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FAQ Explainer: हमारा शरीर कितनी ठंड सह सकता है? किन लोगों को सर्दी ज्यादा लगती है? समझें तापमान का गणित और बचाव

देशभर में सर्दी अपने पूरे सितम पर है. श्रीनगर जैसे कई बड़े शहरों के हालात तो बहुत ही गंभीर बने हुए हैं. यहां हो रही बर्फबारी ने लोगों का जीना दुश्वार कर रखा है. ऐसे हालात देखने के बाद सोचने की बात यह है कि, आखिर इंसान का शरीर कितनी ठंड सह सकता है? कुछ लोगों को ज्यादा ठंड क्यों लगती है. आइए जानते हैं बॉडी टेंपरेचर की गणित-

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: January 27, 2026 17:10:34 IST

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देशभर में सर्दी अपने पूरे सितम पर है. श्रीनगर जैसे कई बड़े शहरों के हालात तो बहुत ही गंभीर बने हुए हैं. यहां हो रही बर्फबारी ने लोगों का जीना दुश्वार कर रखा है. ऐसे हालात देखने के बाद सोचने की बात यह है कि, आखिर इंसान का शरीर कितनी ठंड सह सकता है? कितने तापमान में क्या होती है परेशानी? ये सवाल आपका भी हो सकता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, इंसान होमियोथर्म होते हैं. यानी हमारे शरीर का तापमान सामान्यत 98.6°F के आसपास रहता है. यही तापमान ऑर्गन और ब्रेन के सही ढंग से काम करने के लिए जरूरी है. लेकिन, जब शरीर का तापमान इस सीमा से नीचे गिरने लगता है, तो शरीर का नेचुरल सेफ्टी सिस्टम जैसे त्वचा में रक्त प्रवाह कम करना, कंपकंपी और रोंगटे खड़े होना भी नाकाम पड़ सकती हैं.

क्या है शरीर और उसके तापमान की गणित

डीडब्ल्यू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हमारा शरीर सबसे अच्छी तरह से तब काम करता है जब अंदरूनी तापमान 36.5 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच हो. जब बाहर का तापमान गिरता है तो शरीर तुरंत अपना मेटाबॉलिज्म बढ़ा देता है. ताकि ज्यादा गर्मी बना सके. लेकिन कम खून का मतलब है कि कोशिकाएं ज्यादा कमजोर हो जाती हैं. सबसे पहले हाथ-पैरों की उंगलियां नाक और कान में दर्द होने लगता है. इसके बाद अंदरूनी अंग भी प्रभावित होने लगते हैं. सिर्फ 1-2 डिग्री सेल्सियस तापमान गिरते ही हम कांपने लगते हैं. ये शरीर की ज्यादा गर्मी पैदा करने की कोशिश होती है. लेकिन अगर तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाए तो हालात गंभीर हो जाते हैं. कांपना बंद हो जाता है. हाथ-पैर सुन्न पड़ जाते हैं. ऐसी स्थिति में चलना-फिरना या ठीक से बोलना तक मुश्किल हो जाता है. अगर शरीर का तापमान 28 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाए तो दिमाग काम करना बंद कर देता है. इंसान बेहोश हो जाता है और दिल की धड़कन 60 बीट से गिरकर सिर्फ 1-2 बीट तक पहुंच जाती है.

हाइपोथर्मिया क्या है?

बता दें कि, 95°F से नीचे तापमान जाने की स्थिति को हाइपोथर्मिया कहा जाता है, जो आम तौर पर खतरनाक मानी जाती है. हालांकि, मेडिकल साइंस में कुछ विशेष परिस्थितियों में कंट्रोल रूप से शरीर को ठंडा करना जान बचाने वाला भी साबित होता है.

हाइपोथर्मिया के खतरे क्या हैं?

हल्का हाइपोथर्मिया (89.6–95°F) में भूख, मतली, भ्रम और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिख सकते हैं. मध्यम अवस्था (89.6°F से नीचे) में सुस्ती, धीमी सांस और हार्टबीट देखी जाती है. हाइपोथर्मिया (82.4°F से नीचे) में ब्लडप्रेशर और दिल की धड़कन खतरनाक रूप से गिर जाती है, और शरीर “शटडाउन” की ओर बढ़ता है.

