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वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर ने पकड़ी स्पीड, करीब 14 स्टेशन होंगे शामिल, फास्ट ट्रैक नीति से होगा काम

Delhi-Varanasi Rail Corridor: दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का काम काफी तेजी से चल रहा है. इस डेवलपमेंट की जानकारी देते हुए एक सीनियर अधिकारियों ने बताया कि सराय काले खां जंक्शन पहले से ही राजधानी का पहला मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब है.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: 2026-02-27 08:54:41

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Delhi-Varanasi Rail Corridor: दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का काम काफी तेजी से चल रहा है. इस डेवलपमेंट की जानकारी देते हुए एक सीनियर अधिकारियों ने बताया कि सराय काले खां जंक्शन पहले से ही राजधानी का पहला मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब है. यह दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के दिल्ली वाले हिस्से को भी होस्ट करेगा. उन्होंने कहा कि आने वाले स्टेशन को जोड़ने के लिए सराय काले खां के इन्फ्लुएंस जोन प्लान में बदलाव किया जाएगा.

दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल (HSR) कॉरिडोर यूनियन बजट 2026-27 में घोषित सात नई हाई-स्पीड रेल लाइनों में एक प्रायोरिटी प्रोजेक्ट है. लगभग 813 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए इसका मकसद बड़े शहरों को जोड़ना है. रेलवे बोर्ड ने नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) को डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को अपडेट करने का निर्देश दिया है.

इन्फ्लुएंस जोन के लिए बनी कमेटी

नाम न बताने की शर्त पर एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने कहा कि निज़ामुद्दीन-सराय काले खां मल्टीमॉडल ट्रांजिट हब (MMTH) के ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट नोड के संबंध में इन्फ्लुएंस ज़ोन प्लान (IZP) को मंज़ूरी देने के लिए एक हाई-पावर्ड कमेटी बनी हुई है. सराय काले खां में प्रस्तावित दिल्ली हाई स्पीड रेलवे स्टेशन, मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन (MMI) और अनुमानित राइडरशिप डेटा और अलाइनमेंट जैसे अन्य ज़रूरी डेटा NHSRCL द्वारा शेयर किए गए हैं.

लेकिन, पिछली मीटिंग में कॉरिडोर को अभी तक केंद्र सरकार द्वारा मंज़ूरी नहीं दी गई थी और इसलिए, NHSRCL के प्रस्ताव को इन्फ्लुएंस ज़ोन में शामिल नहीं किया गया था. आसानी से इंटीग्रेशन सुनिश्चित करने के लिए प्लान में बदलाव किया जाएगा. 

सराय काले खां और निजामुद्दीन के पास बनेंगे स्टेशन 

अधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित कॉरिडोर की प्लानिंग शुरू करने के लिए इन्फ्लुएंस ज़ोन की डिटेल्स NHSRCL के साथ शेयर की गई हैं. NHSRCL एक स्पेशल पर्पस व्हीकल है जिसे 2016 में भारत के हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को फाइनेंस करने, बनाने, मेंटेन करने और मैनेज करने के लिए शामिल किया गया था. इन्फ्लुएंस ज़ोन प्लानिंग में शामिल एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए स्टेशन सराय काले खां और निज़ामुद्दीन स्टेशनों के पास बनाए जाएंगे. अधिकारी ने कहा कि NHRCL प्रोजेक्ट के लिए अपनी DPR अपडेट करेगा और ज़मीनी हकीकत के हिसाब से नई जानकारी शेयर करेगा. 

सराय काले खां में स्टेशन

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, NHRCL की तरफ से हाई-पावर्ड कमिटी को लिखे एक लेटर में लिखा है कि दिल्ली वाराणसी कॉरिडोर का हाई स्पीड रेलवे स्टेशन सराय काले खां में प्रपोज़ किया गया है. आगे HSR स्टेशन को द्वारका से जोड़ने की योजना है, जिसमें नेशनल HSR नेटवर्क की कल्पना की गई है. रेल मंत्रालय के आदेश के अनुसार, दिल्ली से शुरू होने वाले तीन HSR कॉरिडोर की योजना है, जिसमें दिल्ली वाराणसी भी शामिल है.  दिल्ली मेट्रो, निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन और RRTS स्टेशन सराय काले खां बस स्टैंड के पास हैं. इस जगह पर ट्रैफिक लोड कम करने के लिए इन्फ्लुएंस ज़ोन घोषित करने के अलावा एक TOD स्कीम भी बनाई गई है, जिसके तहत एक ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान बनाया गया है.

पूरा रोडमैप है तैयार

इंटीग्रेशन प्लान के मुताबिक, ISBT के साथ चौड़ी सड़कें बनाने, CNG फ्यूल स्टेशन को रीडेवलप करने और रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले स्काईवॉक पर नाइट शेल्टर को शिफ्ट करने के लिए एक नया ट्रैफिक सर्कुलेशन प्लान जैसे कई कदम उठाए जाएंगे. वीर हकीकत राय ISBT और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन को डेडिकेटेड FOBs के ज़रिए जोड़ा जा रहा है. जबकि, RRTS स्टेशन के पास एक एंट्रेंस के ज़रिए दिल्ली मेट्रो पिंक लाइन के लिए एक लिंक बनाया जा रहा है. PWD लंबे समय में रिंग रोड पर मौजूदा फ्लाईओवर को बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर तक बढ़ाने का भी प्लान बना रहा है.

इन स्टेशनों को किया जाएगा शामिल

दिल्ली- बनारस हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का काम फास्ट ट्रैक नीति के तहत हो रहा है. इसके प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली का सराय काले खां, नोएडा, जेवर (इंटरनेशनल एयरपोर्ट), मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या (कनेक्टिंग लिंक), रायबरेली, प्रयागराज, भदोही और वाराणसी समेत करीब 14 स्टेशनों को शामिल किया जाएगा. मतलब दिल्ली से वाराणसी तक के इस सफर में सिर्फ 4 घंटे का वक्त लगेगा. यह प्रोजेक्ट लगभग 840 किमी से ज्यादा लंबा है. यह दोनों शहरों के बीच सफर को बेहद आसान और सुविधाजनक बनाएगा.

अभी तकरीबन 8 से 12 घंटे में यह डिस्टेंस पूरा होता है. अधिकारियों के मुताबिक, अभी इसका LiDAR (लेजर तकनीक) सर्वे की शुरुआत की गई है. जिससे कि सटीक रूट मैप बनाकर तैयार किया जा सके. इससे प्रोजेक्ट के निर्माण में कुल खर्च की जानकारी मिलेगी. 

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