What is Ectopic Pregnancy: प्रेग्नेंसी हर महिला के लिए बेहद सुखद पहलू है. मां के लिए यह पल जितना सुखद, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी होता है. बेशक कुछ महिलाएं अपनी प्रेग्नेंसी को खूब सेलिब्रेट करती हों, लेकिन यह सफल आसान नहीं है. क्योंकि, गर्भावस्था के समय महिलाओं के शरीर में तेजी से बदलाव होता है, जिससे कई तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे वक्त में उन्हें शारीरिक और मानसिक बदलावों के लिए बिल्कुल तैयार रहने की जरूरत होती है. सावधानी इसलिए भी, क्योंकि कुछ महिलाओं में नॉर्मल प्रेग्नेंसी की तरह भ्रूण सही जगह पर विकसित नहीं हो पाता है, जो महिला की जान तक ले सकता है.
डॉक्टर्स की मानें तो, प्रेग्नेंसी कई तरह की होती है जिनमें मल्टीपल प्रेग्नेंसी, मोलर प्रेग्नेंसी, ट्यूबल प्रेग्नेंसी, ल्यूपस प्रेग्नेंसी और इंट्रायूट्राइन प्रेग्नेंसी शामिल हैं. इसमें इंट्रायूट्राइन प्रेग्नेंसी सेफ होती है, क्योंकि इसमें भ्रूण यूट्रस में ही विकसित होता है, लेकिन एक प्रेग्नेंसी ऐसी भी होती है, जिसमें बच्चा यूट्रस में विकसित नहीं होता है. मेडिकल की भाषा में यह एक्टोपिक प्रेग्नेंसी(Ectopic Pregnancy) कहलाती है. बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस काजोल भी इस खतरनाक प्रेग्नेंसी को झेल चुकी हैं. इसलिए प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव आते ही तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए. अब सवाल है कि आखिर एक्टोपिक प्रेग्नेंसी क्या है? फैलोपियन ट्यूब में प्रेग्नेंसी कितनी खतरनाक? आइए जानते हैं इस बारे में-
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी क्या है?
नोएडा की सीनियर मेडिकल ऑफिसर एवं गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा पाठक कहती हैं कि, एक्टोपिक प्रेगनेंसी एक ऐसी गंभीर स्थिति है, जिसमें निषेचित अंडा (fertilized egg) गर्भाशय (uterus) की गुहा के बाहर, आमतौर पर फैलोपियन ट्यूब में, प्रत्यारोपित (implants) होकर विकसित होने लगता है. यह सामान्य प्रेगनेंसी की तरह आगे नहीं बढ़ सकती और यदि समय पर इलाज न किया जाए, तो यह फटने से आंतरिक रक्तस्राव का कारण बन सकती है, जो कई बार जानलेवा हो सकता है.
100 में से 2 महिलाओं में एक्टोपिक प्रेग्नेंसी संभव
डॉ. पाठक बताती हैं कि, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी हर किसी महिला को नहीं हो सकती है. यह किसी 100 में से 2 महिला में देखने को मिलती है. बता दें कि, सामान्यता यही होता है कि प्रेग्नेंसी यूट्रस में विकसित होती है. इसे इंट्रायूट्राइन प्रेग्नेंसी कहा जाता है. वहीं, कुछ मामलों में महिला का फर्टाइल एग फैलोपियन ट्यूब में फंस जाता है और इसी में भ्रूण विकसित होने लगता है. जोकि, बेहद गंभीर स्थिति कहलाती है.
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी कहां होती है?
डॉक्टर कहती हैं कि, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी यूट्रस के बाहर होती है. यूट्रस के दोनों तरफ ओवरी होती है जो इसे फैलोपियन ट्यूब से जोड़ती है. हर महीने ओव्यूलेशन होने पर यानी पीरियड्स के बाद ओवरी से एग जिसे ओवम कहते हैं, वह रिलीज होता है जो फैलोपियन ट्यूब में फर्टिलाइज होकर यूट्रस में पहुंचता है. लेकिन कई बार यह फर्टाइल एग फैलोपियन ट्यूब में ही फंस जाता है जिससे भ्रूण इसी नली में विकसित होने लगता है. यही एक्टोपिक प्रेग्नेंसी या ट्यूबल प्रेग्नेंसी कहलाती है.