हाइपोथर्मिया से उपचार का हिस्सा

दिल या ब्रेन सर्जरी में डॉक्टर कभी-कभी कंट्रोल्ड ठंडक का उपयोग करते हैं ताकि अंगों को क्षति से बचाया जा सके. 1961 में एक मरीज को 39.6°F तक ठंडा किया गया जिससे उसका ब्रेन डैमेज न हो. हालांकि, आधुनिक चिकित्सा अब न्यूनतम आवश्यक ठंडक पर जोर देती है, क्योंकि इससे संक्रमण, रक्त का थक्का न बनना और किडनी समस्याएं जैसे जोखिम जुड़े हैं.

किन लोगों का ज्यादा ठंड लगती है?

थायराइड की समस्या: हाइपोथायराइडिज्म एक स्थिति है जब थायराइड ग्लैंड कम एक्टिव होता है. थायराइड ग्लैंड बहुत सारे मेटाबौलिज्म प्रक्रियाओं के लिए उत्तरदायी है. इसका एक काम शरीर के तापमान को कंट्रोल करना भी है. जाहिर है हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित व्यक्ति ज्यादा ठंड महसूस करते हैं क्योंकि उन के शरीर में थायराइड हार्मोन की कमी रहती है.

वजन बहुत कम होना: अगर आपका वजन आपकी लंबाई के अनुपात में काफी कम है तो संभव है कि आपको ठंड भी बहुत लगती हो. अगर आपका औसत वजन बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) 18.5 से कम है तो आपके शरीर में वसा भी कम है, जिससे शरीर गर्म नहीं रह पाता.शरीर को बेहद कम कैलरी की मदद से अपना सारा जरूरी काम करना पड़ रहा है. इस वजह से मेटाबॉलिज्म बाधित होता है और शरीर पर्याप्त गर्मी उत्पन्न नहीं कर पाता.

ज्यादा उम्र होना: अक्सर लोगों को कहते सुना होगा कि बढ़ती उम्र की वजह से सर्दी ज्यादा लग रही है. जी हां, ये बिलकुल सत्य है. बता दें कि, अधिक उम्र में भी ठंड अधिक लगती है. खासकर 60 साल के बाद व्यक्ति का मेटाबोलिज्म स्लो हो जाता है. इस वजह से शरीर कम हीट पैदा करता है.

आयरन की कमी: पूरे शरीर की लाल रक्त कोशिकाओं में ऑक्सीजन पहुंचाने के अलावा शरीर के विभिन्न हिस्सों से गर्मी और पोषक तत्वों को लाने-पहुंचाने में आयरन की अहम भूमिका होती है. शरीर में आयरन की कमी का सीधा मतलब यह है कि शरीर अपने ये सभी काम सुचारू रूप से कर पाने में सफल नहीं हो पाएगा. आयरन की इस कमी के कारण आपको कंपकपी भी शुरू हो सकती है.

विटामिन बी12 की कमी: विटामिन बी12 शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाता है. शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने का काम विटामिन बी12 ही करता है. इस विटामिन की कमी से लाल रक्त कोशिकाएं पूरे शरीर में ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पातीं और परिणामस्वरूप लगातार ठंड लगती रहती है.

प्रेगनेंसी: प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को एनीमिया और ब्लड सर्कुलेशन की शिकायत हो जाती है. इस वजह से कई बार ठंड लगने खासकर हाथ पैरों के ठंडा होने की शिकायत करती है.

नींद की कमी: नींद की कमी और थकान के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और इस कारण शरीर का औसत तापमान कम हो जाता है.

ठंड से खुद को कैसे बचाएं

शराब न पीएं: ये ब्लड वेसल्स को फैलाती है और शरीर का तापमान तेजी से गिरता है.
गर्म पानी की बोतल को सीधा यूज न करें: ये सुन्न हो चुकी त्वचा पर जलने का कारण बन सकती है.

क्या करना चाहिए

  • शरीर को हिलाएं-डुलाएं यानी एक्टिव रखें
  • गर्म लेयर के कपड़े पहनें
  • अपने आहार में फल, सूखे मेवे और स्प्राउट्स शामिल करें.
  • तरल पदार्थों का सेवन ज्यादा करें. जंक फूड से दूर रहें.
  • गेहूं की घास से बने जूस के नियमित सेवन से भी लाभ होगा.
  • फाइबर से भरपूर चीजों का सेवन करें.

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