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद भारतीय सेना की असम रेजिमेंट में शामिल हो गए. उन्होंने लद्दाख स्काउट्स की सिंधु विंग के साथ सेवा की. 
 
कर्नल सोनम वांगचुक, MVC (सेवानिवृत्त), भारतीय सेना के एक अत्यंत सम्मानित अधिकारी और कारगिल युद्ध के नायक थे, जिन्हें लद्दाख का शेर कहा जाता था. लद्दाख स्काउट्स के एक अनुभवी अधिकारी के तौर पर, उन्हें 1999 में बटालिक सेक्टर में एक महत्वपूर्ण रिज लाइन पर कब्ज़ा करने के लिए एक साहसी और ऊंचाई पर की गई सैन्य कार्रवाई का नेतृत्व करने हेतु ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया गया था.

कारगिल युद्ध के दौरान चोरबत ला दर्रे पर जीत हासिल की

कारगिल युद्ध के दौरान, कर्नल सोनम वांगचुक ने चोरबत ला दर्रे पर कब्जा करके भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक जीत हासिल की थी. उन्होंने लद्दाख स्काउट्स के सैनिकों का नेतृत्व किया और बेहद कठिन तथा दुर्गम मौसम और इलाके की परिस्थितियों के बीच पाकिस्तानी सैनिकों को पीछे धकेल दिया. उन्होंने चोरबत ला स्थित ऊंचे पहाड़ों पर दुश्मन की चौकियों पर कब्जा कर लिया, जिसके लिए उन्हें भारत के दूसरे सबसे बड़े सैन्य सम्मान, ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया गया.
 
 

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Last Updated: 2026-04-10 17:08:51

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Colonel Sonam Wangchuk Death: कर्नल सोनम वांगचुक जिन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था शुक्रवार को निधन हो गया. आज सुबह उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्होंने अंतिम सांस ली. महावीर चक्र विजेता कर्नल वांगचुक कारगिल युद्ध के सच्चे नायक थे. 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान, उन्होंने लद्दाख स्काउट्स की चौथी बटालियन की कमान संभाली थी.
 
 कर्नल सोनम वांगचुक के वीरता के किस्से काफी मशहूर थें. लद्दाख में उन्हें ‘असली शेर’ के नाम से जाना जाता था. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें उनके बारे में जानकारी.
 

पूर्व कमांडर कर्नल वाई.के. जोशी ने उनके निधन की जानकारी दी

भारतीय सेना के पूर्व कमांडर कर्नल वाई.के. जोशी ने सोशल मीडिया X पर यह जानकारी साझा की. अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा कि कर्नल सोनम वांगचुक (MVC) के अचानक निधन की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ. आज सुबह दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली. इस बहादुर सैनिक को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि. महावीर चक्र से सम्मानित कर्नल वांगचुक कारगिल युद्ध के सच्चे नायक थे. उनका समर्पण, बहादुरी और निस्वार्थ सेवा हमेशा याद रखी जाएगी.



 

कौन थें कर्नल सोनम वांगचुक?

कर्नल सोनम वांगचुक का जन्म 11 मई, 1964 को लद्दाख के लेह जिले के शंकर गांव में हुआ था. उनके पिता 14वें दलाई लामा के सुरक्षा अधिकारी के रूप में कार्यरत थे. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद भारतीय सेना की असम रेजिमेंट में शामिल हो गए. उन्होंने लद्दाख स्काउट्स की सिंधु विंग के साथ सेवा की. 
 
कर्नल सोनम वांगचुक, MVC (सेवानिवृत्त), भारतीय सेना के एक अत्यंत सम्मानित अधिकारी और कारगिल युद्ध के नायक थे, जिन्हें लद्दाख का शेर कहा जाता था. लद्दाख स्काउट्स के एक अनुभवी अधिकारी के तौर पर, उन्हें 1999 में बटालिक सेक्टर में एक महत्वपूर्ण रिज लाइन पर कब्ज़ा करने के लिए एक साहसी और ऊंचाई पर की गई सैन्य कार्रवाई का नेतृत्व करने हेतु ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया गया था.

कारगिल युद्ध के दौरान चोरबत ला दर्रे पर जीत हासिल की

कारगिल युद्ध के दौरान, कर्नल सोनम वांगचुक ने चोरबत ला दर्रे पर कब्जा करके भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक जीत हासिल की थी. उन्होंने लद्दाख स्काउट्स के सैनिकों का नेतृत्व किया और बेहद कठिन तथा दुर्गम मौसम और इलाके की परिस्थितियों के बीच पाकिस्तानी सैनिकों को पीछे धकेल दिया. उन्होंने चोरबत ला स्थित ऊंचे पहाड़ों पर दुश्मन की चौकियों पर कब्जा कर लिया, जिसके लिए उन्हें भारत के दूसरे सबसे बड़े सैन्य सम्मान, ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया गया.
 
 

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