क्या फट सकती है फैलोपियन ट्यूब?
फैलोपियन ट्यूब एक नली होती है जो 5 इंच लंबी और 0.2 से 0.6 इंच चौड़ी होती है. जब भ्रूण समय के साथ बढ़ने लगता है तो इस ट्यूब के फटने का खतरा बढ़ जाता है. इससे पेट के अंदर ब्लीडिंग होने लगती है और महिला इससे अनजान होती है. कई बार मरीज शॉक में चला जाता है क्योंकि ब्लड प्रेशर कम होने लगता है और बेहोशी आने लगती है. ऐसा प्रेग्नेंसी के 7वें या 8वें हफ्ते में हो सकता है इसलिए डॉक्टर प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद सोनोग्राफी कराने को कहते हैं ताकि प्रेग्नेंसी किस जगह ठहरी है, नजर आ सकते.
फैलोपियन ट्यूब की प्रेग्नेंसी कैसे पता चलती है?
डॉक्टर कहती हैं कि, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का पता सोनोग्राफी में ही पता चलता है. अगर किसी महिला को यह प्रेग्नेंसी है तो उनका प्रेग्नेंसी किट से टेस्ट पॉजिटिव ही आता है. बता दें कि, महिला के प्रेग्नेंट होते ही शरीर में बीटा ह्यूमन कॉरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (HCG) नाम का हार्मोन बनता है. यह ब्लड और यूरिन दोनों से डिटेक्ट होता है. अगर किसी महिला को यूट्रस के बाहर फैलोपियन ट्यूब में गर्भ ठहर जाए तो प्रेग्नेंसी टेस्ट कार्ड (PTC) में गहरी के बजाय हल्की लाइन आएगी. इसके साथ ही महिला को ब्लड स्पॉटिंग और पेट में दर्द होता है. इसलिए प्रेग्नेंसी किट की मदद खुद प्रेग्नेंसी टेस्ट करने के बाद डॉक्टर से जरूर चेकअप कराना चाहिए.
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के लक्षण क्या हैं?
जब भी एक महिला प्रेग्नेंट होती है तो उनके शरीर में ह्यूमन कॉरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (HCG) नाम का हार्मोन रिलीज होता है. यही हार्मोन प्रेग्नेंसी कंफर्म करता है. प्रेग्नेंसी किट में यूरिन लगाने के बाद इसी हार्मोन को डिटेक्ट किया जाता है. एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में भी प्रेग्नेंसी टेस्ट में इसकी वजह से रिजल्ट पॉजिटिव आता है. नॉर्मल प्रेग्नेंसी की तरह इसमें भी उल्टियां आना, जी मिचलाना, थकान होना या ब्रेस्ट का सख्त होना महसूस होता है. लेकिन शुरुआती महीनों में ब्लीडिंग भी हो सकती है. अगर फैलोपियन ट्यूब से खून लीक कर रहा हो तो कमर में तेज दर्द रह सकता है.
किन महिलाओं एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के खतरे?
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. जो महिलाएं 35 साल की उम्र के बाद प्रेग्नेंट होती हैं, उनमें इसका खतरा बढ़ जाता है. वहीं, जो एंड्रियोमेट्रियोसिस की शिकार रही हों या इनफर्टिलिटी की हिस्ट्री रही हो, उनके साथ भी ऐसा हो सकता है. इसके अलावा असंतुलित हार्मोन, एब्नॉर्मल फर्टाइल एग, आईवीएफ ट्रीटमेंट और स्मोकिंग भी एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का कारण बन सकते हैं. वैसे तो एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में फर्टाइल एग अपने आप ही तुरंत नष्ट हो जाता है लेकिन अगर प्रेग्नेंसी ठहर जाए तो फैलोपियन ट्यूब को हमेशा के लिए निकालना पड़ता है.